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इंदौर, मध्य प्रदेश. कोरोना के खिलाफ सारी दुनिया लड़ रही है। इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मेडिकल स्टाफ निभा रहा है। लेकिन कुछ अस्पतालों और स्टाफ की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना बर्ताव के कारण कोरोना वॉरियर्स को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। जबलपुर के बाद ऐसा ही एक मामला अब इंदौर में सामने आया है। इंदौर के एमटीएच अस्पताल में कुलकर्णी का भट्टा निवासी 32 वर्षीय संदीप कामले की मौत के बाद उनकी पत्नी ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बता दें कि गुरुवार को इस अस्पताल में तीन कोरोना मरीजों की मौत हुई। पत्नी ने लगाए कई गंभीर आरोप… संदीप की पत्नी ने बताया कि तीन दिन पहले उन्हें घबराहट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को अस्पताल से उनकी मौत की खबर मिली। पत्नी का आरोप है कि इन तीन दिनों में उनके पति से मिलने तक नहीं दिया गया। पति ने किसी के मोबाइल से कॉल करके बताया था कि उन्हें खाना नहीं दिया गया। न ही कोई इलाज करने आया। पत्नी ने कहा कि अस्पताल ने उनसे साढ़े 15 हजार रुपए के तीन इंजेक्शन मंगवाए, लेकिन उन्हें लगाया तक नहीं। मृतक के दोस्त राजेश ने मीडिया को बताया कि इस बारे में पूछने पर डॉक्टरों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। पति की कोरोना से मौत के 10 दिन बाद पत्नी ने हिम्मत जुटाकर वायरल किया वीडियो और खोला चौंकाने वाला राज़ जबलपुर, मध्य प्रदेश. यहां 10 दिन पहले एक शख्स की कोरोना से मौत हो गई थी। उसकी पत्नी ने एक वीडियो वायरल करके अस्पताल की लापरवाही उजागर की है। महिला ने पति की मौत के लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है। वीडियो में रोते हुए पत्नी ने स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकार के दावों पर कई सवाल खड़े कर दिए। कोरोना के कारण अपनी जान गंवाने वाले आशीष तिवारी की पत्नी ने वीडियो में कहा कि वो पति की मौत के 10 दिन बाद हिम्मत जुटाकर अपनी बात कह रही है। नेहा तिवारी ने बताया कि उनके पति को नॉर्मल फ्लू था। लेकिन समय पर उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिली। नेहा ने कहा कि वो अब डॉक्टरों पर केस करना चाहती हैं। उन्होंने लोगों से मदद की अपील की है। नेहा ने बताया कि उनके पति ने मौत से 20 मिनट पहले फोन पर बात की थी। तब सबकुछ ठीक था। लेकिन बाद में उनकी तबीयत कैसे बिगड़ गई? नेहा ने कहा कि उनके पति को कोरोना था, तो उसकी अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं आई? न उनके घर को सील किया और न ही किसी की जांच की। वीडियो में महिला ने बताया कि एक निजी अस्पताल में दिखाने पर उनके पति को निमोनिया बताया गया था। लेकिन भर्ती करने से मना कर दिया गया था। इसके बाद वे उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। वहां उन्हें भर्ती कराकर परिजन घर पर खाना और कपड़े लेने गए, तब 10 मिनट बाद उनकी मौत की खबर आ गई।

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