बिहार के 4 मासूमों को चाहिए 20 यूनिट ब्लड:थैलेसीमिया पीड़ितों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए वेल्लोर में अस्पताल तैयार, अब ब्लड का इंतजार

 

पीड़ित बच्चे और उनके साथ डोनर। - Dainik Bhaskar

पीड़ित बच्चे और उनके साथ डोनर।

  • गरीब परिवार के पास वेल्लोर में नहीं है सहारा, बिना डोनर के नहीं मिल रहा है खून
  • पीड़ित मासूमों के पिता ने मोबाइल नंबर शेयर कर लोगों से मांगी मदद

बिहार के 4 मासूमों को वेल्लोर में 20 यूनिट खून की जरुरत है। खून मिल जाए तो बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो जाए। फिर हमेशा-हमेशा के लिए खूनी पंजा यानि थैलेसीमिया के चंगुल से बाहर आ जाएं। चंदे की रकम से वह ऑपरेशन के लिए वेल्लोर तो पहुंच गए लेकिन अब खून के लिए डोनर नहीं मिल रहे हैं। बिहार के मासूमाें का परिवार वेल्लोर में बच्चों की जान बचाने के लिए खून मांग रहा है। एक-एक बच्चे से 5-5 यूनिट ब्लड की डिमांड की गई है।

बोन मेराे मैच करने के बाद ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचे भाई-बहन

4 मासूमों के भाई-बहन से उनका बोन मेरो मैच किया था। इसके बाद वेल्लोर में ऑपरेशन के लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के फंड के साथ कोल इंडिया फंड मिला। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी चौबे, P.S वरिष्ठ IAS अधिकारी कुलदीप नारायण और अमित अग्रवाल ने काफी मदद की, जिसके बाद मासूमों के लिए उम्मीद बढ़ी। अब CMCH Vellore में ऑपरेशन के लिए पीड़ित मासूमों के भाई-बहन बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचे हैं। इन बच्चों को जीने के लिए हर 15 से 20 दिन पर ब्लड चढ़वाना पड़ता था। बोन मेरो ट्रांसप्लांट के बाद वह सामान्य लोगों की तरह जिंदगी जी सकेंगे। इन चार थैलीसीमिया पीड़ित मासूमों का बोन मेरो ट्रांसप्लांट होने जा रहा है। चारों बच्चों को बोन मेरो उनके सगे भाई-बहन डोनेट करने जा रहे हैं। ऑपरेशन से पहले की जांच की प्रक्रिया अभी चल रही है।

राहुल को गिरधर दे रहा बोन मेरो

सीतामढ़ी के रहने वाले राहुल कुमार थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। इनके भाई गिरधर कुमार बोन मैरो डोनेट कर रहे हैं। राहुल को 0+ ब्लड की जरूरत है। पिता रंजीत कुमार लोगों से अपील कर रहे हैं, अगर खून मिल जाए तो उनका मासूम बेटा हमेशा के लिए थैलेसीमिया को मात दे देगा। राहुल कुमार की हॉस्पिटल ID 524622H है। मदद करने वाले पिता रंजीत कुमार के मोबाइल नंबर 7277090737 पर संपर्क कर सकते हैं।

विशाल की जान बचा रही बहन आयुषी

वैशाली के रहने वाले मासूम विशाल कुमार की जान उनकी बहन आयुषी बचा रही है। बोन मैरो डोनेट कर वह विशाल को नई जिंदगी देने जा रही है। बस वेल्लोर में खून की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। विशाल कुमार का ब्लड ग्रुप A+ है और हॉस्पिटल की ID 733471H है। खून की मदद के लिए पिता जय प्रकाश राय गुहार लगा रहे हैं। जय प्रकाश राय का कहना है कि वेल्लोर में उन्हें कोई डोनर नहीं मिल रहा है। डोनर मिल जाए तो उनका बेटा हमेशा के लिए थैलेसीमिया से मुक्ति पा जाएगा। उन्होंने मदद करने वालों से मोबाइल नंबर 8809360252 पर संपर्क कर ब्लड डोनेट करने की मांग की है।

यासीन को बाेन मेरो डोनेट कर रही बहन सारा

गया के रहने वाले यासीन शेख थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। बहन सारा प्रवीण उन्हें बोन मैरो डोनेट कर हमेशा-हमेशा के लिए थैलीसीमिया से मुक्ति दिलाने का प्रयास कर रही है। लेकिन खून नहीं मिल पाने से समस्या हो रही है। यासनी का ब्लड ग्रुप-B+ है। हॉस्पिटल ID 592624H है। यासीन के पिता रईसुद्दीन शेख का कहना है कि उनके मोबाइल नंबर 8055483109 पर संपर्क कर कोई ब्लड डोनेट कर दे तो उनका बेटा हमेशा-हमेशा के लिए थैलेसीमिया को मात दे देगा।

शेख तौसीफ को बोन मैरो देगी बहन नौशीन

शेख तौसीफ को उनकी बहन नौशीन बी बोन मैरो डोनेट करेंगी। उनका ब्लड ग्रुप B+Positive है। हॉस्पिटल ID 590465H है। पिता रमजान शेख़ का कहना है कि अगर खून की व्यवस्था हो जाती है तो उनका मासूम बच्चे को हर 20 दिन पर खून चढ़वाकर जिंदा रखने की मुश्किल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद उनका बच्चा पूरी तरह से सामान्य हाे जाता। रमजान का कहना है कि उनके मोबाइल नंबर 7693983648 पर कोई भी फोन कर मदद कर सकता है। अगर 5 यूनिट खून की व्यवस्था हो जाएगी तो बच्चे का बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो जाएगा।

हर माह खून के लिए काटते हैं चक्कर

थैलेसीमिया के खूनी पंजे में जकड़े मासूमों की जिंदगी बाहरी खून पर टिकी होती है। हर 15वें दिन खून के लिए परिवार भटकता है। व्यवस्था नहीं हो पाई तो जीवन पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं। कोरोना काल में कई मासूमों की जिंदगी थैलेसीमिया के कारण खत्म हो गई। पूर्णिया के 4 साल का मासूम इस बात की बानगी है। बिहार में ऐसे कई परिवार हैं जो मासूमों की चिंता में हर दिन टूटते हैं। प्रदेश के 38 मासूमों को सामान्य बच्चों की तरह बनने का सपना अब करीब आ रहा है। इसमें 4 पहले ऑपरेशन के लिए वेल्लोर पहुंचे हैं।

एक साल पहले किया प्रयास लाया रंग

मां वैष्णो देवी सेवा समिति द्वारा 23 फरवरी 2020 को पटना में बिहार के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए कैंप लगाया गया था। इसमें पीड़ित मासूमों का उनके भाई-बहन से बोन मैरो मैच कराया गया। कैंप में लगभग 350 पीड़ित आए थे जिसमें 38 का उनके भाई-बहन से बोन मैरो मैच किया था। अब उन्हें मदद का इंतजार था जिसे लेकर जय मां वैष्णो देवी सेवा समिति का प्रयास जारी था।

कोल इंडिया ने जलाई उम्मीद की किरण

थैलेसीमिया से पीड़ित जिन बच्चों का बोन मैरो उनके भाई-बहन से मैच करता है, उसके बाद उनका ऑपरेशन किया जाता है। इसके लिए देश में कुछ चुनिंदा संस्थान में हैं, जिसमें वेल्लोर प्रमुख है। इसमें बड़ा खर्च आता है। केंद्र सरकार की तरफ से 5 लाख की मदद की जाती है और प्रदेश सरकार से भी 5 लाख मिलता है। कोल इंडिया की तरफ से देश के 200 बच्चों को 10-10 लाख रुपए की मदद ऑपरेशन के लिए किया जाता था जो 31 मार्च 2020 के बाद बंद है। इस कारण से बच्चों के ऑपरेशन में समस्या आई थी। परिवार भी ऐसे नहीं थे जो इस बड़े खर्च को उठा सकें। मां वैष्णो देवी सेवा समिति ने इस दिशा में लगातार प्रयास किया और अब कोल इंडिया ने 10 फरवरी को सहमति प्रदान कर दी। इसी क्रम में 4 बच्चे ऑपरेशन के लिए वेल्लोर पहुंचे हैं।

सरकार ने बढ़ाई मदद की रकम

प्रदेश सरकार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के ऑपरेशन के लिए 5 लाख रुपए देती थी। जय मां वैष्णो देवी सेवा समिति के मुकेश हिसारिया ने इस दिशा में काफी प्रयास किया है। लोक संवाद में सीएम नीतीश कुमार के सामने मामला रखने के बाद अब पीड़ितों को 5 के बजाए 6 लाख रुपया दिया जा रहा है। समिति के प्रयास के बाद कोल इंडिया ने फिर मदद की है। अब बिहार के 38 परिवाराें के पीड़ित मासूमों के सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।

पीड़ित परिवाराें को मदद कर भेजा गया है वेल्लोर

जय मां वैष्णो देवी सेवा समिति की तरफ से ऐसे परिवारों को जागरुक कर वेल्लोर इलाज के लिए भेजा जा रहा है जिनका बोन मैरो मैच किया था। समिति के मुकेश हिसारिया ने बताया कि प्रयास के बाद पीड़ित परिवारों को वेल्लोर भेजा गया है।

थैलेसीमिया से बिना गलती के सजा भुगतते हैं मासूम

डॉ एसपी राणा के मुताबिक थैलेसीमिया ऐसा रोग है जो आम तौर पर जन्म से ही बच्चे को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। यह दो प्रकार का होता है, एक माइनस और दूसरा मेजर। जिन बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होता है वह लगभग सामान्य जीवन जी लेते हैं लेकिन अगर मेजर होता है तो उन्हें हर 21 दिन बाद माह मे खून चढ़ाना पड़ता है। थैलेसीमिया के कारण बच्चों में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं होता है। हर माह खून चढ़ाने के बाद भी बच्चों की आयु बहुत लंबी नहीं हो पाती है। ऐसे मासूमों के साथ पूरा परिवार दंश झेलता है। बिहार में 4 हजार से अधिक परिवार इस दंश को झेल रहा है। हर माह उन्हें खून के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। हालांकि बिहार सरकार की तरफ से प्रदेश का पहला डे केयर सेंटर PMCH में बनाया गया है और चार नए सेंटर बनाने की तैयारी है। खून भी मुफ्त में दिया जाता है लेकिन इसकी व्यवस्था करने में परिवार को परेशानी होती है।

शादी से पहले करा लें जांच तो भविष्य नहीं होगा खराब

डॉक्टरों का कहना है कि थैलेसीमिया एक वंशानुगत रोग है। अगर माता पिता किसी एक में या दोनों में थैलेसीमिया के लक्षण हैं तो यह रोग बच्चों में जा सकता है। इस दंश से भविष्य को बचाने के लिए अगर बच्चा प्लान करने से पहले या शादी से पहले जरूरी टेस्ट करा लिया जाए तो अच्छा होगा।

कुंडली के साथ यह जांच भी जरूरी

थैलेसीमिया माइनर खतरनाक होता है। पति और पत्नी दोनो माइनर हैं तो संतान में थैलेसीमिया का खतरा बढ़ जाता है। मात्र 400 रुपए की जांच में इससे बचा जा सकता है। थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए काम करने वाले मां वैष्णा देवी सेवा समिति के फाउंडर मेम्बर मुकेश हिसारिया का कहना है HBA2 की जांच मात्र 400 में होती है। इस जांच से थैलेसीमिया का खतरा कम किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है जिसमें कहा है कि शादी का प्रमाण पत्र जारी करने में इस जांच की रिपोर्ट का कॉलम रखा जाए। दम्पति से HBA2 की जांच रिपोर्ट लेने के बाद विवाद का प्रमाण पत्र जारी किया जाए। ऐसा करने से मासूमों को बिना गलती के सजा मिलने का सिलसिला खत्म होगा।

 

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