तहसील और स्टेट की टॉपर रही बेटी का डॉक्टर बनने का सपना टूटा, एनईईटी में अच्छी रैंक नहीं आने से परेशान होकर फंदा लगाया

 

जगराओं की 18 वर्षीय मानसी की फाइल फोटो, जिसने एनईईटी में अच्छा रैंक नहीं मिलने के बाद तनाव में आत्महत्या कर ली।

  • 10वीं में पंजाब टॉपर थी जगराओं की गीता कॉलोनी निवासी मानसी, माता-पिता दोनों हैं शिक्षक
  • 12वीं में जगराओं तहसील में टॉप रही तो फिर तैयारी के लिए एक साल के गैप पर दी थी परीक्षा

एनईईटी का रिजल्ट जारी होने के बाद पंजाब के लुधियाना जिले के शिक्षक दंपती ने अपनी होनहार बिटिया को खो दिया। वह डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं कर पाई तो जिंदगी के सफर को खत्म कर गई। रविवार दोपहर बाद इस लड़की ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने पिता के बयान पर शव को मोर्चरी में भिजवा दिया है।

मृतक की पहचान जगराओं की 18 साल मानसी पुत्री जगदीश पाल के रूप में हुई है। उसके पिता जगदीश पाल शर्मा तथा माता कमल शर्मा दोनों सरकारी टीचर हैं। 9 साल का एक छोटा भाई है। रविवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे माता-पिता घर से नवरात्र के लिए कुछ सामान लेने बाजार गए थे। पीछे मानसी ने घर की दूसरी मंजिल पर अपने स्टडी रूम में जाकर पंखे के साथ फंदा लगाकर जान दे दी। जब उसके माता-पिता बाजार से लौटे तो उन्हें इस बात का पता चला।

उन्होंने पुलिस को सूचना दी तो थाना सिटी प्रभारी इंस्पेक्टर निधान सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि एसएचओ सिटी इंस्पेक्टर निधान सिंह ने बताया कि युवती का शव बरामद करके सिविल अस्पताल जगराओं में पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है। मानसी के पिता जगदीश पाल के बयान पर धारा 174 की कार्रवाई की गई है।

बेटी के द्वारा आत्महत्या का कदम उठा लिए जाने के बाद अस्पताल में बैठे पिता जगदीशा पाल।

बेटी के द्वारा आत्महत्या का कदम उठा लिए जाने के बाद अस्पताल में बैठे पिता जगदीशा पाल।

पिता ने बताया कि मानसी स्कूल स्तर पर हमेशा बोर्ड में टॉप करती रही। मैट्रिक में पंजाब में टॉपर रही , वहीं शहर के सम्मति विमल जैन स्कूल से 2017-2018 में 12वीं कक्षा में जगराओं तहसील में टॉपर थी। उसका सपना डॉक्टर बनने का था। उसने खूब मेहनत करके नेशनल एलिजिबिलटी कम एंट्रेंस टेस्ट दिया था। इसमें भी उसे हमेशा की तरह टॉप पर रहने की उम्मीद थी। हालांकि दो दिन पहले आए रिजल्ट ने उसके सपनों पर पानी फेर दिया। वह उम्मीद के अनुसार अंक हासिल नहीं कर पाई और उसका डॉक्टर बनने का सपना टूट गया।

परीक्षा के लिए डाला एक साल का गैप
मानसी को डॉक्टर बनने का इतना जुनून था कि उसने प्रवेश परीक्षा के लिए 12वीं कक्षा के बाद एक साल का गैप तक डाल दिया था। वजह थी 18 साल की आयुसीमा निर्धारित होना।

भास्कर अपील…

दैनिक भास्कर अपने पाठकों, खासकर छात्र वर्ग से यह अपील करता है कि एक अच्छी शिक्षा का मतलब मानसिक रूप से सबल बनना होता है। हमें सबल बनना है, दुर्बल नहीं। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इनसे हमें सीख लेनी चाहिए। असफलता यह बताती है कि हमें और कितनी ऊर्जा लगानी होगी अपनी मंजिल को पाने के लिए, सो हालात से सीखते हुए हमेशा सकारात्मक रहने की कोशिश करें।

 

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