फर्जी वेंटिलेटर सप्लाई ने गुजरात मॉडल पर उठाये सवाल, कांग्रेस ने पूछा, ‘विरानी-मोदी के बीच क्या है रिश्ता’

नयी दिल्ली: कोरोना महामारी में जिंदगी मौत से जूझ रहे लोगों को वेंटिलेटर के नाम पर आर्टिफिशियल मेनुएल ब्रीथिंग यूनिट जो एएमबीयू के नाम से जानी जाती है लगा कर उनकी जिंदगी से गुजरात में जो खिलवाड़ किया गया वह अब तूल पकड़ता जा रहा है, इस विवाद के कारण गुजरात मॉडल पर फिर एक वार सवाल खड़े हो रहे हैं।

गुजरात प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिस गुजरात मॉडल को विकास की धुरी बताते नहीं थकते थे उसकी सच्चाई की परतें खुलनी शुरू हो गयीं हैं, जहाँ पैसे कमाने के लिये लोगों की जिंदगी से खेलने से कोई गुरेज नहीं है।

उनका मानना था कि धामन -1 मशीनों के इस्तैमाल के कारण गुजरात में कोरोना मृतकों की संख्या बढ़ती चली गयी। कांग्रेस अब इन फर्ज़ी मशीनों जो वेंटिलेटर बताये गये थे को लेकर गुजरात मॉडल कि परतें खोलने पर उतर आयी है। गुजरात कांग्रेस के नेता और पूर्व सांसद राजू परमार बताते हैं कि गुजरात में कोरोना से मरने वालों की वास्तविक संख्या को यहाँ की रूपानी सरकार केंद्र के इशारे पर ज़ाहिर ही नहीं होने दे रही ,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर एम्स के निदेशक गुलेरिया यहाँ आते हैं और राज्य प्रशासन मरीजों को ठीक बता कर छुट्टी दे देते हैं ताकि आंकड़ा कम नज़र आये .यही है गुजरात मॉडल। सच्चाई को छुपाओ।

कांग्रेस ने आज राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उछालते हुये भाजपा सरकार पर सीधा हमला किया और पूछा कि किसके इशारे पर वेंटिलेटर के नाम पर एएमबीयू मशीनों को खरीदा गया। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि बिना जांच पड़ताल और टेस्टिंग के केंद्र सरकार की कम्पनी एच एच एल लाइफ़ केयर ने कैसे 5 हज़ार मशीनों का ऑर्डर दिया।

गुजरात सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 25 और 18 मार्च को सिविल अस्पताल से 338 मरीज़ ठीक होते हैं और 343 की मौत होती है केवल इस कारण कि वेंटिलेटर की जगह इन लोगों को एएमबीयू मशीन लगा दी गयी थी। अब कांग्रेस पूछ रही है कि मुख्यमंत्री रुपानी और पराक्रम सिंह जडेजा के बीच क्या रिश्ता है, सरकार और उसके अधिकारी ज्योति सीएनसी कम्पनी जिसने वेंटिलेटर के नाम पर एएमबीयू मशीनें सप्लाई की का बचाव क्यों कर रहे हैं ,उनको ऐसा करने के लिये कौन कह रहा है।

अहमदाबाद सिविल अस्पताल के अधीक्षक के यह कहने के बाबजूद कि यह मशीन मरीज़ों पर कामयाब नहीं है, उनको वेंटिलेटर चाहिये लेकिन गुजरात मॉडल का तंत्र उनको एएमबीयू मशीनों को प्रयोग करने को कहता है। अब यह मुद्दा इतना गर्माता जा रहा है कि एफआईआर दर्ज़ कराने का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस पूछ रही है कि विरानी परिवार और मोदी के बीच क्या रिश्ता है ,क्या यह सही है कि रमेश भाई विरानी उस कम्पनी के शेयर होल्डर हैं जिसने फ़र्ज़ी वेंटिलेटर की सप्लाई की।

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