निलंबित DSP देविंदर सिंह समेत छह के खिलाफ चार्जशीट दायर, जम्मू-कश्मीर आतंकियों की भर्ती और टेरर फंडिंग में था शामिल

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जम्मू: राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने देश में कथित आतंकी गतिविधियों के लिये जम्मू-कश्मीर के निलंबित पुलिस उपाधीक्षक देविंदर सिंह समेत छह लोगों के खिलाफ सोमवार को आरोप पत्र दायर किया। अधिकारियों ने बताया कि सिंह के अलावा आरोप पत्र में प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ नवीद बाबू, संगठन के कथित भूमिगत कार्यकर्ता इरफान शफी मीर और इसके सदस्य रफी अहमद राठेर का भी नाम है।

इसके अलावा कारोबारी तनवीर अहमद वानी तथा नवीद बाबू के भाई सैयद इरफान अहमद को भी नामजद किया गया है। इस साल जनवरी में गिरफ्तार किए गए सिंह पर सुरक्षित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिये पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों के साथ संपर्क स्थापित करने का आरोप है।

जून में दिल्ली की अदालत ने निलंबित DSP देविंदर सिंह को जमानत दी

बीते महीने दिल्ली की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर के निलंबित डीएसपी देविंदर सिंह को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में जमानत दे दी। दिल्ली पुलिस निर्धारित समय के अंदर आरोपपत्र दाखिल करने में नाकाम रही। सिंह को इस साल की शुरुआत में श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। विशेष न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने सिंह और मामले के एक अन्य आरोपी इरफान शफी मीर को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ द्वारा दायर एक मामले में राहत दी है। अदालत ने गौर किया कि गिरफ्तारी से 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने की कानून के तहत निर्धारित अवधि में पुलिस विफल रही।

निलंबित डीएसपी पिछले वर्ष आतंकवादियों को जम्मू ले गया था

जम्मू-कश्मीर पुलिस के निलंबित उपाधीक्षक दविंदर सिंह हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी नावीद बाबू को पिछले वर्ष जम्मू ले गया था और उसके ‘‘आराम तथा स्वास्थ्य लाभ’’ के बाद शोपियां लौटने में भी उसकी मदद की थी। उससे पूछताछ करने वाले अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पूछताछ करने वाले एक अधिकारी ने सिंह के हवाले से बताया, ‘‘मेरी मति मारी गई थी।’’ एक बड़े आतंकवादी को पकड़ने की कहानी के माध्यम से जब वह जांचकर्ताओं को संतुष्ट नहीं कर पाया तब उसने यह बात कही। सिंह को  नावीद बाबू उर्फ बाबर आजम और उसके सहयोगी आसिफ अहमद के साथ पकड़ा गया था। आजम दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के नाजनीनपुरा का रहने वाला है। अधिकारियों ने बताया कि उपाधीक्षक ने दोनों को चंडीगढ़ में कुछ महीने तक आवास मुहैया कराने के लिए कथित तौर पर 12 लाख रुपये लिए थे। अ

1990 में उपनिरीक्षक के तौर पर भर्ती हुए सिंह एवं एक अन्य प्रोबेशनरी अधिकारी पर अंदरूनी जांच हुई थी जिसमें एक ट्रक से मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित पदार्थ को सिंह और एक अन्य उपनिरीक्षक ने बेच दिया था। उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का कदम उठाया गया था लेकिर महानिरीक्षक स्तर के एक अधिकारी ने मानवीय आधार पर उसे रोक दिया था और दोनों को विशेष अभियान समूह में भेज दिया गया था।

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