पाकिस्तान में 19वीं सदी के गुरुद्वारे का होगा पुनर्निर्माण, फिर खोले जाएंगे श्रद्धालुओं के लिए इसके दरवाजे

पाकिस्तान (Pakistan) की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की रक्षा करने में नाकामयाब रहने के लिए आलोचना की गई. इसके बाद लगने लगा है कि इस्लामबाद (Islamabad) सीधे रास्ते पर चलने लगा है. दरअसल, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार (Khyber Pakhtunkhwa Government) 19वीं शताब्दी में निर्मित एक गुरुद्वारे (Gurudwara) को अपनी निगरानी में लेने वाली है. प्रांतीय सरकार गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण करेगी और इसे श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोलेगी. बता दें कि इस गुरुद्वारे का निर्माण सिख शासक हरि सिंह नलवा (Hari Singh Nalwa) के शासनकाल में हुआ था.

खैबर पख्तूनख्वा के अधिकारियों ने बताया कि मनसेहरा जिले में स्थित यह गुरुद्वारा फिलहाल पूजा अर्चना के लिए बंद है. वर्तमान में इसका इस्तेमाल अस्थायी पुस्तकालय के तौर पर किया जा रहा है. प्रांतीय औकाफ और धार्मिक मामलों के विभाग ने स्थानीय सरकार को पुनर्निर्माण प्रस्ताव लाहौर में ‘इवैक्यू प्रॉपर्टी ट्रस्ट बोर्ड’ (EPTB) के समक्ष रखने का सुझाव दिया था. EPTB एक वैधानिक बोर्ड है जो विभाजन के बाद भारत चले गए हिंदुओं और सिखों की धार्मिक संपत्तियों और मंदिरों का प्रबंधन करता है.

कौन हैं हरि सिंह नलवा?

हरि सिंह नलवा (1791-1837) सिख साम्राज्य के कमांडर थे. उन्हें कसूर, सियालकोट, अटक, मुल्तान, कश्मीर, पेशावर और जमरूद की लड़ाई के लिए याद किया जाता है. कहा जाता है कि किले, टावरों, गुरुद्वारों, टैंकों सहित 56 से अधिक इमारतें उनकी प्रत्यक्ष देखरेख में बनाई गई हैं. बता दें कि पाकिस्तान में कई प्रमुख गुरुद्वारे और प्राचीन मंदिर स्थित हैं. इनकी बदहाली के लिए पाकिस्तान की दुनियाभर में आलोचना की जाती है. हालांकि, हाल के दिनों में पाकिस्तान सरकार इनके रख-रखाव के लिए कदम उठाती हुई नजर आ रही है.

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