नवरात्रि से पहले चांदनी चौक में रौनक दिखनी शुरू पर खरीदारी उम्मीद से बेहद कम

दिल्ली: बाज़रों में एक बार फिर रौनक ज़रूर लौट आई है. लोगों की भीड़ अब दिखना शुरू हो गई है लेकिन क्या व्यापारियों का थोक में लाया गया सामान अभी बिक पा रहा है या नहीं?

 

सूट साड़ियों और लहंगों की दुकान अपर कोरोना वायरस की मार और व्यापार

 

सन 1920 से सूट और साड़ियों की दुकान का व्यापार करने वाले संजीव जैन बताते हैं कि उनकी दुकान मोहनलाल एंड सन्स पर करीब 90 सालों में अब तक इतने कम ग्राहक कभी नहीं रहे “हमारी दुकान भारत की आज़ादी से पहले की है और इतने कम कस्टमर कभी नहीं रहें.
कोरोना वायरस के बाद जब से दुकान खुली है, तब से फुट फॉल बढ़ा है लोग ज़्यादा आ रहें हैं लेकिन लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बहुत कम हो गई है. लोगों के पास नौकरियां नहीं हैं वो साड़ियां क्यों खरीदेंगे.”

 

चांदनी चौक मार्केट लहंगे और शादी के सुंदर कपड़ों के लिए भी मशहूर है, इस व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि “लोग नए वराइटी के कपड़े मांगते हैं लेकिन लॉकडाउन में नया काम हुआ ही नहीं है तो वराइटी कहां से आयेगी. कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन का असर भी अब दिख रहा है.”

 

पुरुषों के लिए कोट, पैंट, शर्ट की बिक्री पर क्या है असर

 

रेमंड की दुकान पर खाली बैठे नीरज जैन बताते हैं कि इस बार की तस्वीर बहुत अलग है. ग्राहक त्योहार होने के बावजूद कम आ रहें हैं, जो आ भी रहे हैं वो खरीदारी बहुत कम कर रहें हैं. पहले की तुलना में अब हमारी दुकान पर 10 प्रतिशत लोग भी नहीं आ रहें जिस वजह से हमने अपने सहायकों को भी कम कर दिया है.

 

दुकान पर खरीदारी करने पहुंचे ग्राहक रामलाल कहते हैं कि मै पांच शर्ट देख रहा हूं, लेकिन लूंगा सिर्फ एक शर्ट ही क्योंकि जितने पैसे बचे हैं उनको ध्यान से खर्च करना है.” मै एडवोकेट हूं, मेरा काम लगभग बंद है, क्लाइंट आ नहीं रहें हैं. पहले चांदनी चौक आते थे तो ढेर सारे कपड़े लेते थे, अब पैसे नहीं है”

 

ज्वेलरी

 

चांदनी चौक में आर्टिफिशियल ज्वेलरी का कारोबार भी अच्छा चलता है, अब नवरात्रों से पहले महिलाओं के साज संवरने की चीजें भी पहले के मुकाबले कम बिक रहीं हैं. ऐसी ही एक दुकान चलाने वाले भूरे यादव कहते हैं कि “खरीदारी बहुत कम है, पहले से दुकानदारी पर 50 प्रतिशत असर है. लोग चीजें बस देख कर चले जाते हैं. आने वाले दिनों में उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा.”

 

बर्तनों की दुकान पर कैसा चल रहा है कारोबार

 

नवरात्रों में जब कन्याओं को कंचक दी जाती है तो नए बर्तन में ही दी जाती है. इस वक़्त बर्तन बेचने वालों के कारोबार पर कोरोना वायरस की कितनी मार पड़ी है? कारोबारी राजेश कहते हैं कि 25 प्रतिशत तक मार्केट डाउन है. लोगों का बजट पहले से बहुत कम है इसलिए लोग रोजमर्रा कि चीजे जैसे ग्लास, कप, प्लेट, बच्चों के डब्बे इत्यादि ही खरीद रहे हैं. महंगे आइटम जैसे कि डिनर सेट, सजावटी जग और वास अब ना के बराबर बिक रहे हैं.

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