बिहार में NDA से अलग रहना है चिराग का मास्टरस्ट्रोक? जानें कैसे LJP की चाल से चुनाव हुआ रोचक

लोजपा ने बिहार विधानसभा चुनावों को बेहद रोचक बना दिया है। उसे इस चुनाव में क्या हासिल होगा, इसका अंदाज करीब-करीब सभी को है, लेकिन वह एनडीए घटकों भाजपा और जद यू के रिश्तों में संदेह पैदा करने में कामयाब होती दिख रही है।

लोजपा को खुद को भाजपा के सहयोगी के तौर पर स्थापित करना, जद यू के खिलाफ मुहिम शुरू करना, भाजपा के बागियों को टिकट देना और कुछ ही सीटों पर भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़े करना समेत कई ऐसे कदम हैं, जो यह संदेह पैदा करते हैं कि वह चुनाव में किसके साथ है और क्या हासिल करना चाहती है। चूंकि लोजपा के कदमों से सर्वाधिक जद यू के प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए उसकी चिंता वाजिब है।

सूत्रों का कहना है कि लोजपा के रवैये पर जद यू लगातार भाजपा पर दबाव डाल रहा है। स्थिति स्पष्ट करने की मांग करता आ रहा है। संभवत: इसी दबाव के चलते शुक्रवार को वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने लोजपा पर हमला बोला और उसे वोटकटवा पार्टी करार दिया। लेकिन, इसके बाद भी लोजपा के रुख में बदलाव नहीं आया है। चिराग पासवान बार-बार कह रहे हैं कि बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, जो बात जद यू को उलझा रही है।
भाजपा पर लोजपा से नाता तोड़ने का दबाव बना सकता है जदयू 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस स्थिति में जद यू अब भाजपा पर लोजपा से नाता तोड़ने का दबाव भी बना सकता है। केंद्र में अभी भी लोजपा एनडीए का हिस्सा है। यदि भाजपा ऐसा करती है तो इसके दूसरे राजनीतिक संकेत जाते हैं। शिवसेना, अकाली दल के बाद एक और पुराने सहयोगी की विदाई हो जाएगी। प्रत्यक्ष तौर पर लोजपा ने जद यू के साथ-साथ भाजपा को भी मुश्किल में डाला है, लेकिन इस कवायद से लोजपा को क्या फायदा होगा, यह स्पष्ट नहीं है। सिवाय इसके कि चिराग पासवान इन चुनाव के केंद्र बिन्दु बनते जा रहे हैं।

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