पूजा अनुष्ठानों में आम के पत्तों का प्रयोग क्यों करते है?

हनुमान जी अपने श्रद्धालुओं पर आने वाले सभी प्रकार के कष्टों तथा समस्याओं को दूर करते हैं। ऐसी मान्यता है कि प्रभु हनुमान बेहद शीघ्र खुश होने वाले भगवन हैं। उनकी पूजा पाठ में अधिक कुछ करने की आवश्यकता नहीं होती। शायद यही कारण है कि आज के वक़्त में हनुमान जी के श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी ज्यादा हो गई है। हनुमान जी राम भक्त हैं तथा उनकी शरण में जाने मात्र से श्रद्धालु की सभी समस्यां दूर हो जाते हैं। वही हिन्दू परिवारों में जब कोई शुभ कार्य होता है तो सजावट के रूप में घर के प्रवेश द्वार के ऊपर आम के वृक्ष की पत्तियां (आम्र पल्लव) लगाई जाती हैं। आइए आपको बताते हैं इसके पीछे क्‍या है धार्मिक वजह।
हिन्दू धर्म में पेड़ों का बहुत सम्मान किया जाता है, उन्हें पूजा जाता है तथा उन्हें अन्न देवता माना जाता है। आम के पत्‍तों को विशेष रूप से पूजा में सम्मिलित क‍िया जाता है। सभी मंगल कार्यों में आम के पेड़ की पत्तियां लगाई जाती हैं। किन्तु इस पेड़ की पत्तियों में ऐसा क्या विशेष है जो इनका शुभ कार्यों में उपयोग किया जाता है। सिर्फ घर के दरवाजे पर ही नहीं, जब पूजा का कलश तैयार किया जाता है, तब उसके ऊपर भी आम के पेड़ की पत्तियों को लगाया जाता है। इतना ही नहीं, हिन्दू रीति मुताबिक जब किसी का विवाह होता है तब भी शादी के मंडप को आम के वृक्ष की पत्तियों से सजाया जाता है।
वहीं माना जाता है कि आम की लकड़ी, घी, हवन सामग्री के हवन में इस्तेमाल से वतावरण में सकारात्मकता बढ़ती है। बाहर से आने वाली हवा जब भी इन पत्तियों का स्पर्श कर घर में आती है तो वह स्वयं में सकारात्मक कणों को लाती है। ऐसी हवा से घर में सुख एवं समृद्धि बढ़ती है तथा ऐसे घर को कलह-कलेष कभी भी जकड़ नहीं सकता। इसके अतिरिक्त ऐसा भी माना जाता है कि प्रवेश द्वार पर आम की पत्तियां लटकाने से बिना परेशानी सारे मांगलिक कार्य पूरे हो जाते हैं।

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