महामारी के कारण दुनिया भर में बड़े स्तर पर हुआ शिक्षा का नुकसान : यूनिसेफ

न्यूयॉर्क, 25 जनवरी अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस के मौके पर मंगलवार को यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 61.6 करोड़ से अधिक छात्र पूर्ण या आंशिक स्कूल बंद होने से प्रभावित हैं।

कोविड-19 महामारी को दुनिया भर में फैले करीब दो साल होने को हैं, इस बीच रिपोर्ट में यूनिसेफ ने बच्चों के सीखने पर महामारी के प्रभाव पर नवीनतम उपलब्ध डेटा साझा किया है।

यूनिसेफ के शिक्षा प्रमुख रॉबर्ट जेनकिंस ने एक बयान में कहा, मार्च में, हम वैश्विक शिक्षा के लिए दो साल के कोविड-19 से संबंधित व्यवधानों को चिह्न्ति करेंगे। हम बच्चों की स्कूली शिक्षा के नुकसान के लगभग दुर्गम पैमाने को देख रहे हैं।

बच्चों ने बुनियादी संख्यात्मकता और साक्षरता कौशल खो दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, स्कूल बंद होने से सीखने के नुकसान ने 10 साल के 70 प्रतिशत बच्चों को एक साधारण पाठ को पढ़ने या समझने में असमर्थ बना दिया है, जो कि 53 प्रतिशत के पूर्व-महामारी के स्तर से ऊपर है।

अगर इथियोपिया से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे व्यवधान के चलते सामान्य से केवल 30 से 40 फीसदी ही गणित सीख पाए थे।

ब्राजील के कई राज्यों में, ग्रेड 2 में चार में से लगभग तीन बच्चे पढ़ने में गलती कर रहे हैं, जो कि महामारी से पहले के 2 बच्चों में से 1 से अधिक स्तर है।

दक्षिण अफ्रीका में भी स्कूली बच्चों के बीच शिक्षा में रुकावट साफ तौर पर देखी गई है।

इसके साथ ही भारत में, 14-18 वर्ष के बीच के 80 प्रतिशत किशोरों ने स्कूलों के बंद होने के कारण सही प्रकार से नहीं सीखने जैसी दिक्कतों का सामना किया है।

यूके, यूएस और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में भी सीखने में कमी देखी गई है।

इसके अलावा, स्कूल बंद होने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है, पोषण के नियमित स्रोत तक उनकी पहुंच कम हो गई है और उनके दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है।

साक्ष्यों से पता चलता है कि कोविड-19 ने बच्चों और युवाओं में चिंता और अवसाद की उच्च दर पैदा की है, कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि लड़कियों, किशोरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों को इन समस्याओं का अनुभव होने की सबसे अधिक संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, दुनिया भर में 37 करोड़ से अधिक बच्चे स्कूल बंद होने के दौरान स्कूली भोजन से चूक गए, कुछ बच्चों के लिए भोजन और दैनिक पोषण का एकमात्र विश्वसनीय स्रोत खो गया।

जेनकिंस ने कहा कि सीखने में रुकावटें खत्म होनी चाहिए, लेकिन स्कूलों को फिर से खोलना काफी नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा, छात्रों को खोई हुई शिक्षा को पुनप्र्राप्त करने के लिए गहन समर्थन की आवश्यकता है। स्कूलों को बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, सामाजिक विकास और पोषण के पुनर्निर्माण के लिए सीखने के स्थानों से भी आगे जाना चाहिए।

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