याेग भगाए राेग:भुजंगासन और उस्ट्रासन से मजबूत हाेंगे फेफड़े, मत्स्यासन से दूर होंगी सांस की दिक्कतें व चक्रासन से घटेगी पेट-कमर की चर्बी

 

फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो

  • कोरोना को हराने के बाद भी धनबाद के 179 लोगों में गंभीर समस्याएं, उनके लिए कारगर हैं ये 4 योग
  • ये खबर इसलिए जरूरी- पाेस्ट काेविड ओपीडी में पहुंचे 72 लोगों में कमजोरी, 36 काे शुगर लेवल बढ़ने, 24 काे हंफनी, 22 काे भूलने की शिकायत
  • आसनाें से मिलनेवाले फायदे और उनके अभ्यास के तरीके के बारे में बता रहे हैं पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ याेग शिक्षक किशाेर कुमार

काेराेना से स्वस्थ हाे जाने के बाद भी कई लाेग सांस लेने में तकलीफ, हंफनी, कमजाेरी, शुगर लेवल बढ़ने की समस्याओं से जूझ रहे हैं। एसएनएमएमसीएच के पाेस्ट काेविड ओपीडी में 1 जून से अब तक 179 ऐसे लाेग पहुंचे। उनमें से 72 ने कमजाेरी की शिकायत की। 36 लाेगाें काे शुगर लेवल अचानक बढ़ जाने, 24 काे हंफनी, 22 काे बातें भूल जाने और मानसिक परेशानियां हैं। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं, याेगाभ्यास की सलाह भी दी जा रही है।

महर्षि पतंजलि याेग समिति से जुड़े वरिष्ठ याेग शिक्षक किशाेर कुमार बताते हैं कि याेग की ऐसी कई मुद्राएं हैं, जाे पाेस्ट काेविड ट्रीटमेंट में कारगर हैं। भुजंगासन, उष्ट्रासन, मत्स्यासन, सेतुबंधासन, ताड़ासन के नियमित अभ्यास से फेफड़े मजबूत हाेते हैं। अर्धचक्रासन, अनुलाेम-विलाेम, भ्रामरी, कपालभाती आदि भी जल्द स्वस्थ हाेने में मदद करते हैं और शरीर की अन्य परेशानियां भी दूर करते हैं।

भुजंगासन- स्पाइनल काॅर्ड (मेरुदंड) संबंधी परेशानियां दूर हाेती हैं, फेफड़े मजबूत हाेते हैं

भुजंगासन

भुजंगासन

तरीका- पेट के बल लेट जाएं। दाेनाें हथेलियाें काे कंधे के दाेनाें ओर रखें। पैरों को सटाए हुए हथेलियों के बल पर सांस लेते हुए शरीर को नाभि तक उठाएं। 10-30 सेकेंड तक रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए लेटने की मुद्रा में लाैटे आएं।

उस्ट्रासन- फेफड़ाें काे लाभ मिलता है, सांस लेने में आसानी होती है, शरीर स्वस्थ होता है

उस्ट्रासन

उस्ट्रासन

तरीका- वज्रासन में बैठ कर घुटने के बल खड़े हाे जाएं। दाेनाें हाथाें काे ऊपर ले जाते हुए अपने पैराें की एड़ी काे पीछे से पकड़ने की काेशिश करें। हर्निया, सर्वाइकल, गंभीर कमर दर्द, उच्च रक्तचाप, घुटना दर्द के राेगी अभ्यास न करें।

मत्स्यासन- फेफड़े मजबूत हाेते हैं, सांस संबंधी तकलीफों में भी काफी आराम मिल सकता है

मत्स्यासन

मत्स्यासन

तरीका- जमीन पर सीधे लेट जाएं। दाेनाें हाथाें काे कमर के पास रख लेें। सिर जमीन से सटाए रखकर फिर कमर से गर्दन तक उठाने का प्रयास करें। दाेनाें हाथ जंघाओं पर ले आएं। थाेड़ी देर ऐसे ही रहें, फिर आराम की मुद्रा में लौट जाएं।

चक्रासन- पेट और कमर की चर्बी कम होती है, मेरुदंड की मांसपेशियां मजबूती हाेती हैं

चक्रासन

चक्रासन

तरीका- पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पांव घुटने से मोड़े। पांव फैलाकर व दोनों हाथों को कंधे के किनारे रखें। सांस लेते हुए बीच से शरीर को उठाएं व सांस छोड़ते हुए नीचे आएं। पांव खोलें, हाथ को कमर के किनारे रखते हुए विश्राम करें।

नाेट- पेट की सर्जरी करानेवालों, गर्भवतियों को भुजंगासन, उस्ट्रासन, मत्स्यासन नहीं करने की सलाह दी जाती है। हाइ ब्लड प्रेशर, कमर में दर्द, स्पाइनल कॉर्ड में चोट या सर्जरी की स्थिति में भी विशेषज्ञ की सलाह पर ही योग करें।

 

खबरें और भी हैं…

Check Also

बोकारो कोर्ट का फैसला:रिश्ता शर्मसार करने वाले सौतेले मामा को 30 साल की जेल, एक लाख का जुर्माना भी; नाबालिग भांजी से किया था दुष्कर्म

  कोर्ट ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोपी को 30 साल के सश्रम कारावास …