नीति आयोग की बैठक आयोजित:नगरनार प्लांट के निजीकरण का विरोध, सीएम भूपेश ने कहा- राज्य को चलाने दें

 

नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी से चर्चा करते सीएम भूपेश। - Dainik Bhaskar

नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी से चर्चा करते सीएम भूपेश।

  • केंद्रीय पूल में 60 लाख टन चावल लेने की मांग

नीति आयोग की बैठक में सीएम भूपेश बघेल ने नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण पर विरोध जताया। साथ ही, पीएम नरेंद्र मोदी के सामने राज्य को देने का आग्रह किया। सीएम ने केंद्रीय पूल में 60 लाख टन चावल लेने की मांग की है। बस्तर में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए प्रस्तावित बोधघाट परियोजना के लिए भी मदद मांगी है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई नीति आयोग की बैठक में सीएम ने छत्तीसगढ़ को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों ने विकास के सभी मापदंडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। नीति आयोग ने भी डेल्टा रैंकिंग में छत्तीसगढ़ के नवाचारों की सराहना की है। सीएम ने इसमें सांस्कृतिक उत्थान के बिंदु को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। इसी तरह वर्मी कम्पोस्ट में रासायनिक खाद की तरह सब्सिडी देने की मांग रखी। सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोयला का बड़ा भंडार होने के बावजूद राज्य को कोल ब्लॉक नहीं मिला है।

इसलिए यहां के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी कोल ब्लॉक आबंटित करने की मांग की। 2014 के बाद खनिज रॉयल्टी दर में वृद्धि नहीं होने के कारण राज्य को हो रहे नुकसान का हवाला देकर संशोधन की मांग की है।

कार्गो हब और पोर्ट की मंजूरी दी जाए

सीएम बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ इज आफ डूइंग बिजनेस के मापदंडों में देश के अग्रणी छह राज्यों में शामिल है। इसे देखते हुए उद्योगों के विकास और निर्यात काे बढ़ावा देने के लिए रायपुर में कार्गो हब स्थापित करने और पोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराएं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लैंड लॉक्ड राज्यों में शामिल है, इसलिए अंतरदेशीय परिवहन अनुदान दिया जाए। राज्य सरकार द्वारा कोदो-कुटकी को समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया गया है। कोदो-कुटकी की विदेशों में भी बड़ी मांग है। इनके निर्यात की सुविधा उपलब्ध होने से इसका फायदा आदिवासी किसानों को होगा।

एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग

राज्य को अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देन की मांग रखी। सीएम ने कहा कि इससे देश की विदेशी मुद्रा में बचत होगी। किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। चावल के स्थान पर धान से एथेनॉल की अनुमति मिलने पर परिवहन और मिलिंग पर होने वाला खर्च बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार केंद्र सरकार द्वारा एथेनॉल की दर 54.89 रुपए प्रति लीटर तय की गई है, जिसे और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए। प्रदेश में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन के लिए एमओयू हो चुका है।

 

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