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बेहतर और प्रभावी खिलाड़ी बनने फिटनेस पर काम किया : विराट

नई दिल्ली: टीम इंडिया के कप्तान कप्तान विराट कोहली ने कहा कि साल 2012 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे से वापसी के बाद एक बेहतर और प्रभावी खिलाड़ी बनने के लिए उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया है। विराट कहा, ‘ऐसा भी समय था जब मैं बल्लेबाजी के लिए उतरता था तो विरोधी खेमे में मेरे प्रति कोई भय या सम्मान नहीं होता था।’ मैं सिर्फ कोई अन्य खिलाड़ी नहीं बनना चाहता था।’ उन्होंने कहा, ‘विश्व कप के दौरान प्रत्येक मैच में मेरी ऊर्जा का स्तर 120 प्रतिशत रहता था। मैं इतनी तेजी से उबरा कि प्रत्येक मैच में मैंने औसतन 15 किमी की दूरी तय की। मैं वापस आता और उबरने का उपचार करता और फिर दूसरे शहर में जाता और जल्द ही फिर से ट्रेनिंग के लिए तैयार रहता।’
कोहली ने कहा, ‘इतनी ऊर्जा होती थी कि मैं जिम सत्र में हिस्सा ले सका और 35 दिन के थोड़े से समय में 10 मैच खेल सका। मैंने प्रत्येक मैच इसी ऊर्जा से खेला, मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं हुआ था। मेरे शरीर में कोई खिंचाव नहीं था।’ अपने आदर्श सचिन तेंडुलकर के बतौर क्रिकेटर कौशल को वह सर्वश्रेष्ठ आंकते हैं, जबकि खुद को वह कड़ी मेहनत का परिणाम मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि जब मैं आया था तो मैं इतना कौशल रखने वाला खिलाड़ी नहीं था, लेकिन मेरी एक चीज निरंतर रही कि मैं खुद पर काम करता रहा। अगर भारतीय टीम को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बनना है तो उसे एक निश्चित तरीके से खेलने की जरूरत थी।’ कोहली ने कहा, ‘जब हम 2012 में ऑस्ट्रेलिया से वापस आए थे तो मैंने हममें और ऑस्ट्रेलिया के बीच काफी अंतर देखा। मैंने महसूस किया कि अगर हम अपने खेलने, ट्रेनिंग करने और खाने के तरीके में बदलाव नहीं करते हैं तो हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों से नहीं भिड़ सकते।’ उन्होंने कहा, ‘अगर आप सर्वश्रेष्ठ नहीं होना चाहते तो प्रतिस्पर्धा करने का कोई मतलब नहीं।’

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