भारत-चीन सीमा पर तनाव घटाने के लिए आज 7वें दौर की सैन्य कमांडर स्तर वार्ता, सैनिक जमावड़ा कम कराने के अपने रुख पर भारत कायम

नई दिल्ली: भारत और चीन सीमा पर चल रहें तनाव के बीच सोमवार को दोनों देशों एक बार फिर सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत की मेज पर आमने-सामने होंगे. बीते पांच महीनों से जारी तनातनी के बीच दोनों मुल्कों के सैन्य कमांडरों के बीच यह सातवें दौर की बातचीत होगी. मोल्डो में होने वाली इस वार्ता में सेना के साथ ही एक बार फिर राजनयिक प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे.

 

सैन्य सूत्रों के मुताबिक चुशूल (मोल्डो) में सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत सुबह करीब 10 बजे शुरू होगी. भारत की तरफ से इस बार सैन्य वार्ता की अगुवाई 14 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे. जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन और विदेश मंत्रालय में चीन समेत पूर्वी एशिया मामलों के प्रभारी संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद होंगे.

 

सूत्रों के अनुसार बैठक में एक बार फिर भारत का जोर इसी बात पर होगा कि सीमा पर सैन्य आमने-सामने की स्थिति कम की जाए. साथ ही सैनिक जमावड़ा घटाकर अप्रैल 2020 के स्तर तक बहाल किया जाए. महत्वपूर्ण है कि गत 21 सितंबर को दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में इस बात को लेकर रजामंदी बनी थी कि अब लद्दाख के इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की संख्या बढ़ाई नहीं जाएगी.

 

हालांकि अभी भी दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सेना की तैयारी किसी भी हालात से निपटने के लिहाज से की गई है. इसके लिए सैन्य साजो-सामान, युद्ध सामग्री के साथ-साथ लद्दाख इलाके में पड़ने वाली भीषण सर्दी में सैनिक ज़रूरतों की भी आपूर्ति मुकम्मल की जा रही है.

 

इस बीच माना जा रहा है कि 7वें दौर की बातचीत से भी फिलहाल किसी फौरन समाधान या बड़े ऐलान की उम्मीद धुंधली है. गौरतलब है कि बीते पांच महीनों के दौरान बढ़े तनाव के चलते लद्दाख इलाके में चीन और भारत के सैनिक कई मोर्चों पर आमने-समाने हैं. इस दौरान भारत ने 29-31 अगस्त के बीच रिचान ला, रिजांग इलाके की पहाड़ी चोटियों पर अपने सैनिकों की तैनाती कर रणनीतिक लिहाज से एक अहम पैंतरा चला. इससे बौखलाए चीन से दो बार हवाई गोलीबारी की घटनाओं को तो अंजाम दिया लेकिन भारतीय सैनिकों को नीचे उतारने में नाकामयाब रहा.

 

इस बीच भारत और चीन के बीच जहां सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत हो चुकी हैं वहीं बीते दिनों सीमा मामलों बने संवाद और समन्वय तंत्र यानी डबल्यूएमसीसी की बैठक भी हो चुकी है. यह बात अलग है कि मई से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच रक्षा मंत्री-विदेश मंत्री स्तर की मुलाकातों से लेकर कई दौर की कूटनीतिक व सैन्य वार्ताओं के बावजूद हालात सुलझाने का रास्ता नहीं बन सका है. ऐसे में भारत के सैनिक लंबे वक्त और कठिन मौसम के बीच मजबूत मोर्चाबंदी की तैयारी भी कर चुके हैं.

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