मुख्यमंत्री ने कहा:सड़क सुरक्षा विषय छठी से 8वीं तक अनिवार्य रूप से पढ़ाने पर विचार कर रही सरकार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में आए आंकड़ों पर मंथन के दौरान कहा कि सड़क हादसों को रोकने में लोग मददगार बनें और गति सीमा पर विशेष ध्यान दें। (प्रतीकात्मक फोटो) - Dainik Bhaskar

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में आए आंकड़ों पर मंथन के दौरान कहा कि सड़क हादसों को रोकने में लोग मददगार बनें और गति सीमा पर विशेष ध्यान दें। (प्रतीकात्मक फोटो)

  • राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक, दुर्घटना के आंकड़े देखने के बाद मुख्यमंत्री ने जताई चिंता

सड़क दुर्घटना में 18 से 35 वर्ष के बीच के युवा जान गवां रहे हैं। यह चिंतनीय है। हमलोगों को इस पर ध्यान केंद्रित करना है और इसका समाधान ढूंढना है। ओवर स्पीड पर विराम आवश्यक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में आए आंकड़ों पर मंथन के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों को रोकने में लोग मददगार बनें और गति सीमा पर विशेष ध्यान दें।

सरकार सड़क सुरक्षा विषय को छठी, सातवीं और आठवीं के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने पर विचार कर रही है। साथ ही, मध्य विद्यालयों, उच्च विद्यालयों एवं उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों में एक सड़क सुरक्षा नोडल शिक्षक की प्रतिनियुक्ति करने की योजना है।

92 प्रतिशत दुर्घटना सिर्फ ओवर स्पीड की वजह से

राज्य सड़क सुरक्षा परिषद द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में सड़क दुर्घटना में प्रतिदिन औसतन 10 लोग जान गंवाते हैं। वर्ष 2020 में कुल 4377 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 3303 लोग घायल हुए और 3044 लोगों ने जान गंवाई है। 92% दुर्घटना सिर्फ ओवर स्पीड की वजह से हुईं।

2% दुर्घटनाएं नशे में, गलत दिशा में वाहन चलाने से 4%, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग करने और लाल बत्ती क्रॉस करने पर 1% लोग हादसे के शिकार हुए हैं। वर्ष 2020 में सड़क दुर्घटना के मामले में खूंटी पहले, रांची दूसरे और गुमला तीसरे स्थान पर है, जबकि गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे कम हादसे हुए।

सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए बनेगी वॉलेन्टियर्स की टीम

राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद पहुंचाने हेतु नेक नागरिक से संबंधित नीति काफी कारगर होगी। इसे लागू कराने की नियमावली मंत्रिपरिषद से स्वीकृति हो चुकी है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति की सहायता के लिए नेक नागरिक वॉलेंटियर्स टीम बनानी है। नेक नागरिक स्वयं सहायता समूह बनाकर प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करायी जाएगी।

दोपहिया वाहन से हुए सर्वाधिक 39% हादसे

वर्ष 2020 में दो पहिया वाहन के 39 प्रतिशत मामले सामने आए हैं। कार, जीप, वैन और टैक्सी से 18% और ट्रक से 16 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2020 में राष्ट्रीय राजमार्ग में 39 प्रतिशत, राज्य उच्च पथ पर 18% दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे अधिक 63% हादसे सीधी सड़कों पर हुए हैं।

हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने से बचती है जान

राज्य सड़क सुरक्षा परिषद द्वारा किये गए विश्लेषण के अनुसार सुरक्षा मानकों पर ध्यान दिया जाए तो हेलमेट पहनने के बाद दुर्घटना में जान गंवाने की संभावना 14 प्रतिशत ही रहती है। जबकि कार चलाते वक्त सीट बेल्ट लगाने से 22 प्रतिशत मामलों में ही जान जाने की संभावना होती है।

हर जिले में एक ट्रॉमा सेंटर बनाने पर विचार

झारखंड के सभी जिलों में एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर सरकार विचार कर रही है। वर्तमान में रिम्स रांची में लेवल-1 का, हजारीबाग, गढ़वा के नगर उंटारी, पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा और एसडीएच बरही में लेवल-3 के ट्रॉमा सेंटर हैं, जबकि कोडरमा, लोहरदगा के कुड़ू और घाटशिला में लेबल-3 के ट्रॉमा सेंटर निर्माणाधीन हैं।

 

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