तीसरी लहर की ये है तैयारी:आईजीएमसी को छोड़ जिले में कहीं भी शुरू नहीं हुए वेंटिलेटर; ये कमी पड़ सकती है भारी

 

  • वेंटिलेटर लगाने के लिए जरूरी एनेस्थीसियाा डाॅक्टर भी नहीं, ये कमी पड़ सकती है भारी
  • दूसरी लहर में भी खाली आईसीयू बेड की कमी

काेराेना की दूसरी लहर अब कम हाेने लगी है। बीते कुछ दिनाें से मामलाें में लगातार कमी आ रही है, मगर अब दूसरी लहर के जाने के बाद काेराेना की तीसरी लहर का डर भी सताने लगा है। विशेषज्ञाें के अनुसार अगस्त तक तीसरी लहर आ सकती है। दावा यह भी किया जा रहा है कि तीसरी लहर में सबसे ज्यादा बच्चे इसकी चपेट में आने वाले हैं।

यदि ऐसा हाेता है ताे इससे निपटने के लिए विभाग के पास पुख्ता इंतजाम ही नहीं है। क्याेंकि जिलाभर में आईजीएमसी काे छाेड़कर अन्य सभी अस्पतालाें में एनेस्थीसिया चिकित्सकाें की कमी है। या ताे अस्पतालाें में चिकित्सक तैनात नहीं है, यदि है भी ताे वहां पर एक ही तैनात किए गए हैं जाे इमरजेंसी ऑपरेशन में ही सेवाएं दे पा रहे हैं।

लिहाजा अगर आईसीयू वेंटिलेटर बेड लगाने की जरूरत पड़ती है ताे बिना एनेस्थीसियाा चिकित्सक के बेड कैसे लगाए जाएंगे। क्याेंकि वेंटिलेटर पर जिन्हें भी रखा जाता है, उनकी लगातार निगरानी के लिए एनेस्थीसियाा चिकित्सक चाहिए हाेते हैं। वेंटिलेटर पर रखने से लेकर उन्हें वहां से हटाने तक के लिए एनेस्थीसिया चिकित्सक ही मरीज की पूरी देखभाल करते हैं।

काेराेना की दूसरी लहर में भी आईसीयू वेंटिलेटर बेड की भारी कमी रही। केवल आईजीएमसी में ही वेंटिलेटर बेड लगाए जा सके थे। यहां पर भी 38 बेड ही वेंटिलेटर वाले थे। यह बेड फुल हाे गए ताे यहां पर मरीजाें काे वेटिंग में रखा जाने लगा था। मरीजाें काे अगर आज वेंटिलेटर की जरूरत हाेती थी ताे भी उन्हें बेड के लिए उसके खाली हाेने का इंतजार करना पड़ा।

जिला शिमला के साथा-साथ प्रदेश के अन्य जिला से भी वेंटिलेटर के लिए मरीज यहीं पर रेफर किए जा रहे थे। जिला के अस्पतालाें में वेंटिलेटर की कमी नहीं है। मगर यहां पर वेंटिलेटर काे चलाने के लिए एनेस्थीसिया चिकित्सक ही माैजूद नहीं है। ऐसे में अगर किसी भी अस्पताल में मरीज की हालत बिगड़ती है ताे उसे आईजीएमसी के लिए ही रेफर करना पड़ेगा।

इसलिए जरूरी एनेस्थीसिया डॉक्टर

एनेस्थीसिया डाॅक्टर ही आईसीयू में मरीज काे वेंटिलेटर पर रखता है। वह बार-बार मरीज की सांसाें काे चेक करते हैं कि उसे किस लेवल की ऑक्सीजन चाहिए। यही नहीं मरीज काे आईसीयू पर रखने से हटाने तक के लिए एनेस्थीसिया चिकित्सक जरूरी हाेता है।

हालांकि एक आईसीयू बेड के साथ दाे नर्साें का हाेना जरूरी हाेता है ताकि वह मरीज की पल-पल की अपडेट लेती रहे। क्याेंकि मरीज काे आईसीयू में अगर काेई दिक्कत हाे जाए या ऑक्सीजन की कमी हाे ताे तुरंत हाे डाॅक्टराें काे इसकी जानकारी देती है। सामान्य मरीज खुद अपनी तकलीफ के बारे में बता देते हैं, जबकि आईसीयू में एडमिट मरीज स्वयं कुछ नहीं बाेल सकते।

एनेस्थीसिया डॉक्टर की कमी से, नहीं बने आईसीयू वार्ड

​​​​​ दूसरी लहर में एनेस्थीसिया चिकित्सक की कमी के कारण आईजीएमसी काे छाेड़ किसी भी अस्पताल में आईसीयू वार्ड नहीं बना पाए। आईसीयू विशेष वॉर्ड होता है, जहां गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज किया जाता है। काेराेना में ज्यादात्तर लाेग गंभीर हाे रहे हैं। आईसीयू में ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर समेत कई जरूरी उपकरण हाेते हैं।

काेराेना के दाैरान जब किसी मरीज की हालत गंभीर हाे जाती है ताे उसे आईसीयू में एडमिट करना पड़ता है। इसमें वेंटिलेटर का इस्तेमाल इसलिए होता है ताकि मरीज की सांसें चलती रहे। इसमें एक मास्क के जरिए ऑक्सीजन हल्के दबाव के साथ दी जाती है। गंभीर सर्जरी के बाद उनकी रिकवरी के लिए भी मरीजाें काे आईसीयू में रखा जाता है।

जिले में ये है एनेस्थीसिया के डॉक्टरों की स्थिति

आईजीएमसी अस्पताल में ही 13 एनेस्थीसिया चिकित्सक हैं। इसमें ओटी में छह चिकित्सक तैनात रहते हैं ताकि इमरजेंसी में सेवाएं दी जा। जबकि आईसीूय में एक और काेविड वार्ड में एक चिकित्सक तैनात है। जबकि कुछ चिकित्सक शिफ्टों में छुट्टी पर रहते है। वहीं एक चिकित्सक केएनएच अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।

डीडीयू में एक चिकित्सक तैनात है जाे इमरजेंसी में ऑपरेशन में चाहिए हाेते हैं। ठियाेग में एक चिकित्सक है, हालांकि अभी वह मेटरनिटी लीव पर हैं, मगर वह ऑपरेशन में चाहिए हाेते हैं। जबकि रामपुर, राेहड़ू और जुन्गा में चिकित्सक नहीं हैं।

यहां-यहां एडमिट होते हैं कोरोना के मरीज

मौजूदा समय में जिला शिमला में आईजीएमसी, डीडीयू, रोहड़ू अस्पताल, खनेरी अस्पताल, रामपुर, ठियोग, नेरवा, आयुर्वेदिक अस्पताल छोटा शिमला, मिलिट्री अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए बेड लगाए गए हैं। यहां पर करीब 700 बेड कोरोना मरीजों के लिए लगाए गए हैं, जिसमें केवल आईजीएमसी में 38 बेड आईसीयू वेंटिलेटर वाले हैं।

इसके अलावा रोहड़ू में 8 बेड जरूर हैं, मगर वहां एनेस्थीसिया डॉक्टर नहीं है। वहीं जिला में कई जगहों पर कोविड केयर सेंटर भी बनाए गए थे, जिसमें केवल कोरोना के उन्ही मरीजों को रखा जा रहा था जो होम आइसोलेशन में नहीं रह रहे थे।

 

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