दुनिया में खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण, भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में 30 फीसदी बढ़ोतरी

नई दिल्ली : प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। इसे कम करने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो परिस्थितियां बद से बदतर हो सकती हैं। हालांकि, विभिन्न देश इसे लेकर कई कोशिशों में जुटे हैं, जिनमें भारत भी अपनी ओर से उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। भारत में सौर ऊर्जा में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2020 में वैश्विक स्तर पर बिजली का उत्पादन मामूली रूप से कम हुआ है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें कोविड-19 महामारी के साथ ही अक्षय ऊर्जा के स्रोतों जैसे पवन और सौर ऊर्जा का लगातार बढ़ना भी शामिल है। जलवायु थिंक टैंक एंबर के नए डाटा के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सौर और पवन ऊर्जा से बिजली के उत्पादन में क्रमश: 19 और 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

दुनिया के बड़े देशों में अक्षय ऊर्जा के स्रोतों को लेकर काफी काम हुआ है। चीन, रूस और अमेरिका में पवन और सौर ऊर्जा में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इस दिशा में सबसे बेहतरीन काम रूस में हुआ है। रूस में सौर ऊर्जा में 55 फीसद और पवन ऊर्जा में आश्चर्यजनक रूप से 236 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एंबर और ब्लूमबर्ग के अनुसार, पिछले पांच सालों में सौर और पवन ऊर्जा के स्रोतों से होने वाले बिजली उत्पादन में दो गुनी बढ़ोतरी हुई है, जबकि प्रत्येक वर्ष पैदा होने वाली पवन और सौर ऊर्जा का वैश्विक हिस्सा आमतौर पर एक फीसद से भी कम बढ़ा है।

 

हालांकि, 2020 में इसने उल्लेखनीय गति हासिल करते हुए तीन फीसद से अधिक की वृद्धि हासिल की है। पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि वैश्विक कोयला उत्पादन में हो रही लगातार कमी के साथ मेल खाती है। दुनियाभर के देश विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन से दूरी बना रहे हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि सौर और पवन ऊर्जा के नए स्रोतों के कारण जल्द ही इनसे बिजली का उत्पादन नए स्तर पर होगा। कोयला उत्पादन और बिजली के क्षेत्र में चीन दुनिया में अग्रणी है। इसके साथ ही अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी चीन तेजी से विकास कर रहा है। यहां सौर ऊर्जा में 15 फीसदी और पवन ऊर्जा में 11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वैश्विक स्तर पर कोयला उत्पादन में आठ फीसदी की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वहीं, सौर ऊर्जा में 19 और पवन ऊर्जा में 11 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। भारत ने भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, पवन ऊर्जा में एक फीसदी की कमी आई है। वहीं, कोयला उत्पादन में भी भारत में तीन फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

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