प्रयागराज में नाविकों पर लाठीचार्ज मामला:जब प्रियंका नाव चला रही थीं, तब नाविक ने सुनाई थी पुलिस की बर्बरता, उसकी व्यथा सुन 10 दिन बाद फिर आईं

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा 10 दिन के भीतर आज एक बार फिर प्रयागराज के दौरे पर हैं। वे बसवार गांव में नाविक परिवारों से मिलेंगी। नाविक सुजीत निषाद का दावा है कि उसी के बुलावे पर प्रियंका गांधी आज प्रयागराज आई हैं। सुजीत ने बताया कि प्रियंका गांधी ने उसके परिवार व रोजी-रोटी के बारे में जानकारी ली थी। सुजीत ने बताया था कि परिवार में पत्नी व तीन बेटियां हैं। भाड़े की नाव चलाकर परिवार का भरण पोषण करता है।

सुजीत निषाद ने 4 फरवरी को बसवार में पुलिस व नाविकों के बीच हुए झड़प की जानकारी भी दी थी। कहा था कि पुलिस ने हमारी रोजी-रोटी का सहारा नावों को तोड़ दिया है। यह भी कहा था कि एक बार गांव में जरूर आएं। आज जब प्रियंका गांधी प्रयागराज में बमरौली एयरपोर्ट पर पहुंची तो नाविक सुजीत निषाद और बलराम साहनी ने स्वागत किया। बलराम साहनी की मुलाकात प्रियंका गांधी से लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की गंगा यात्रा के वक्त हुई थी।

प्रियंका गांधी ने 11 फरवरी को मौनी अमावस्या पर सुजीत निषाद की नाव चलाई थी।

प्रियंका गांधी ने 11 फरवरी को मौनी अमावस्या पर सुजीत निषाद की नाव चलाई थी।

एक दिन पहले ही एक्टिव हुआ प्रशासन, कराई मरम्मत

प्रियंका गांधी वाड्रा के घूरपुर थाना क्षेत्र के बसवार गांव में आगमन से एक दिन पहले ही जिला प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया। पिछले दिनों तोड़ी गई नावों की मरम्मत कार्य शुरू करा दिया। मछुआरों की तोड़ी गई नावें मरम्मत करके तैयार करा दी गई। इसका वीडियो भी सामने आया है।

नाव की मरम्मत करते मजदूर।

नाव की मरम्मत करते मजदूर।

अवैध खनन को रोकने के लिए तोड़ी थी 16 नावें
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 जून 2019 को पूरे प्रदेश में बालू खनन में नाव का प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया था। इससे तमाम निषाद बेरोजगार हो गए। घूरपुर के पास बसवार गांव में इसके पहले 30 जनवरी को राज कंस्ट्रक्शन का ठेका था, जो बंद हो गया है। 4 फरवरी को कुछ लोगों ने शिकायत की कि यहां पर अवैध खनन हो रहा है।

पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर खनन में लिप्त नावों को तोड़ दिया था। इस पर ग्रामीण उग्र हो गए। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें महिलाओं समेत 30 से अधिक ग्रामीण चोटिल हो गए। ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई न करके छोटे नाविकों की 16 नावों को तोड़ दिया था। मामले में पुलिस ने 200 से अधिक ग्रामीणों के खिलाफ FIR दर्ज किया था।

मछुआरों की मांग

  • बोट तोड़ने व मजदूरों पर लाठीचार्ज करने वाले अफसरों को सस्पेंड कर जेल भेजा जाए।
  • पुलिस द्वारा तोड़ी गयी नावों का मुआवजा दिया जाए।
  • मजदूरों पर दर्ज फर्जी केस वापस लिया जाए।
  • आखिरी मांग है 24 जून, 2019 का बोट से खनन पर लगी रोक वापस ली जाए।

 

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