निकायों को वित्त आयोग की ग्रांट के लिए दिखाना होगा काम, सर्विस लेवल बेंचमार्क रिपोर्ट भी लगेगी; नगरीय निकायों की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होगी अनुदान राशि

 

फाइल फोटो

  • कर सुधार, प्रदूषण नियंत्रण, यूजर्स चार्जेस के नियमों के आधार पर दी जाएगी ग्रांट

नगरीय निकायों को मिलने वाली ग्रांट अब शर्तों के साथ ही मिलेगी। 15वें वित्त आयोग ने इसके लिए प्रावधान कड़े कर दिए हैं। इसमें कर सुधार, प्रदूषण नियंत्रण, यूजर्स चार्जेस के आधार पर निकायों को ग्रांट दी जाएगी। परफॉरमेंस के आधार पर ही यह निर्धारित होगी। साथ ही नगरीय निकायों को सर्विस लेवल बेंचमार्क की रिपोर्ट भी संचालनालय को भेजना होगी। पिछले वर्ष की रिपोर्ट नहीं मिलने पर दूसरी किस्त अटक सकती है।

अब तक वित्त आयोग से मिलने वाली ग्रांट में इतने कड़े प्रावधान नहीं थे। यदि अब निकायों ने शर्तों को पूरा नहीं किया, तो उन्हें इसकी दूसरी किस्त के बड़े हिस्से से हाथ धोना पड़ेगा। इसमें संपत्ति कर को कलेक्टर गाइडलाइन से जोड़ने की बात भी कही गई है। यूजर्स चार्जेस को इस तरह रखना है कि जो सेवा दी जा रही है, उसके ऑपरेशन और मैंटेनेंस (ओएंडएम) का खर्च उसी से निकल सके।

इन दोनों शर्तों के लिए नगरीय प्रशासन ने पिछले दिनों अधिनियम में संशोधन भी किए हैं। प्रॉपर्टी टैक्स को कलेक्टर गाइडलाइन से जोड़ दिया गया है, अगले वित्तीय वर्ष से उसी के अनुसार गणना होगी। इसी तरह यूजर्स चार्जेस के लिए भी नियम बना दिए गए हैं। दस लाख से ज्यादा आबादी वाले निकायों की एयर क्वालिटी के आधार पर दूसरी किस्त निर्भर करेगी।

हवा की गुणवत्ता में 5 प्रतिशत सुधार पर 100 प्रतिशत राशि रिलीज होगी, लेकिन एक प्रतिशत से कम सुधार पर कोई राशि नहीं मिलेगी। इसके लिए मापदंड में आने वाले चार नगर निगमों को 149.5 रुपए की दो किस्तों में कुल 299 करोड़ रुपए मिलेंगे।

1918 करोड़ की है ग्रांट
मप्र को वर्ष 2020-21 में 15वें वित्त आयोग से 1918 करोड़ रुपए का अनुदान मिलना है।

प्रदेश के बड़े नगर निगमों को मिलने वाली ग्रांट

299 करोड़.. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व सेनिटेशन में सुधार पर
दो किस्तों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व सेनिटेशन में सुधार के आधार पर 299 करोड़ रुपए की राशि मिलेगी। ये राशि केवल वाटर व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में सुधार लाने और स्टार रेटिंग के लिए ही खर्च की जा सकेगी। निकायों को परफॉरमेंस ग्रांट के लिए शर्तों का पालन करना होगा। पिछले दो साल की ऑडिट रिपोर्ट देनी होगी। पिछले वर्ष की अपेक्षा राजस्व बढ़ोतरी दर्शाना होगा। संपत्तिकर का लक्ष्य पूरा करना जरूरी होगा।

सर्विस लेवल बेंचमार्क के लिए भेजनी होगी 19-20 की रिपोर्ट
नगरीय प्रशसन ने निकायों से सर्विस लेवल बेंचमार्क की रिपोर्ट भी मांगी है। उन्हें वर्ष 2019-20 की रिपोर्ट भेजनी है। इसमें स्वच्छ भारत मिशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, पेयजल प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, जल निकासी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग आदि की जानकारी देना है। यदि यह बेंचमार्क के अनुरूप नहीं रहा, तो आयोग की दूसरी किस्त पर इसका असर पड़ेगा।

 

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