Home / धर्म / मेनका की वजह से नहीं बल्कि इस वजह से हुयी थी तपस्वी विश्वामित्र की तपस्या भंग ,जानके सोचने पर मजबूर हो जायेंगे आप

मेनका की वजह से नहीं बल्कि इस वजह से हुयी थी तपस्वी विश्वामित्र की तपस्या भंग ,जानके सोचने पर मजबूर हो जायेंगे आप

 मेनका का नाम एक चरित्रहीन स्त्री के रूप में लिया जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की मेनका ने एक तपस्वी ऋषि की तपस्या भंग कर दी तो बाकी पुरुष कैसे अपने आप पर वश रख सकते है लेकिन क्या ये बात सच है ये पुरुष प्रधान समाज में अपनी पुरुष सत्ता बनाये रखने का षड्यंत्र।
आज हम आपको इसकी पूरी स्टोरी बताते है विश्वामित्र जो अनेक वर्षो से तपस्या में लीं था भक्ति में डूबा था अपनी भक्ति से स्वयं के शरीर का मोह छोड़कर जंगल में  निवास कर रहा था  जो स्वयं को संसारिक मोह माया से परे समझता था।
 क्या उसकी तपस्या सच में मेनका ने भंग किया या उसकी वासना ने अगर सोचा जाए तो विश्वामित्र का उनका स्वयं के तन -मन और वासना पर नियंत्रण नहीं रहा होगा जिसके कारन एक स्त्री के स्पर्श से अपने तन -मन और वासना पर नियंत्रण में नहीं रख पाए और ऋषि व ज्ञानी स्वभाव को छोड़कर वासना से लिप्त मानव व पुरुष की भांति व्यवहार करने लगे विश्वामित्र ने अपनी सवयं की वासना पर नियंत्रण न करने के कारन स्त्री स्पर्श को स्वीकार कर लिए और स्वयं से अपनी तपस्या भंग कर लिया।
 लेकिन अपना सम्मान बनाये रखने के लिए मेनका पर सारा इल्जाम लगा दिया ताकि उनके सम्मान को कोई चोट ना पहुंचा सके और समाज पुरुष प्रधान होने के कारण व अपनी पुरुष प्रधान सत्ता बनाए व बचाए रखने के लिए मेनका को ही दोषी बताकर समाज के सामने पूरी स्त्रीजाति को अपमानित करके प्रस्तुत कर दिया राम जो मर्यदापुर्षोत्तम के नाम से जाने जाते है उनको भी एक स्त्री ने पाने की चेष्टा की लेकिन भगवान राम का अपने मन पर पूरा नियंत्रण रहा जिसके कारन स्त्री के वश में नहीं हुए और ना ही राम ने उस स्त्री को अपमानित भी नहीं किया।
वही विश्वामित्र जिन्हे समाज तपस्वी कहता है हो गयी है और अस्चर्य की बात ये रही की उसके लिए समाज ने विश्वामित्र को दोषी न मानकर मेनका का को दोषी बना दिया और समाज के साथ समस्त स्त्रीजाति ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया इंद्र ने विश्वामित्र की तपस्या भंग करने की साजिश रची थी और विश्वामित्र ने वासना के वश में होकर अपनी तपस्या भंग कर ली।
अर्थात् एक पुरुष द्वारा एक पुरुष की तपस्या भंग करने हेतु स्त्री को हथियार की भांति उपयोग किया गया और सारा दोष मेनका पर अर्थात् स्त्रीजाति पर लगा दिया गया एक पुरुष जो अपने वासना में बहकर स्त्री के अधीन हो गया और अपनी तपस्या त्याग दिया लेकिन पुरुष प्रधान समाज ने न इंद्र को दोषी ठहराया न विश्वामित्र को
 लेकिन स्त्री का अपमान करने के लिए ये जरूरी कहा गया की स्त्री अपने त्रियाचरित्र से कुछ भी कर सकती है समाज का ये कैसा दोहरा रूप है जिसमें उन दोनों पुरुषों को अपमान से बचाने के लिए मेनका का अपमान करके समस्त स्त्रीजाति को अपमानित कर दिया।
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