भोपाल की निर्भया:कोलार पुलिस का ‘परमानेंट’ गवाह है चश्मदीद कमल बैरागी

एसआईटी ने 21 फरवरी को घटनास्थल पर पहुंचकर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। दोपहर 11.30 पर एसआईटी और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची। - Dainik Bhaskar

एसआईटी ने 21 फरवरी को घटनास्थल पर पहुंचकर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। दोपहर 11.30 पर एसआईटी और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची।

  • सवाल ये- कहीं निर्दोष को तो नहीं पकड़ लाई पुलिस
  • पहले भी कई मामलों में गवाही दे चुका है कमल बैरागी

कोलार में 24 साल की निक्की (परिवर्तित नाम) के साथ हुई वारदात के मामले में पुलिस एक चश्मदीद को लेकर आई है। ये चश्मदीद कमल बैरागी पहले भी कोलार थाने के कई मामलों में गवाही दे चुका है। हैरानी की बात ये है कि पीड़िता के साथ हो रही हैवानियत से लेकर उसे गड्‌ढे में धक्का देने तक का पूरा घटनाक्रम उसने अंधेरे में देख लिया था।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 16 जनवरी की इस घटना की सूचना उसने 1 फरवरी को पुलिस को दी थी। इसी को आधार मानकर पुलिस ने 8 फरवरी को एक आरोपी अनिल बोरकर उर्फ नाना को गिरफ्तार किया था। बैरागी के मुताबिक उसने जेके अस्पताल की ओर जाते वक्त घटना देखी थी। फिर 9 फरवरी को महाबली कॉलोनी में चाय की होटल में आरोपी को भी बैठा देखा। उसी दिन पुलिस को बताया और वह आरोपी को पकड़कर ले गई। कमल बैरागी कई साल पहले कोलार थाने में ही पुलिस का प्राइवेट ड्राइवर रह चुका है।

घटना के 37 दिन बाद रविवार को हुआ सीन का रीक्रिएशन

एसआईटी ने 21 फरवरी को घटनास्थल पर पहुंचकर क्राइम सीन रीक्रिएट किया। दोपहर 11.30 पर एसआईटी और एफएसएल की टीम घटनास्थल पर पहुंची। उस गड्‌ढे की गहराई भी नापी, जिसमें आरोपी के धक्के से पीड़िता जा गिरी थी। ये गड्‌ढा 7.1 फीट गहरा था।

सड़क से और सीसीटीवी कैमरे से घटना वाली जगह की नपाई भी की। इस दौरान, गवाह, आरोपी या पीड़िता के परिवार से कोई भी मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक घटना के वक्त के सीसीटीवी फुटेज में पीड़िता और आरोपी सिर्फ पुलिया के नीचे गिरते नजर आ रहे हैं। इससे पहले शनिवार को डीआईजी इरशाद वली अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना करने पहुंचे थे।

घर से स्कूटी पर कोलार थाने पुलिस के पीछे-पीछे गया था अनिल

7 फरवरी की सुबह 11.30 बजे कोलार थाना से दो सिपाही आए थे। नाना (अनिल बोरकर) के बारे में पूछा था। उस समय वह घर पर सो रहा था। पुलिस ने कहा- अपनी गाड़ी लेकर थाने आ जा। पुलिस अपनी गाड़ी में बिठाकर उसे नहीं ले गई। वह खुद ही स्कूटी से थाने गया। अगले दो दिन तक पुलिस ने उसके बारे में कुछ नहीं बताया। मोहल्ले के एक लड़के को थाने पता करने भेजा तो, मालूम चला कि पुलिस ने अनिल को बैठा लिया है।

-जैसा अनिल बोरकर की मां ने बताया

3 सवाल:

1. आरोपी की पहचान के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटैज क्यों जारी नहीं किया?

2. पुलिस, गवाह और आरोपी की मां के बयान में गिरफ्तारी की तारीख और जगह अलग क्यों

3. हरियाणा के लड़के पर शक था तो उसकी शिनाख्त पीड़िता से क्यों नहीं करवाई?

सीधी बात: भूपिंदर सिंह, सीएसपी, एसआईटी प्रमुख

गवाह को आरोपी का चेहरा याद था

सवाल: कमल बैरागी पहले भी कोलार पुलिस का गवाह रहा है?
जवाब: नहीं।

आरोपी अनिल को कहां से पकड़ा?

आरोपी को मंदाकिनी से गिरफ्तार किया था।

गवाह ने पीड़िता को देखा तो बचाया क्यों नहीं?

गवाह ने सोचा कि कपल होगा, जानबूझकर नीचे गए होंगे इसलिए वह मदद के लिए नहीं गया।

गवाह ने पुलिस को उसी दिन सूचना क्यों नहीं दी, 1 फरवरी को क्यों दी?

गवाह को बाद में पता चला कि 16 जनवरी की घटना छेड़छाड़ की थी, उसे आरोपी का चेहरा याद था। जब चला कि वो गिरफ्तार नहीं हुआ है तो उसने पुलिस को बताया कि आरोपी मंदाकिनी में दिखता है।

आरोपी पीछे से आया बावजूद गवाह ने उसका चेहरा कैसे देख लिया?

गवाह सड़क की दूसरी तरफ टॉयलेट करने के बाद सिगरेट पी रहा था। घूमा तो गाड़ी की लाइट में उसका चेहरा देखा था।

एसआईटी में छुट्‌टी पर गए एसआई चंदेल को क्यों शामिल किया?

चंदेल लंबे अवकाश पर नहीं है, दो दिन में आ जाएंगे।

 

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