भागलपुर-बेगूसराय में छठ घाटों पर डूबने से 6 युवकों की मौत; न पुलिस की व्यवस्था दिखी, न कहीं गोताखोर थे

 

भागलपुर के बिहपुर में डूबने वाले युवकों की तलाश में जुटे ग्रामीण।

  • बेगूसराय में छठ घाट पर दो अलग-अलग घटनाओं में दो युवकों के डूबने से मौत हुई है
  • भागलपुर में 4 लोगों की डूबने से हुई मौत, प्रशासन की लापरवाही पर लोगों में आक्रोश

बिहार में आज छठ घाटों पर डूबने से छह युवकों की मौत हो गई। इनमें 4 मौतें भागलपुर में तो 2 बेगूसराय में हुई हैं। भागलपुर के बिहपुर में गंगा स्नान के दौरान डूबे तीन साथियों में से एक की लाश SDRF ने बरामद कर ली है। मृतक का नाम प्रवीण कुमार है और वह साहेबगंज-दिलदारपुर का निवासी था। उसके अन्य दो साथियों सोमेश और भवेश की तलाश शाम तक भी की जा रही थी। भागलपुर में इसी तरह की एक और घटना हुई है जिसमें 18 वर्षीय एक युवक की मौत हो गई। वहीं बेगूसराय में भी दो अलग-अलग छठ घाटों पर डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। इनमें से एक घटना मंसूरचक और दूसरी डंडारी थाना क्षेत्र की है। छठ में हर साल इस तरह की घटनाएं होती हैं, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर कोई इंतजाम न किये जाने के आरोप लगाकर सभी मृतकों के परिजनों ने आक्रोश व्यक्त किया है।

भागलपुर में डूबे सोमेश, भवेश और प्रवीण कुमार।

भागलपुर में डूबे सोमेश, भवेश और प्रवीण कुमार।

बिहपुर में तीन दोस्त डूबे, एक की लाश मिली

बिहपुर थाना क्षेत्र में 3 दोस्तों की डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर में 8 मित्र गंगा स्नान करने गए थे। नहाने के क्रम में एक युवक सोमेश डूबने लगा, जिसको बचाने की कोशिश में उसके दो अन्य मित्र भवेश और प्रवीण भी डूबने लगे और तीनों पानी के बहाव में बह गए। प्रवीण कुमार की लाश एसडीआरएफ की टीम ने बरामद कर ली है। सोमेश और भवेश की लाश अभी बरामद नहीं हुई है।

रंगड़ा में भी छाया मातम

रंगड़ा थाना क्षेत्र के रंगड़ा गांव स्थित कलबलिया घाट पर छठ की खुशी के बीच पूरे गांव में उस समय मातम छा गया, जब गांव के मुन्ना मंडल के 18 वर्षीय पुत्र मोहन मंडल की डूबने से मौत हो गई। शनिवार को छठ का अर्घ्य देकर सभी घर चले गए। अर्घ्य देने के बाद मोहन अपने साथियों के साथ वहीं स्नान करने लगा। नहाने के क्रम में वह गहरे पानी में समा गया, जिससे वह डूबने लगा। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग उसे बचाने के लिए दौड़े, लेकिन तब तक वह डूब गया। स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद लाश को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद घटना की सूचना पर इलाके की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची।

पुलिस प्रशासन को ठहरा रहे हैं दोषी

घटना के संबंध में रंगड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन की लापरवाही से मौत हुई है। जिला प्रशासन लगातार घाट पर व्यवस्थाओं को लेकर तारीफों के पुल बांधता रहा, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं था। यहां तक कि जिला प्रशासन की तरफ से घाट पर न पुलिस बल तैनात थे और ना ही एक भी गोताखोर। ग्रामीणों ने 3 घंटे की मशक्कत के बाद खुद लाश को पानी से बाहर निकाला।

 

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