दावा: मिल गया वो ग्रह जिसपर मौजूद है पानी, NASA से जताया यकीन- इसपर जिंदगी पक्की है

लंबे समय से दुनिया के वैज्ञानिक ऐसे ग्रह की तलाश में है, जहां जिंदगी पॉसिबल हो। अभी तक मौजूद ग्रहों में ही वैज्ञानिक इसकी जांच कर रहे थे। कभी चाँद पर तो कभी मंगल पर जिंदगी की तलाश की जा रही थी। लेकिन अब कोरोना काल में साइंटिस्ट्स ने एक नए ग्रह को खोजने का दावा किया है, जिसपर जिंदगी हो सकती है। नासा ने एक नए डाटा के जरिये खुलासा किया है कि उन्हें एक ऐसा ग्रह मिला है, जिसपर जिंदगी पक्की है। ये ग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच है और इसपर एक झील भी है। साइंटिस्ट्स का दावा है कि झील का जो तापमान है, उसमें पक्का जिंदगी है। ऐसे में अब वैज्ञानिक जोर-शोर से इसे कन्फर्म करने में लग गए हैं।

नासा के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि  उन्हें वो ग्रह मिल गया है, जिसपर जिंदगी मौजूद है। इस ग्रह का नाम उन्होंने सेरेस बताया है। ये मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच मौजूद है। इसके नीचे एक गहरा झील पाया गया है।

<p>नासा के डॉन अंतरिक्ष यान द्वारा भेजी गई फोटिस में दिख रहा है कि 20 मिलियन साल पुराने इस गड्ढे के नीचे पानी है। इसे ओक्टेटर के रूप में जाना जाता है। और अनुमान लगाया जा रहा है कि 600 मील चौड़ी इस मिनी-दुनिया में किसी प्रकार के जीवन का घर हो सकता है। </p>

नासा के डॉन अंतरिक्ष यान द्वारा भेजी गई फोटिस में दिख रहा है कि 20 मिलियन साल पुराने इस गड्ढे के नीचे पानी है। इसे ओक्टेटर के रूप में जाना जाता है। और अनुमान लगाया जा रहा है कि 600 मील चौड़ी इस मिनी-दुनिया में किसी प्रकार के जीवन का घर हो सकता है।

<p>इस मिशन के उप प्रधान जांचकर्ता डॉ कैरोल रेमंड ने कहा: "इससे पता चलता है कि सेरेस एक समुद्री दुनिया है और हाल के दिनों में भूगर्भीय रूप से सक्रिय हो सकती है।"</p>

इस मिशन के उप प्रधान जांचकर्ता डॉ कैरोल रेमंड ने कहा: “इससे पता चलता है कि सेरेस एक समुद्री दुनिया है और हाल के दिनों में भूगर्भीय रूप से सक्रिय हो सकती है।”

<p>2012 से ही डॉन अंतरिक्ष यान इस ग्रह के चक्कर लगा रहा था। यह ग्रह 2015 से 2018 तक सेरेस की परिक्रमा करता रहा, जब तक इसका ईंधन खत्म नहीं हो गया। अब इसके द्वारा खींचे गए फोटोज सामने आए हैं। </p>

2012 से ही डॉन अंतरिक्ष यान इस ग्रह के चक्कर लगा रहा था। यह ग्रह 2015 से 2018 तक सेरेस की परिक्रमा करता रहा, जब तक इसका ईंधन खत्म नहीं हो गया। अब इसके द्वारा खींचे गए फोटोज सामने आए हैं।

<p>ईंधन खत्म होने के अंतिम कुछ महीनों में डॉन ने सतह से सिर्फ 20 मील की दूरी पर इस ग्रह को स्कैन किया था, इसमें क्रेटर पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसने बर्फीले ग्रह की  इमेजिंग, स्कैनिंग और गुरुत्वाकर्षण विश्लेषण किया। </p>

ईंधन खत्म होने के अंतिम कुछ महीनों में डॉन ने सतह से सिर्फ 20 मील की दूरी पर इस ग्रह को स्कैन किया था, इसमें क्रेटर पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसने बर्फीले ग्रह की  इमेजिंग, स्कैनिंग और गुरुत्वाकर्षण विश्लेषण किया।

<p>इसके ऑब्जरवेशन और नेचर एस्ट्रोनॉमी, नेचर जियोसाइंस और नेचर कम्युनिकेशंस सहित सात पेपर्स में प्रकाशित किया गया। <br />
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इसके ऑब्जरवेशन और नेचर एस्ट्रोनॉमी, नेचर जियोसाइंस और नेचर कम्युनिकेशंस सहित सात पेपर्स में प्रकाशित किया गया।

<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि इस झील का तापमान ऐसा है कि इसमें जिंदगी मौजूद होने की पूरी संभावना है। सेरेस ग्रह लगभग 600 मील चौड़ा है - यह एस्टेरॉइड बेल्ट में सबसे बड़ी वस्तु बनाता है।</p>

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस झील का तापमान ऐसा है कि इसमें जिंदगी मौजूद होने की पूरी संभावना है। सेरेस ग्रह लगभग 600 मील चौड़ा है – यह एस्टेरॉइड बेल्ट में सबसे बड़ी वस्तु बनाता है।

<p>यह सूर्य से पृथ्वी की तुलना में तीन गुना छोटा है - थोड़ी गर्मी महसूस करने के लिए पर्याप्त करीब, बर्फ को पिघलाने और सुधार करने की अनुमति देता है। यानी इसका तापमान जीवन के लिए परफेक्ट है। </p>

यह सूर्य से पृथ्वी की तुलना में तीन गुना छोटा है – थोड़ी गर्मी महसूस करने के लिए पर्याप्त करीब, बर्फ को पिघलाने और सुधार करने की अनुमति देता है। यानी इसका तापमान जीवन के लिए परफेक्ट है।

<p>अब इस झील की तस्वीर आने के बाद वैज्ञानिकों की उम्मीद बढ़ गई है कि जल्द ही उन्हें पृथ्वी के अलावा भी जीवन वाला ग्रह मिल जाएगा। </p>

अब इस झील की तस्वीर आने के बाद वैज्ञानिकों की उम्मीद बढ़ गई है कि जल्द ही उन्हें पृथ्वी के अलावा भी जीवन वाला ग्रह मिल जाएगा।

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