मौतें छिपाईं या एडजस्ट:कोरोना रिकाॅर्ड में जितनी मौतें, उनसे ज्यादा जलीं लाशें; आंकड़े सरकार की ही दो एजेंसियां सही नहीं कर पा रही है, राज्य और जिलों के आंकड़ों में फर्क है

दूसरी लहर में दुर्ग जिला: कोविड से 971 मौतें बताईं, जबकि दुर्ग, भिलाई और निकुम में ही प्रोटोकॉल से 2739 शव जलाए। - Dainik Bhaskar

दूसरी लहर में दुर्ग जिला: कोविड से 971 मौतें बताईं, जबकि दुर्ग, भिलाई और निकुम में ही प्रोटोकॉल से 2739 शव जलाए।

भास्कर ने रायपुर जिले में कोरोना मौत के आंकड़ों में आ रहे अंतर की जमीनी पड़ताल की, तो कई हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। दरअसल, इस साल मार्च, अप्रैल और मई के महीने में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रायपुर जिले में कुल 2294 मौत हुई है, जबकि इस अवधि में केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही 2868 मौतें हुई है। राज्य और सीएमओ दफ्तर के कोरोना मौत आंकड़े में साफ तौर पर 313 का अंतर आ रहा था। ग्रामीण अंचलों में इस दौरान सरकार के जन्म मृत्यु रजिस्ट्रार के पंजीयन में ही रायपुर जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर कुल 13643 से अधिक मौत हो चुकी है।

जबकि इस अवधि में कोरोना मौत का सरकारी आंकड़ा केवल 2294 का ही है। मौत के आंकड़ों के अंतर को दूर करने के लिए हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने एक नई डेथ ऑडिट कमेटी बनाई है, जिसमें पांच अफसरों को रखा गया है। परसदा सरपंच का दावा: केवल एक मौत सरकारी आंकड़ा ही चार से ज्यादा का परसदा गांव की सरपंच पार्वती जांगड़े का दावा है कि कोरोना की दूसरी लहर में उनके गांव में केवल एक ही मौत हुई है। भास्कर टीम ने जब रायपुर जिले के कोरोना मौत के दस्तावेज को खंगाला तो इस गांव में चार से अधिक मौत दर्ज मिली।

सरपंच के मुताबिक पिछले तीन माह में यहां करीब 17 से अधिक सामान्य मौतें हुई है। कोरोना मौत के आंकड़ों में इस विरोधाभास की जब जमीनी पड़ताल की तो इस गांव के लोगों का भी कहना था कि गांव में इस दौरान दो से तीन दर्जन मौतें हुई हैं। इसमें भी ज्यादातर मौतें युवाओं की है। ज्यादातर मृतकों में सर्दी खांसी बुखार जैसे मामले भी मिले हैं। बहुत से लोगों ने इस दौरान कोरोना जांच भी नहीं करवाई। स्थानीय स्तर पर बहुत से लोग हेल्थ वर्कर के जरिए मिली दवाइयां खाते रहे, कुछ उनको खाकर ठीक हुए तो कुछ की तबीयत इतनी बिगड़ी की वो संभल ही नहीं पाए।

ग्रामीणजनों ने बताई ये हैरान करने वाली सच्चाई

  • पलौद गांव में केवल 2 ही मौत दर्ज थी लेकिन स्थानीय वासियों से पता चला कि अप्रैल और मई के महीने में यहां एक दर्जन से ज्यादा कोरोना मौतें हुई। गांव के लोगों के मुताबिक दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण के अधिक मामले होने के बावजूद बहुत से लोगों ने कोरोना जांच नहीं करवाई, जबकि लक्षण पूरे थे।
  • मंदिर हसौद में पिछले तीन माह में कुल 6 मौत दर्ज है। 15 हजार की आबादी है। गांव के लोगों का कहना है कि कोरोना काल में करीब एक दर्जन से अधिक मौत डायरिया, शुगर आदि दूसरी बीमारियों से हुई है। जबकि यहां 350 पेशेंट हाेमआइसोलेशन में थे। किसान राजेश यादव कहते हैं रोज 6 से 7 लोग मर रहे थे।

जिलों से कहा गया है, वो संशोधित सही आंकड़े दें
हमने सभी जिलों से कहा है कि वो कोरोना मौत के आंकड़ों को डेथ इनवेस्टीगेशन के रिपोर्ट के साथ दोबारा पेश करें। किसी भी आंकड़े को हम नहीं छिपाएंगे। जो मौतें दर्ज नहीं हो पाई है, उनको संशोधित कर रिपोर्ट किया जा रहा है।
– डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर, एपिडेमिक कंट्रोल, स्वास्थ्य विभाग

दूसरी लहर में दुर्ग जिला; कोविड से 971 मौतें बताईं, जबकि दुर्ग, भिलाई और निकुम में ही प्रोटोकॉल से 2739 शव जलाए

कोरोना की दूसरी लहर में हुई मौतों के सरकारी आंकड़ों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जिले और राज्य के आंकड़ों में पहले ही अंतर रहा। जब इसकी जमीनी हकीकत खंगाली गई, तो आंकड़े और भी अलग हैं। 1 अप्रैल से 20 मई के बीच दूसरी लहर के 50 दिनों में सरकार के मुताबिक दुर्ग में 971 लोगों की मौत कोरोना से हुई। भास्कर ने जब इसे लेकर पड़ताल की तो निकुम और पाटन ब्लॉक व दो शहरी क्षेत्र दुर्ग व भिलाई में 2739 अर्थियां श्मशानों तक पहुंची। ये सारे लोगों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

अप्रैल में दो की जगह 4 जगह शव जलने लगे

  • दूसरी लहर में मौतों की संख्या इतनी बढ़ी कि प्रशासन को कोविड से नामित श्मशानों की संख्या बढ़ानी पड़ी। इससे पहले जिले के केवल दो श्मशान क्रमश : रामनगर और दुर्ग में ही कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार हो रहा था। संख्या बढ़ी तो रिसाली और चरोदा में भी इसकी अनुमति ली गई। ग्रामीण क्षेत्रों में शव जलाए जाने लगे।
  • दैनिक भास्कर की टीम अप्रैल महीने से लगातार मुक्तिधाम में पहुंचने वाले शवों की आंकड़े जुटाते रही है। हर दिन के आंकड़े प्रकाशित भी किए गए। इसमें हमने सामान्य और कोविड प्रोटोकॉल के तहत मरने वालों की जानकारी जुटाई। इसके हिसाब से इन 50 दिनों में 2739 मौतों के रिकॉर्ड सामने आए।

डेथ ऑडिट जारी, आंकड़े समायोजित हो रहे
जिले में डेथ ऑडिट जारी है। मौत के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उन्हें समायोजित किए जा रहा है। आंकड़े स्पष्ट है, कुछ मामलों में मौत की जानकारी बाद में पता चल रही है, इस वजह से आंकड़े अपडेट नहीं हो पा रहे। जल्द ही आंकड़े अपडेट हो जाएंगे।
-डॉ. गंभीर सिंह, सीएमएचओ दुर्ग

 

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