बेटे-बेटी के साथ पिता ने जान दी:एक कुएं से लोगों ने भगाया तो 115 फीट गहरे दूसरे में कूदा, तीनों की मौत; दो माह पहले पत्नी छोड़ गई थी

 

कुआं 115 फीट गहरा है, ऐसे में जोधपुर और पाली जिले से टीम शवों को निकालने पहुंची। - Dainik Bhaskar

कुआं 115 फीट गहरा है, ऐसे में जोधपुर और पाली जिले से टीम शवों को निकालने पहुंची।

  • पाली जिले के बासनी भदावता गांव की घटना

पाली जिले के बासनी भदावता गांव में रविवार सुबह एक पिता ने अपने दो बच्चों के साथ 115 फीट गहरे कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। वह एक बेटी और बेटे के साथ अकेला रहता था। बच्चों की मां पति से परेशान होकर 2 महीने पहले ही उसे छोड़कर चली गई थी। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों शवों को कुएं से बाहर निकलवाया।

पुलिस ने बताया कि 10 साल की बेटी सूरता और 7 साल के बेटे बालाराम को लेकर टीकमराम चौकीदार कुएं में कूद गया। तीनों की मौत हो गई। गांववालों ने बताया कि टीकाराम सुबह 8 बजे दोनों बच्चों के साथ घर से निकला था। उसने पहले गांव में ही एक व्यक्ति के घर पर नाश्ता किया। फिर बच्चों को लेकर आगे चला गया। इस दौरान गांव के एक कुएं पर पहुंचा और वहां पर मरने की बात कहने लगा। कुएं पर मौजूद लोगों ने उसे भगा दिया। लोगों को लगा कि वह यूं ही जान देने की बात कह रहा है।

इसके बाद टीकमराम गांव से करीब एक किलोमीटर दूर दूसरे कुएं पर पहुंचा और बच्चों के साथ कूद गया। करीब 9:30 बजे कुएं के पास से गुजर रहे लोगों ने वहां कंबल पड़ा देखा। शक हुआ तो कुएं में झांका। कुएं में तीनों के शव नजर आए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

शवों को निकालने के लिए जोधपुर- पाली से पहुंची टीम
ग्रामीणों ने बताया कि टीकमराम ने जिस कुएं में कूदकर आत्महत्या की वह करीब 115 फीट गहरा है। इसमे 50 फीट तक पानी भरा है। ऐसे में कुएं से शव को निकालने के लिए जोधपुर और पाली से टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सबसे पहले बेटी सूरता, फिर टीकराम के शव बाहर निकाले।

पत्नी से मारपीट करता था, इसलिए छोड़ गई
ग्रामीणों का कहना था की टीकमराम की मानसिक स्थिति कुछ महीनों से खराब हो गई थी। वह पत्नी के साथ मारपीट करता था। इसके कारण पत्नी करीब 2 महीने पहले छोड़कर चली गई थी। इसके बाद से टीकमराम दोनों बच्चों को हमेशा अपने पास ही रखता था। कहीं भी जाता था तो उन्हें साथ ले जाता था।

मृतक टीकमराम खेजड़ी के पेड़ों को जलाकर कोयला बनाने का काम करता था। मानसिक स्थिति खराब होने के बाद कमाई बंद हो गई। परिवार बेहद गरीब था, आसपास से मांगकर खा लेता था।

 

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