मौसम में बदलाव का डर:शिमला के बागी गांव में 250 परिवार, सभी सेब पर निर्भर, हर साल करीब 5 लाख पेटियों का उत्पादन

 

शिमला जिला के गुम्मा के बागी गांव की ये तस्वीर है। यहां 7709 फीट की ऊंचाई पर सेब की खेती होती है। हालांकि, मौसम में बदलाव के चलते किसानों में फसल खराब होने का डर है। इसलिए किसानों ने पूरी पहाड़ी पर लगी फसल को सफेद जालीदार चादर से ढंक दिया है।

किसानों का कहना है कि माॅनसून के चलते बारिश हो रही है, ओले गिरने की भी आशंका है। गांव के प्रधान रूपलाल जस्टा कहते हैं कि ओलों से बचाव के लिए लोगों ने अपने खर्चे पर हेलनेट (सफेद चादर) खरीदे हैं। इस हेलनेट से सेब पर ओलों की मार नहीं पड़ती। मॉनसून में ये काफी मददगार साबित होते हैं।

हर घर का अपना बगीचा

बागी गांव में लगभग ढाई सौ परिवार रहते हैं, सभी सेब उत्पादक हैं। रूपलाल जस्टा कहते हैं कि ओले से बचाव के लिए लोगों ने अपने खर्चे पर हेलनेट खरीदे हैं। बागी गांव में अधिकतर रॉयल डिलिशियस, गेलगाला और गोल्डन सेब का उत्पादन होता है। गांव में कोई परिवार ऐसा नहीं जिसके सेब के अपने बगीचे न हों। किसी के हजार तो किसी के दस हजार पेटियां सेब का उत्पादन होता है। इस बार उम्मीद है कि यहां से पांच लाख पेटियां बाजार में पहुंचेंगी।

चिंता ये

हर साल सेब के 10,000 से अधिक पेटियों का उत्पादन करने वाले बागी के प्रतिष्ठित बागवान हरदयाल रोहटा सेब की मार्केटिंग व्यवस्था से चिंतित है। उनका कहना है कि मल्टीनेशनल कंपनियों के सेब खरीद में उतरने के बाद मार्केट पर परोक्ष रूप से बड़े पूंजीपतियों की नीतियों के प्रभाव में है।

 

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