फ्लाइट में हर दो घंटे में यात्रियों का टेम्परेचर चेक हुआ, सरकार ने लोगों के पासपोर्ट पर स्टिकर लगाए, क्यूआर कोड के जरिए ट्रैक किया

 



 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

शंघाई. इमैनुअल डीन इंडोनेशिया के सुरबाया शहर से हैं, लेकिन चीन के शंघाई शहर को अपना दूसरा घर मानते हैं। यहां वे पिछले 2 साल से एक स्टार्टअप ‘बूमी’ चला रहे हैं। खुद को इंडोनेशियन चाइनीज भी कहते हैं। कोरोनावायरस का चीन में असर बढ़ने से पहले ही वे अपने शहर सुरबाया चले गए थे और तब लौटे, जब चीन ने इस महामारी को तकरीबन थाम ही दिया। इमैनुअल ने कोरोना का असर बढ़ने से पहले और इसके थमने के बाद का शंघाई देखा है। भारत के नाम अपनी इस चिट्ठी में वे अपने इसी अनुभव को साझा कर रहे हैं…..

“जब पिछले साल दिसंबर में वुहान में कोरोना महामारी के शुरुआती मामले सामने आए तो इनसे जुड़े फोटो और वीडियो चाइनीज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे- वी चैट, वाइबो और शिहोंग शू पर फैलते गए। वुहान के ये दृश्य डर पैदा करने वाले थे लेकिन शंघाई में सबकुछ सामान्य था। शायद उस समय वुहान के बाहर कम ही लोग इस महामारी के बारे में ज्यादा सोच रहे थे। चीनी लोगों का नया साल ‘लुनार’ (25 जनवरी) जब करीब आने लगा, तो उस समय वुहान में मरीज तेजी से बढ़ने लगे। हालांकि, तब भी शंघाई में ये आंकड़ा कम ही था। उस समय भी यहां लोगों में भी इतना डर नहीं था।

ठीक इसी समय मैं भी नए साल को मनाने के लिए अपने शहर सुरबाया पहुंच चुका था। मैंने सोचा था कि 10 फरवरी को फिर शंघाई लौट आऊंगा, लेकिन ऐसा हो न सका। नए साल के बाद यहां संक्रमण तेजी से फैला। हर दिन 1500 से 2000 नए मरीज सामने आने लगे। ऐसे में मैंने 10 फरवरी काे चीन जाने का इरादा बदल दिया। संक्रमण जब थमने लगा, तब मैं 20 मार्च काे शंघाई पहुंचा। फ्लाइट सुरबाया से सिंगापुर और सिंगापुर से शंघाई पहुंची। सुरबाया से उड़ते समय विमान लगभग खाली था, लेकिन सिंगापुर से शंघाई के बीच सीटें भरी हुईं थीं।

फ्लाइट में हर दो घंटे में बुखार चेक हुआ, एयरपोर्ट पर उतरते ही सवालों और जांचों का सिलसिला शुरू हो गया
फ्लाइट में कई यात्री विशेष सूट, डबल लेयर मास्क और स्की मास्क पहने हुए थे। मैंने भी दस्ताने और मास्क लगाया हुआ था। शंघाई के लिए उड़ते समय हमें दो बोतल पानी और एक पैकट लंच दिया गया। फ्लाइट अटेंडेंट हर दो घंटे में यात्रियों का टैम्परेचर चेक करती रही। शंघाई के पुडोंग एयरपाेर्ट पर लैंडिंग के बाद एक-एक कर यात्रियों को बाहर बुलाया गया। पहले उन लाेगाें काे बुलाया गया, जाे ज्यादा संक्रमित देशाें से आए थे। चीन ने ऐसे 24 देशों की लिस्ट बना रखी थी। उतरने से पहले हमसे एग्जिट/एंट्री हेल्थ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाया गया। 12:30 बजे विमान से निकलने के बाद हमें कई बूथों से गुजारा गया। हमसे कई सवाल पूछे गए जैसे- पिछले 14 दिनों में किन देशों में गए? किसी काेराेना संक्रमित के संपर्क में ताे नहीं रहे?

इमिग्रेशन अधिकारियों ने यहां कई यात्रियों के पासपाेर्ट पर पीला स्टिकर लगाया। उन्हें अलग कमरे में रखा गया। मेरा बुखार नापने के बाद मुझे हरा स्टिकर दिया गया और जाने दिया गया। दो महीने सुरबाया (कोराना संक्रमण न के बराबर) में रहने के चलते मुझे यहां आसानी हुई। पीले स्टिकर वालाें की कतार में 200-300 लोग थे, इनके लिए टेस्ट और जांच की अलग प्रक्रिया चलती रही। मुझे भी वीचैट से पता चला कि हमें भी अभी एक न्यूक्लिक टेस्ट से गुजरना होगा और खुद को होम क्वारेंटाइन करना होगा।

2 दिन बाद ही कम्यूनिटी लीडर जांच के लिए आए, उनके दिए क्यूआर कोड से हमारी जानकारी उन तक पहुंचती रहती है
मैं उसी दिन 3 बजे घर पहुंच गया था। अगले कुछ दिन मैं घर पर ही रहा, सिर्फ खाने के लिए बाहर निकलता। 23 मार्च को कई लोग मेरे अपार्टमेंट में आए और यात्रा से जुड़े सवाल पूछे। उन्होंने मेरे इमिग्रेशन के स्टिकर का रंग भी देखा। ये लोग कम्युनिटी लीडर थे, जिन्हें चीन सरकार ने ही नियुक्त किया था। ये लोग एक निश्चित इलाके में बाहर से आने-जाने वालों की जांच के प्रभारी थे। उन्हाेंने मुझे सुशीनेम से रजिस्टर किया और एक क्यूआर काेड दिया। इसे हम वीचैट या अलीपे पर देख सकते हैं। इसके जरिये अधिकारियाें काे पता रहता है कि हम स्वस्थ हैं या नहीं। हरे स्टिकर का अर्थ है स्वस्थ। इन स्थानीय अधिकारियों की जांच के बाद मैंने शंघाई में कामकाज शुरू कर दिया। मैं देख रहा था कि शंघाई अपने पुराने रूप में वापस आ रहा है, लेकिन यह अब भी ढाई कराेड़ की आबादी वाले शहर जैसा नहीं लग रहा था।

हर जगह टैम्परेचर चेक होता है, बिना मास्क के भी एंट्री नहीं
अब जब मैं घर से बाहर निकल सकता हूं तो मुझे ये अंदाजा बिल्कुल नहीं रहता कि मेरा टैम्परेचर कितनी बार मापा जाता है। शॉपिंग मॉल, मेट्रो स्टेशन से लेकर अपार्टमेंट तक हर जगह बुखार नापने के बाद ही एंट्री होती है। पर्यटन क्षेत्र जैसे कि तियानजिफांग, युयुआन गार्डन या जिन्टिआंडी में हमें राेज पास लेना हाेता है। तियानजिफैंग में बुखार के अलावा पास तो देखते ही हैं, इसके साथ ही क्यूआर काेड भी दिखाना हाेता है। तियानजिफांग आमतौर पर बड़ा ही भीड़भाड़ वाला इलाका है लेकिन फिलहाल यह एक भूतिया इलाका बन गया है।

ज्यादातर स्टोर्स में गार्ड मास्क पहनने का निर्देश देते हैं। मास्क नहीं पहनने पर अंदर नहीं जाने दिया जाता। यहां दुकानों में एंटीसेप्टिक, साबुन और अन्य चीजें तो आसानी से मिल जाती है लेकिन मास्क मिलना मुश्किल है। शहर के सभी स्टोर पूरी तरह डिजिटल हो गए हैं। अब यहां कुछ खरीदते समय कैशियर से मिलने की जरूरत नहीं होती। क्यूआर कोड स्कैन कर वीचैट या अलीपे से पेमेंट कर सकते हैं।

50% कामकाज होने लगा है, 4 अप्रैल को मुझे भी 14 दिन पूरे हो जाएंगे
कई लाेग दफ्तराें में लाैट चुके हैं। 50% काम शुरू हाे चुका है। हालांकि, कई छोटे व्यवसायियाें काे धंधा बंद भी करना पड़ा है। मैं 25 मार्च को अपने ऑफिस गया था, लेकिन मुझे वापस लाैटा दिया गया। मैं 14 दिन पूरे हाेने के बाद 4 अप्रैल काे ही काम शुरू कर पाऊंगा। मैं यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बजाय मोबाइक और हैलोबाइक का ही उपयोग करता हूं। मुझे मेरे दोस्त बताते हैं कि जब भी वे मेट्रो स्टेशन पहुंचते हैं तो उन्हें वीचैट और अलीपे के जरिए जिस कार या बाइक से आए हैं, उसे रजिस्टर करना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कोई कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो अधिकारी आपके संपर्क वाले अन्य लोगों को आसानी से ट्रैक कर पाए।

चीन के लोगों ने सरकार का हर आदेश माना
महामारी को थामने के लिए चीनी सरकार की कोशिशें तारीफ की हकदार हैं। कोरोना के चरम के दौरान यहां 80 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित मामले थे, लेकिन अब यह 5 हजार ही बचे हैं। चीन के लाेगाें की तारीफ करनी होगी क्योंकि इन्होंने सरकार का हर आदेश माना और सहयोग किया। मैंने एक भी शख्स ऐसा नहीं देखा जाे सार्वजनिक स्थल पर बिना मास्क के हाे। हर किसी ने साेशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना को रोकने में मदद की।

अभी भी शंघाई में एहतियात के तौर पर जरूरी सतर्कता बरती जा रही है। शहर में आने वाले हर देशी-विदेशी नागरिक को एयरपोर्ट से निकलने से पहले न्यूक्लिक टेस्ट देना ही होता है। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 24 देशों से आने वाले यात्री को तयशुदा सरकारी होटल में 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन किया जा रहा है। बार और रेस्टोरेंट में एक समय में 50 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। अभी भी यहां किसी भी इवेंट में 50 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है। शंघाई की रहवासी इलाकों में नियमों में कुछ ढील मिली है। यहां रहने वालों को बिल्डिंग्स में आने-जाने के लिए अब जानकारी नहीं देनी होती। मुझे बताया गया कि कुछ दिनों पहले तक अगर कोई बिल्डिंग से बाहर जा रहा था तो उसे एंट्री करनी होती थी, साथ ही उसे 2 घंटे के अंदर वापस भी आना होता था।

Check Also

दिल्ली से लगी सीमाएं सील होने से NCR के बॉर्डरों लगा लंबा जाम, लोग परेशान

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए दिल्ली की ओर से एनसीआर के शहरों …