नया अनुभव: अनलॉक हुए हौसले और ऑनलाइन होंगे अब भगवान, डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा मंच

इस बार तो रामलीला मंचन देखने की भक्ति भावना अधिक तीव्रता से हिलोरें ले रही है। मन आप्लावित है। अभी कुछ माह पहले ही तो दूरदर्शन पर साढ़े तीन दशक पुरानी रामानंद सागर की ‘रामायण’ का पुन: प्रसारण देखा था। जिसेदेख ईश्वर के साक्षात प्रकट होने की अनुभूति हो उठी थी। तभी तो इतने लोगों ने ‘रामायण’ देखी थी कि दूरदर्शन के सारे रिकॉर्ड टूट गए थे। स्वाभाविक है, इस बार शारदीय नवरात्र में रामायण मंचन जीवंत देखने को मिलता तो सभी लोग आस्था-भाव से और अधिक विभोर हो उठते। धार्मिक गाथा बच्चे, वयस्क, बड़े-बूढ़ों को और पुलकित कर देती। आज महामारी के इस काल में मन व्यथित और बीमारी से सहमा है। भौतिक सुखों में लिप्त जिंदगी थमी हुई है। आने वाले कल की और अधिक चिंता है। ऐसे विपरीत हालातों में तो मानस मन को ईश्वरीय भक्ति भाव की और अधिक लालसा है। अब ऐसे में भला श्रीराम कैसे न आते, ऐसा कैसे हो जाता…वो श्रीराम जिनकी कथा अनंत है। उनकी इसी महिमा को ही दर्शाती हुई चौपाई है:

 

‘हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।’

यह बात अलग है कि इस समय काल में जब दुनिया हर चीज को अलग तरह से अनुभव कर रही है, तो श्रीराम भी भक्ति रस के साथ ऑनलाइन प्रकट होंगे। वैसे भी विपरीत परिस्थितियां ही तो आविष्कारों, कुछ नवीन कार्यों की जननी होती हैं। उसी तरह भक्ति रस आनंद का मंच भी बदल गया है।

ऑनलाइन दिखेगी प्रभु की लीला

 

दशकों से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला और दुर्गा पूजा का मंचन अब ऑनलाइन होने जा रहा है। इस बदलाव में कुछ अलग अनुभव भी होगा। न भीड़ होगी, न मेला, न झूला-झमेला। न मेले में कंधे से कंधे टकराने का डर और न ही चाट-पापड़ी का स्वाद। थोड़ी लालसा तो इन सुखों की भी है, लेकिन परिवार के साथ एकांत में बैठकर मंचन को ऑनलाइन देखना भी एक अलग अनुभव होगा। जरा सोचिए, दशकों से सिर्फ अपने घर के नजदीक में गली-मोहल्ले वाली, ज्यादा हुआ तो शहर की सबसे बड़ी रामलीला देखने ही जा पाते थे और इस बार आप देशभर में कहीं की भी रामलीला का ऑनलाइन मंचन देखने का अनुभव ले सकेंगे। यह बात तो है कि कठिन दौर सुखद अनुभव देना कभी नहीं भूलता। हां, प्रसारण एकदम लाइव नहीं, कुछ दिन बाद से शुरू होगा। टीवी, मोबाइल या लैपटॉप किसी पर भी सहजता से देख सकेंगे। सभी राज्यों में सीमित दर्शकों की संख्या व्यवस्था व कोरोना काल के नियमों को ध्यान में रखते हुए मंचन की सुविधा की गई है, लेकिन वहां मंचन के अलावा मनोरंजन साध्यों की कोई और व्यवस्था नहीं होगी।

 

अब दर्शक होंगे करोड़ों

वर्ष 2020 ऐतिहासिक घटनाओं की दृष्टि से खासा धनी बनता जा रहा है। विचलित कर देने वाली वैश्विक महामारी जैसी घटना भी हो रही है और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन होने जैसे सुखद पल भी मिल रहे हैं। शायद इसीलिए इस बार अयोध्या नगरी में रामलीला मंचन भी विशेष रूपरेखा के साथ हो रहा है। फिल्मी सितारे इस रामलीला में भागीदारी कर रहे हैं और खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। इस मंचन की भव्यता से भी अधिक रोमांचकारी है इसका प्रसारण, जो देश ही नहीं, दुनियाभर में होगा। दूरदर्शन व अन्य सेटेलाइट चैनलों पर ऐसा पहली बार होने जा रहा है। यहां हनुमान की भूमिका में अभिनेता विंदु दारा सिंह होंगे, अंगद की भूमिका में सांसद और फिल्म स्टार मनोज तिवारी, रवि किशन भरत, नारद की भूमिका में असरानी, अहिरावण होंगे रजा मुराद और रावण की भूमिका निभाएंगे शाहबाज खान। ये कलाकार वैसे तो कई वर्षों से रामलीला मंचन करते आए हैं, लेकिन इस बार चूंकि मंचन अयोध्या में है और ऑनलाइन प्रसारण भी होगा तो सभी खासे उत्साहित हैं। हर वर्ष दिल्ली में फिल्मी सितारों के साथ रामलीला आयोजित करने वाले अयोध्या रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सुभाष मलिक उर्फ बाबी की मानें तो इस बार अयोध्या की रामलीला को करोड़ों दर्शक एक साथ देख सकेंगे। ऑनलाइन प्रसारण को ध्यान में रखते हुए यह 14 भाषाओं में प्रसारित होगी।

 

कौतुहल भरा होगा मंचन

इस बार रामलीला प्रसारण में एक विशेषता और देखने को मिलेगी, वह है कोरोना संक्रमण के कारण बरती जाने वाली शारीरिक दूरी के बीच अभिनय। अब स्पर्श के माध्यम से भाव अभिव्यक्त करने वाले दृश्यों को भी सुरक्षा के नियमों को निभाते हुए पूरा किया जाने वाला है। अयोध्या की रामलीला हो या दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र की रामलीला, सभी जगह रामायण के अभिभूत करने वाले दृश्य मसलन चरण स्पर्श करना, भाइयों का स्नेह भाव में आलिंगन, सीता स्वयंवर के दौरान वरमाला आदि दृश्यों को मंचित करते वक्त शारीरिक दूरी का ख्याल रखा जाएगा। सुनिश्चित फासला रखते हुए इन दृश्यों को करते देखना बेहद कौतुहल भरा होगा। इसी तरह सुरक्षा को संज्ञान में रखते हुए इस बार एक ही कलाकार कई किरदार भी निभा रहे हैं।

 

अनलॉक हैं हौसले

श्रीराम भारतीय कला केंद्र की 77 वर्षीया निदेशक शोभा दीपक को एक माह पहले ही कोरोना संक्रमण ने जकड़ लिया था। वह कहती हैं, ‘मुझे भले ही इस बीमारी ने घेरा हुआ था लेकिन मेरी जिद थी कि परंपरा नहीं टूटने दूंगी। जिद के आगे जीत हुई और यह तो रामभक्ति की रीति है। हमारे कलाकारों ने समय से पहले ही जूम पर रिहर्सल करना शुरू कर दिया था। वैसे तो सभी आठ-दस साल पुराने कलाकार हैं लेकिन श्रीराम सेंटर की रामलीला हर बार एक नवोन्मेष के साथ मंचित होती है। इस बार भी मैं अपने से दो पीढ़ी पहले के रीति-रिवाजों, उनके ओढ़ने-पहनावे को रामलीला मंचन के माध्यम से जीवंत करने जा रही हूं। इस बार तो यूट्यूब पर लाइव देखने का नया अनुभव भी होगा।’

 

वैसे इस बार दिल्ली की अमूमन सभी बड़ी रामलीला कमेटी, चाहे वह धार्मिक रामलीला हो या नवश्री धार्मिक लीला, सभी पुरानी रामलीला का ही प्रसारण स्क्रीन पर करेंगे। इसी तरह फरीदाबाद, गुरुग्राम, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, मुरादाबाद, भोपाल, ओरछा, टीकमढ़ सरीखे तमाम शहर, जहां की रामलीला प्रचलित रही है, वहां अधिसंख्य पिछले वर्ष की रामलीला को ही बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगाकर और ऑनलाइन प्रसारित किया जाएगा। इसी तरह दुर्गा पूजा आयोजन भी ऑनलाइन प्रसारित किए जाने की तैयारी है।

 

हिंदी के अलावा अंग्रेजी, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, उर्दू, राजस्थानी, हरियाणवी, बांग्ला, उड़िया के साथ ही देवी सीता के जन्म स्थान मिथिला की भाषा मैथिली में भी रिकॉर्ड कर मंचन के बाद फेसबुक व यूट्यूब पर देखी जा सकेगी अयोध्या की रामलीला।

इस बार पहली सुखद अनुभूति तो रामनगरी की है और दूसरी यह कि करोड़ों दर्शक इस बार मंचन को प्रसारण के जरिए 14 भाषाओं में भी देख सकेंगे। यह वाकई हर्ष की बात है।

 

विंदु दारा सिंह

राम भक्ति की कृपा देखो, देश में महामारी के कारण ऐसे विपरीत हालातों में भी भक्ति की कैसी अद्भुत रसधार बहेगी। इस बार कोरोना काल में स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम सभी ने रिहर्सल भी कुछ अलग अंदाज में किए हैं। अब मंचन भी अलहदा होगा।

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