मिनी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन कैप्टन पर भड़के:5000 बेरोजगार युवकों को दिए जा रहे नए परमिटों पर सवाल खड़े किए, बड़ी मांग- पुराने धारकों के बारे में पहले सोचा जाना चाहिए

एसोसिएशन के सदस्यों ने पहले से चल रहे करीब सात हजार पुराने परमिटोंं को रद्द करके नए परमिट देने की पंजाब सरकार की नीति पर विरोध जताया है।    - Dainik Bhaskar

एसोसिएशन के सदस्यों ने पहले से चल रहे करीब सात हजार पुराने परमिटोंं को रद्द करके नए परमिट देने की पंजाब सरकार की नीति पर विरोध जताया है।

मिनी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन पंजाब ने पंजाब सरकार द्वारा पांच हजार बेरोजगार युवकों को दिए जा रहे नए मिनी बस ऑपरेटर के परमिटों पर सवाल खड़ कर दिए हैं। एसोसिएशन के सदस्यों ने पहले से चल रहे करीब सात हजार पुराने परमिटोंं को रद्द करके नए परमिट देने की पंजाब सरकार की नीति पर विरोध जताया है।

पंजाब मिनी बस ऑपरेटर्स ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मांग की है कि मिनी बस के लिए पांच हजार नए परमिट जारी करने के संबंध में पॉलिसी तैयार करने से पहले पुराने परमिट धारकों के बारे में सोचें। मिनी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान जतिंदर आगरा और अन्य नेताओं ने कहा कि हाईकोर्ट ने हमारे जो 6700 परमिट रद्द किए हैं, उसमें हमारा कोई कुसूर नहीं।

उस समय की बादल सरकार की ट्रांस्पोर्ट स्कीम के तहत जो परमिट दिए गए थे उसमें सरकार को 20 प्रतिशत हिस्सा डालना जबकि बाकी का 80 प्रतिशत हमें डालना था। लेकिन सरकार ने अपना हिस्सा नहीं डाला जिस कारण हाईकोर्ट ने उन परमिटों को 2012 में रद्द कर दिया। परमिट रद्द होने के बावजूद हम पंजाब के गांवों के लोगों को मिनी बसाें से ही शहर तक लाते रहे।

लेकिन कैप्टन सरकार नई ट्रांस्पोर्ट स्कीम के तहत जो नए परमिट दे रही है, उसमें हमें इग्नोर कर दिया गया है। वे बोले इससे तो हम अधेड़ उम्र में बेरोजगार हो जाएंगे।हमारे साथ सीधे तौर पर दो से ढाई लाख लोग उजड़ जाएंगे। सरकार ये समझे कि जारी किए जा रहे नए परमिट तर्कसंगत नहीं हैं। एक ओर हमें बेरोजगार करके दूसरों को रोजगार देना सही नहीं है। सरकार को चाहिए कि हमारा कहीं एडजस्टमेंट करके जरूरत अनुसार नए परमिट दें।

नए परमिट भी रद्द हो गए तो क्या?

आगरा ने आगे कहा कि नए परमिटों के जारी करने को लेकर हम इसके लिए सरकार को कई मेमोरेंडम भी भेजे लेकिन वे भी बेनतीजा ही रहे। मोगा बस एसोसिएशन ने भी नए परमिटों को हाईकोर्ट में चैलेंज किया है जिसकी सुनवाई तीन से चार बार पिछले साल हुई है लेकिन सरकार के वकील ने कोई सही स्टेटमेंट नहीं दी। कहा है कि हम ऐसे कोई परमिट नहीं दे रहे जबकि सच्चाई ये है कि MV एक्ट के तहत बिना प्रोसीजर अडॉप्ट किए ही नए परमिट दिए जा रहे हैं। अब फाइनल जवाब दायर करने के लिए सरकार को हाईकोर्ट ने और समय दिया है और मामले की सुनवाई आगामी 6 मई को हाेगी। हमारा ये भी कहना है कि हाईकोर्ट ने अगर इन नए परमिटों को भी रद्द कर दिया ताे वे लोग भी बेरोजगार हो जाएंगे। ऐसे में सरकार को कोई उचित हल निकालना चाहिए।

 

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