दूल्हा-दुल्हन को उपहार में मिले 5 दिल, 30 किडनी और 140 आंखें, फेरे से पहले ही कर दिया ये काम

विवाह एक पवित्र बंधन ही नहीं यह दो व्यक्तियों को दो परिवारों को एक साथ जोड़ता है। शादी में होने वाले रीति रिवाज सब कुछ विशेष होता है। शादी को धूमधाम के साथ एक उत्सव के रूप में आयोजित किया जाता है।वैसे तो शादी के दिन दूल्‍हा-दूल्‍हन को ढेरों उपहार मिलते हैं. कोई घड़ी देता है तो कोई फ्रीज, कोई गुलाब का बुके तो कोई रिंग. और आज के समय में शादी में गिफ्ट वगैरह देना आम बात है लेकिन पहले के वक्त में लोग पैसे अनाज आदि दिया करते थे| परन्तु आज जो खबर हम आपके लये लेकर आये हैं इस खबर से आपको न सिर्फ अचम्भित महसूस होगा बल्कि आपको ये थोडा अजीब भी लगेगा| इस शादी की अगर हम बात करे तो इसमें लोगों ने कुछ ऐसी चीज़ें भेट की जो के काफी अलग और अनोखी थी|

बात है एक संस्था विगत 8 वर्षों से कोटा संभाग में नैत्रदान-अंगदान-देहदान जागरूकता के लिये कार्य कर रही टिंकू की| इसी संस्था से जुड़े टिंकू ओझा का विवाह, ग्राम मुंडियर में सम्पन्न हुआ| और इस विवाह के सम्पन्न होने के बाद लोगों ने भेट स्वरूप कुछ ऐसी वस्तुए दी जिनका आम लोगों के लिए अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है|

विवाह से पूर्व ही सभी रिश्तेदारों व आने वाले मेहमानों को शादी के कार्ड के माध्यम से यह संदेश दिया था कि यदि आपको नव-दंपत्ति को कुछ उपहार ही देना है तो, अपना नेत्रदान-अंगदान-देहदान का संकल्प-पत्र भरकर दूल्हे-दुल्हन को भरकर सौंपे। जहां शहरी क्षेत्र के लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता का प्रतिशत बहुत कम है, वहां ग्रामीण क्षेत्र में नेत्रदान-अंगदान-देहदान की बात करने पर कई लोगों ने शादी में आने के लिये ही मना कर दिया.

उनको यह भी डर था कि कहीं ऐसा न हो कि संकल्प पत्र भरने के बाद नेत्रदान-अंगदान करना जरूरी ही हो जायेगा. लोगों की ऐसी सोच के कारण ऐसा लगने लगा था कि शादी का रंग कहीं फीका न पड़ जाये. इस पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के 5 सदस्यों की टीम मुंडियर गांव में पहुंची, उन्होंने शादी के एक दिन पहले से गांव के वृद्धजनों को साथ लेकर एक एक घर में जाकर नेत्रदान-अंगदान की उपयोगिता व जागरूकता के बारे में विस्तार से बताया.

शाम को संस्था द्वारा लगाये गये शिविर में गांव के सभी वर्ग के लोगों ने अंगदान के संकल्प पत्र भरे. करीब 35 से ज्यादा लोगों ने अंगदान,110 लोगों ने नेत्रदान व 3 वृद्ध जनों ने देहदान के लिये अपनी सहमति प्रदान की. बारातियों ने अपने रिश्तेदारों को भी इस ने कार्य के बारे में बताया तो वहाँ भी 30 लोगों ने अपने नैत्रदान के संकल्प पत्र भरे. दूल्हे टिंकू ओझा व दुल्हन तृप्ति ने समाज के 2000 से अधिक लोगों के बीच फेरे से पहले अंगदान का संकल्प पत्र भरा.

 

टिंकू का कहना था कि उनकी माँ विद्या देवी की मृत्यु के बाद उस दुखः के माहौल से यह नेक काम ही मुझे निकाल सका है. उनकी याद में यह काम में ताउम्र संस्था के साथ मिलकर करता रहूंगा. नयी दुल्हन तृप्ति को विवाह से पूर्व ही पता था कि उनके होने वाले पति नैत्रदान-अंगदान के क्षेत्र में काम कर रहे है,उनके इस काम से वह स्वयं भी खुश है। तृप्ति के माता पिता ने भी अपने बेटी दामाद के काम पर गर्व है| और साथ ही तृप्ति के घर में भी लोगों ने इस काम की तरफ सजगता दिखाई |

गौरतलब है की अंगदान एक महादान है। इसे दूसरे शब्दों में “जीवन के लिए उपहार” भी कहते हैं। यह करके हम कई लोगो को जीवनदान दे सकते है। आजकल कई सस्थायें अंगदान करने में मदद करती है, इसके लिए प्रोत्साहित करती हैं। आजकल गुर्दे, आँख, लीवर, ह्रदय, छोटी आंत, त्वचा के टिशु जैसे अंगो की बहुत मांग है। रोज देश में हजारो लोग दुर्घटना में मरते है जिनके अंगदान से दूसरे लोगो को जीवन मिलता है। जादातर निकाले गये अंगो का प्रत्यारोपण 6 से 72 घंटे के भीतर कर दिया जाता है। एक दाता 8 लोगो की जान बचा सकता है।

इस तरह से देखा जाये तो  ईश्वर ने हमे ऐसा अवसर दिया है कि अपनी मृत्यु के बाद भी अंगदान करके हम किसी दूसरे की मदद कर सकते हैं। अब आधुनिक चिकित्सा तकनीक हर दिन अंग प्रत्यारोपण में नई सफलता प्राप्त कर रही है। इसलिए हमे निस्वार्थ भाव से अंगदान करना चाहिये।

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