बेरोजगार संदेश:12 भर्तियों में अटका 25 लाख युवाओं का भविष्य, पति की मौत, जमीन गिरवी, पर रिजल्ट का इंतजार नहीं हुआ खत्म

रिजल्ट के इंतजार में पति की मौत, नियुक्ति भी अटकी। - Dainik Bhaskar

रिजल्ट के इंतजार में पति की मौत, नियुक्ति भी अटकी।

  • सरकारें 44 साल से हर 15 दिन में रोजगार की सूचनाओं का अखबार निकाल रही है
  • लेकिन सारे रोजगार तो ‘अटके’ हुए हैं, इसलिए आज बेरोजगार का संदेश

राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ का जयपुर के बाइस गोदाम पुलिया के पास महापड़ाव आठवें दिन भी जारी रहा। सोमवार को सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेन यादव के नेतृत्व में महासंघ के प्रतिनिधिमंडल की मंत्री सुभाष गर्ग, आईएएस हेमंत गेरा, सिद्धार्थ महाजन से 2 घंटे चली बात हुई।

यादव ने बताया कि हम मांगों पर लिखित आश्वासन चाहते थे। अफसर मांगें मानने को तैयार थे, लेकिन लिखित आश्वासन नहीं दे रहे थे। इसलिए बेरोजगारों का महापड़ाव जारी रहेगा..। एक पहलू यह भी है कि प्रदेश में अभी 12 बड़ी भर्तियां अटकने से 25 लाख युवाओं का भविष्य अधर में है।

छोटे-छोटे कारणों से बड़ी-बड़ी भर्तियां फंसीं

आरएएस भर्ती, 2018 पद: 980, कोर्ट में मामला कारण: विभागीय मंत्रालयिक कर्मचारी व भूतपूर्व सैनिक कोटे में अपात्र अभ्यर्थी बुलाए। तीन गुना की बजाय डेढ़ गुणा अभ्यर्थी बुलाए।

पुलिस कांस्टेबल
पद: 5438, कोर्ट में मामला
कारण : जिलास्तर की जगह राज्य स्तर पर मेरिट बना दी।
स्टेनोग्राफर: पद 1085
कारण: 2018 की भर्ती, टाइप टेस्ट, सर्वर डाउन का विवाद।

प्री-प्राइमरी टीचर, 2018
पद: 1310, कोर्ट में मामला
कारण: दूसरे राज्यों से एनटीटी की डिग्री पर विवाद।
पटवारी भर्ती: कोर्ट में
कारण: ओबीसी आरक्षण व विवादित आंसर-की मामला।

एलडीसी भर्ती, 2018
पद : 11322, कोर्ट में
कारण: मेरिट अनुसार संभाग व गृह जिले का आवंटन नहीं। हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो कोर्ट को भर्ती में दखल देना पड़ा।

पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती
कुल पद: 900, कोर्ट में मामला
कारण: अंक और कटऑफ जारी किए बिना इंटरव्यू के लिए बुलाया।
पशुधन सहायक भर्ती: कोर्ट में
कारण: प्रश्न व आंसर-की में गड़बड़ी। हाईकोर्ट ने रोक लगाई।

हैडमास्टर भर्ती
कुल पद: 1200, कोर्ट में मामला
कारण: भूतपूर्व सैनिकों को आरक्षण का लाभ न देने का मामला विवादित।

पति की मौत, जमीन गिरवी, पर रिजल्ट का इंतजार नहीं हुआ खत्म

पांच लाख कर्ज लिया अब खेत बिकेगा…!
हरिराम कहते हैं- पिता ने पांच लाख रुपए कर्ज लेकर कई नौकरियाें के लिए कोचिंग कराई। सोचा था कि मैं घर में बड़ा हूं। नौकरी लग जाएगी तो छोटों को भी रास्ता दे सकूंगा। लेकिन सब खत्म हो गया। नागौर मेड़ता सिटी के हैं हरिराम। पहले लाइब्रेरियन भर्ती में नौकरी मिल जाने की पूरी उम्मीद थी। पेपर ही आउट हो गया। सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी। अब जब दोबारा परीक्षा कराई जा चुकी है तो परिणाम जारी नहीं किया जा रहा है। भरोसा है कि इस परीक्षा में पास हो जाऊंगा। लेकिन हर दिन उम्मीदें धीरे-धीरे टूटती हैं। कर्ज इतना हो चुका है कि जमीन बेचने के सिवा कोई रास्ता नहीं दिखता।

रिजल्ट के इंतजार में पति की मौत, नियुक्ति भी अटकी
सुगना दौसा के प्रेमपुरा की हैं। 2009 में एनटीटी किया। 2018 में सरकार ने भर्ती निकाली। चयन भी हो गया। अंतिम परिणामों में भी नाम था। खुशी थी- एक-दो महीने में नौकरी मिलेगी। लेकिन इंतजार लंबा होता गया। इसी दौरान पति की मौत हो गई। सोचा- नौकरी होगी तो जिंदगी आत्मनिर्भरता से कटेगी। लेकिन सरकार की लापरवाही से नियुक्ति आदेश पर रोक लग गई। कहती हैं- 2014 में शादी हो गई। 2018 में सरकार ने एनटीटी भर्ती निकाली तो नौकरी की आस बंधी थी। सुगना का नियुक्ति आदेश इसलिए रुका कि सरकार ने गीता बजाज कॉलेज को परीक्षा के बाद दायरे से बाहर कर दिया।

हाईकोर्ट में जीत गए, अब सुप्रीम कोर्ट में
बीकानेर के हैं प्रभु सिंह और उनकी पत्नी अंजू। प्रभु ने बताया 2010 में बीएड की थी। 2012 की शिक्षक भर्ती में नंबर आ गया। लेकिन रीशफल परिणाम में बाहर हो गया। इसके बाद वर्ष 2016 की शिक्षक भर्ती के लेवल-2 में अंग्रेजी विषय में नंबर आया। इसमें भी रीशफल परिणाम में बाहर कर दिया गया। हाईकोर्ट की सिंगल और डबल बैंच ने हमारे हक में निर्णय दिया। लेकिन सरकार ने नौकरी देने की बजाय सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी। अब न्याय का इंतजार है। प्रभु के साथ उनकी पत्नी अंजू शेखावत की कहानी भी ऐसी ही है। इसी भर्ती में चयन हुआ था लेकिन रीशफल परिणाम में बाहर कर दिया गया।

2016 में आया था नंबर, नियुक्ति अब तक नहीं
बाड़मेर के तेजसिंह का कहना है- हम 4 भाई और 5 बहनें हैं। घर की माली हालत अच्छी नहीं थी। पिताजी के पैसे तो मेरी एवं भाई-बहनों की शादी और घर चलाने में ही खर्च हो गए। मुझे बीएड कराने के लिए उन्होंने 60 हजार रुपए लोन लिया था। पहले 2013 की भर्ती में नंबर नहीं आया और फिर 2016 की भर्ती में नंबर आया तो मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया। माता-पिता बुजुर्ग हो गए हैं। प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर किसी तरह घर चला रहा था, लेकिन कोरोना में लगे लॉकडाउन के बाद से उसका भी वेतन अटक गया।

बहनों की शादी का लोन कोचिंग में गया
सांचौर तहसील में चौरा गांव है। रामाराम वहीं के हैं। पिता ने बेटियों की शादी के लिए खेत गिरवी रखकर 7 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इसी रकम में से एक लाख रुपए खर्च कर रामाराम को रीट के लिए कोचिंग कराई गई। लेकिन सरकार न तो रिशफल परिणाम जारी कर रही और न ही प्रतीक्षा सूची। रामाराम का कहना है कि रीट में 77% से ज्यादा अंक हासिल किए। भर्ती के 863 पद आज भी खाली हैं। सरकार प्रतीक्षा सूची जारी करे तो नंबर आ जाएगा। कहते हैं- आत्मग्लानि यह होती है कि बहन की शादी का पैसा खर्च कर लिया।

लंबित भर्तियों का जल्द हल निकालेंगे : डोटासरा

सीएम भर्तियां समय पर पूरा करने को लेकर गंभीर हैं। लंबित मामलों में वित्त व विधि विभाग के अफसरों के साथ समीक्षा करेंगे। जो मामले कोर्ट में हैं, उनमें देखेंगे कि किस तरह से रिलीफ दे सकते हैं। शिथिलता की जरूरत पड़े तो वह भी देखेंगे।

-गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षामंत्री

नौकरी की आस में हैं मां के गिरवी गहने ब्याज की किस्त और 4 बहनों का विवाह

नौकरी नहीं मिली इस कारण से पत्नी छोड़ गई, बेटी पालना हुआ मुश्किल
हसामपुर सीकर के महेश कुमार लखेरा ने 2006-07 में विद्यार्थी मित्र के रूप में नौकरी शुरू की। 2013 में शिक्षा सहायक भर्ती निकाली फिर 2015 में विद्यालय सहायक। लेकिन दोनों ही भर्तियां कोर्ट में अटकी हैं। दिसंबर, 2012 में शादी हुई लेकिन कुछ दिन बाद पत्नी का देहांत हो गया। दिसंबर, 2013 में दूसरी शादी की। लेकिन शादी के चार महीने बाद अप्रैल, 2014 में सरकार ने विद्यार्थी मित्रों को हटा दिया। बेरोजगार हो गए तो पत्नी बेटी को उन्हीं के पास छोड़कर चली गई।

कर्ज से पढ़े, हमेशा फर्स्ट डिवीजन आए, अब बढ़ते ब्याज की किस्तों की चिंता

भीम राजसमंद के आदित्य शर्मा के घरवालों ने 2,73,584 रुपए कर्ज लेकर उन्हें जीएनएम का कोर्स कराया। वह हर बार फर्स्ट डिवीजन आए। 2013 में जीएनएम भर्ती में आवेदन किया। दस्तावेज सत्यापन तक हो चुके, लेकिन नौकरी नहीं मिली। एक बार उदयपुर मेडिकल कॉलेज में अर्जेंट टेंपरेरी बेस पर नौकरी के लिए आवेदन किया। लेकिन आदित्य इसे दुर्भाग्य बताते हुए कहते हैं कि वह पहली लिस्ट में 11वें नंबर पर, दूसरी में 21वें पर थे और तीसरी में बाहर कर दिए गए।

ढाई लाख कर्ज 7 लाख हो गया, गिरवी रखी जमीन बिकने की नौबत
आसनघाटड़ा अलवर निवासी रोशनलाल सैनी ने जमीन गिरवी रख 11 साल पहले 2.50 लाख कर्ज लेकर डीएमएलटी और बीएससी एमएलटी कोर्स किया। कुछ दिन एसएमएस अस्पताल में संविदा पर काम किया। लैब टेक्निशियन भर्ती 2018 में आवेदन किया। नंबर भी आ गया। दस्तावेज सत्यापन भी हो गया। लेकिन भर्ती कोर्ट पहुंच गई। कहते हैं- कर्ज बढ़कर 7 लाख से ऊपर पहुंच चुका। चुकाने की स्थिति नहीं है। अब जमीन बेचकर कर्ज चुकाने की सलाह देते हैं लोग।

जमीन बेची, बहनोई से उधार ले तैयारी की, अब करनी पड़ रही मजदूरी
बयाना भरतपुर निवासी विनोद कुमार 10वीं में थे तो पिता का देहांत हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। 35 हजार में जमीन बेचकर आयुर्वेद नर्सिंग का कोर्स में एडमिशन लिया। जमीन का पैसा एक साल में ही खर्च हो गया तो दूसरे साल की फीस जीजाजी से उधार लेकर जमा कराई। वर्ष 2013 में आयुर्वेद नर्सिंग की भर्ती में आवेदन किया, जो अब तक अटकी है। 2014 में शादी हो गई, दो बच्चे भी हो गए। अब बच्चों को पालने के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है।

मां ने पत्थर तोड़, गहने गिरवी रख पढ़ाया, भर्ती 4 बार स्थगित, 5वीं में रद्द

बीपीएल परिवार के बाबूलाल सैनी को मां ने मजदूरी कर और पत्थरों को तोड़ने का काम करके पढ़ाया। बीफार्मा का कोर्स कराते समय पैसे कम पड़े तो गहने गिरवी रखे जो आज तक नहीं छुड़ा पाए। 5 बहनों के भाई बाबूलाल ने कहते हैं कि फार्मासिस्ट भर्ती निकली, लेकिन 4 बार स्थगित होने के बाद हाल में पांचवीं बार रद्द हो गई। मां का सपना था कि बेटा सरकारी नौकरी कर गहने छुड़ाकर लाएगा और बहनों की शादी करेगा लेकिन कुछ नहीं कर सका।

 

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