प्री-प्राइमरी कक्षाएं भी फीस कानून के दायरे में, स्कूली बच्चों की समस्याओं का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी

 

जयपुर। हाईकोर्ट ने फीस वसूली मामले में ऑर्डर रिजर्व रखा है।

  • निजी स्कूलों की 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूली मामले में बहस पूरी, फैसला बाद में

हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूलने के मामले में माना है कि प्री-प्राइमरी कक्षाएं भी फीस कानून के दायरे में आती हैं और स्कूली बच्चों की समस्याओं का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं अदालत ने मामले में पक्षकारों की बहस पूरी होने पर फैसला बाद में देना तय किया।

सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार, अधिवक्ता सुनील समदड़िया व अन्य की अपीलों पर सोमवार को सुनवाई करते हुए दिया। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ महीने पहले तक किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि कोरोना संक्रमण से ऐसे हालात होंगे और शिक्षा पर उसका इतना गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्कूली बच्चों की समस्याओं का ध्यान रखे। अदालत ने माना कि स्कूल फीस नियामक कानून की प्रभावी तरीके से पालना नहीं हो पा रही है।

कोरोना के हालातों को ध्यान में रखकर तय करें फीस
खंडपीठ ने माना कि फीस नियामक अधिनियम के तहत की गई कमेटी कोरोना संक्रमण के हालातों को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रशासन के साथ बैठकर फीस को तय करें। अभिभावक भी चाहें तो वे भी फीस तय करने के दौरान अपने सुझाव दे सकते हैं।

एकल पीठ ने 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूलने की छूट दी थी
दरअसल हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 7 सितंबर को प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर निजी स्कूलों को 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूलने की छूट दी थी। एकलपीठ के इस आदेश को राज्य सरकार सहित अन्य के खंडपीठ में चुनौती देने पर खंडपीठ ने एकलपीठ के फीस वसूली के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

राज्य सरकार व अन्य का अपील में कहना था कि एकलपीठ अंतरिम आदेश में ही पूर्ण आदेश नहीं दे सकती और एकलपीठ के समक्ष जिस संस्था ने याचिका दायर की थी वह पंजीकृत नहीं थी। इसलिए एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए।

 

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