फर्जी इंश्योरेंस क्लेम अप्लाई करना पड़ेगा भारी, सीधा हो जाएंगे ब्लैकलिस्ट

नई दिल्ली: इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का मानना है कि भारत में ज्यादातर लोगों के बीच में धारणा है कि प्राइवेट हॉस्पिटल में गैरजरूरी डायगनोस्टिक को बढ़ावा दिया जाता है. इस वजह से देश में सख्त हेल्थ प्रोटोकॉल बनाने की जरूरत है, जिसमें इंश्योरेंस कंपनियां, TPA और हॉस्पिटल्स के साथ आकर एक दायरे में काम करें.

निजी अस्पताल करता हैं गैर-जरूरी टेस्ट्स

IRDAI के चैयरमैन सुभाषचंद्र खुंटिया के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर के प्रति लोगों में गलत धारणाएं हैं कि निजी अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा डायगनोस्टिक किया जाता है, क्योंकि जापान जैसे विकसित देश में महिलाओं में सी-सेक्शन का आंकड़ा सिर्फ 20% है लेकिन भारत के कई राज्यों में ये आंकड़ा 80 से 90 परसेंट तक है. खुंटिया का यह भी मानना है कि देश में हेल्थ रेगुलेटर की कमी है इसलिए हॉस्पिटल्स की क्वालिटी कंट्रोल पर काम करना जरूरी है जिसमें हॉस्पिटल्स को खुद आगे आकर सही डिस्क्लोजर देना चाहिए.

चुनिंदा पॉलिसी बनाई जाए

CII की नेशनल हेल्थ समिट में सुभाषचंद्र खुंटिया ने इंश्योरेंस कंपनियों को सुझाव दिया कि उन्हें डायबिटिज, किडनी और दिल जैसी बीमारियों के कवरेज की चुनिंदा पॉलिसी लॉन्च करनी चाहिए. साथ ही कंपनियों को सीनियर सिटीजन के लिए स्पेशल पॉलिसी बनाने पर विचार करना चाहिए.

फर्जी क्लेम पड़ेगा भारी

IRDAI देश में फर्जी क्लेम को कम करने पर भी बड़े पैमाने पर काम कर रहा है क्योंकि भारत में हेल्थ इंश्योरेंस में कुल क्लेम का 15 परसेंट यानी 800 करोड़ के क्लेम फ्रॉड होते हैं, जिससे सामान्य पॉलिसी होल्डर्स को नुकसान हो रहा है और फ्रॉड क्लेम को रोकने के लिए इंश्योरेंस कंपनियों से लेकर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी साथ मिलकर सेंट्रलाइज्ड डाटा बेस तैयार कर रहे है. हेल्थ इंफॉर्मेशन सिस्टम में इंश्योरेंस कंपनियां, TPA, हॉस्पिटल, NDHM साथ जुड़ेंगे. नए सिस्टम के जरिए फ्रॉड करने वालों को सीधा ब्लैकलिस्ट किया जाएगा.

इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश माथुर के मुताबिक इंश्योरेंस सेक्टर में फ्रॉड क्लेम रोकना जरूरी है. क्योंकि फ्रॉड क्लेम की वजह से सामान्य पॉलिसी होल्डर को ज्यादा प्रीमियम देना पड़ रहा है. इसमें प्रकिया से जुड़े सभी पक्षों को एक साथ जोड़कर ही फ्रॉड क्लेम पर लगाम लगेगी.

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