बीजेपी के महिला आरक्षण के चलते पार्टी में शामिल होने का मिला मौका: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री (Union Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को कहा कि उन्हें भाजपा (BJP) की ओर से लागू किए गए महिला आरक्षण (Women Reservation) के कारण ही पार्टी में शामिल होने का मौका मिला. सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश महिला मोर्चा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें हमेशा शिकायत थी कि वह कभी भी महिला मोर्चा की सदस्य नहीं रहीं. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हमेशा एक शिकायत थी कि मैं कभी भी महिला मोर्चा की सदस्य नहीं रही. मैंने महिला मोर्चा से बहुत कुछ सीखा है. मैं महिला आरक्षण की लाभार्थी हूं और पार्टी में प्रवेश किया.’’

एक बयान में मंत्री के हवाले से कहा गया है कि भाजपा एकमात्र ऐसा राजनीतिक दल है जिसने महिलाओं को पंचायत स्तर से लेकर उस स्तर तक 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है जहां वे आज पार्टी में हैं. उन्होंने कहा कि वास्तव में पुरुषों और महिलाओं को मिलकर काम करना चाहिए और एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं मानना ​​चाहिए.

‘भाषा के आधार पर महिलाओं से भेदभाव सही नहीं’

निर्मला सीतारमण ने सोमवार को भारतीय समाज में महिलाओं के खिलाफ भाषा पर आधारित भेदभाव के मुद्दे को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर महिलाओं से भेदभाव सही नहीं है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्होंने आगे कहा कि औपचारिक और अनौपचारिक व्यस्तताओं के दौरान, लोग हास्य भाषा का उपयोग करते हैं.

‘संचार की भाषा को होना चाहिए लिंग-संवेदनशील’

सीतारमण ने एक बहुत ही सामान्य रूप से इस्तेमाल की जाने वाली हिंदी मुहावरे ‘चूडिय़ां पेहें के बइठना’ का उदाहरण दिया, जिसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति किसी गलत काम का सामना करने या उससे लड़ने की हिम्मत नहीं रखता. सीतारमण ने कहा कि इस तरह की अभिव्यक्ति से बचना होगा. संचार की भाषा को लिंग-संवेदनशील होना चाहिए. हम हर बार सही भाषा के उपयोग के लिए खड़े होते हैं. हम औपचारिक और अनौपचारिक दोनों भाषाओं में आते हैं जो एक जेंडर भेदभाव को नहीं पहचानते हैं.

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