मुख्यमंत्री के बजट से आस:1200 बच्चों को दुर्लभ बीमारियां, महंगे इलाज ने और बढ़ाई मुश्किल; दवाइयों के बिना काल का ग्रास बन रहे नौनिहाल

पोम्पे डिजीज व स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी जैसी बीमारियों का जीवन भर चलता है इलाज, लागत करोड़ों में। - Dainik Bhaskar

पोम्पे डिजीज व स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी जैसी बीमारियों का जीवन भर चलता है इलाज, लागत करोड़ों में।

  • दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए पॉलिसी बनने का इंतजार, बजट मिले तो जांच व दवा से जिन्दगी बचे

जेके लोन अस्पताल के डॉक्टरों ने रेयर डिजीज यूनिट में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित 1200 से ज्यादा बच्चों को स्क्रीनिंग के जरिये ढूंढ़ लिया है। किसी तरह की पॉलिसी नहीं बनने तथा बजट का प्रावधान नहीं होने से इलाज के लिए दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर है। पोम्पे डिजीज और स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी जैसी गंभीर बीमारी में जीवन भर इलाज चलेगा और करोड़ों रुपए खर्च होते है।

दवा महंगी होने से बीच में ही दम तोड़ देते है। जयपुर समेत प्रदेश भर में दुर्लभ बीमारियों के ऐसे बच्चे भी है, जो महंगी जांच व दवा के कारण परिजन पीड़ित बच्चों का उपचार कराते-कराते घर, खेत तक बिक जाते है। यहां तक की कुछ बच्चों के परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने से इलाज नहीं करा पाए और मौत के मुंह में चले गए। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि दुनिया भर में दुर्लभ बीमारियों के केसेज कम होने के कारण दवाओं और इलाज पर शोध जारी है। जिन्दगी-मौत से लड़ रहे दुर्लभ बच्चों को अब मुख्यमंत्री से बजट की आस है।
^दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए पॉलिसी बने और बजट का प्रावधान होने से इलाज करना आसान होगा। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने तथा महंगा इलाज होने पर बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। स्क्रीनिंग और दवाओं के लिए सरकार से बजट मिलना चाहिए।

– डॉ.अशोक गुप्ता, प्रभारी (रेयर डिजीज यूनिट), जेके लोन जयपुर

बच्चे की जेनेटिक, मां की प्रेग्नेंसी के दौरान जांच होनी चाहिए
डॉ. प्रियांशु माथुर व डॉ.कमलेश अग्रवाल के अनुसार दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चे की तो जिनेटिक जांच और आगे से पता कर रोकने के लिए अगली प्रेग्नेंसी में 20 सप्ताह से पहले प्री-नेटल डायग्नोसिस की जांच होनी चाहिए। जिससे आने वाले समय में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को रोका जा सकें।
ये हैं दुर्लभ बीमारियां

ट्रीचर कोलीन सिन्ड्रोम, जार्को लेविन सिन्ड्रोम, ट्यूशन मस्कुलर डिस्ट्राफी, स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी, गाउचर डिजीज, जुवेनाइल डर्मेटोमायोसिटिज, पाम्पे डिजीज, हंटर सिन्ड्रोम, ओरोफेशियिल डिजिटल और वर्नर सिन्ड्रोम, होल्ट ओराम सिन्ड्रोम, डाइजार्ज एनामेली,विलियम सिन्ड्रोम, हाइपोहाइरोटिक एक्टोडर्मल डिसप्लेशिया, मेटाफेजियल कंड्रोडिसप्लेशिया, एपर्ट सिन्ड्रोम, टाउन ब्राक सिन्ड्रोम, एकेनड्रोप्लेशिया, साइक्लोपिया, सीरेनोमेलिया, एमपीएस-1, 2, 3, 9, फीटल वेलोप्रेट सिन्ड्रोम, डाइफेलिया, पियरी रोबिन सिन्ड्रोम, कोर्नेलिया डीलेंगे सिन्ड्रोम, एनासिफेली, क्लीडोक्रेनियल डिसप्लेशिया, प्रूने बेली सिन्ड्रोम, कोलोडियोन बेबी, क्रूजन सिन्ड्रोम, एडीशन डिजीज, बायोटीनिज डेफिशिएन्सी, ट्रीचर कोलिन्स सिन्ड्रोम, लैगरहैंस सेल हिस्टियोसाइटिस, एमरी डरफ्यूस मस्कुलर डिस्ट्राफी-2, ऑटोसोमल डोमिनिएंट, मारफेन सिन्ड्रोम।

 

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