तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर के फोटो पर विवाद:CBSE की बुक में भगवा वेशभूषा में दिखाया गया, विपक्षी बोले- उन्हें आर्य बताकर राजनीति कर रही भाजपा

 

राज्य के CBSE की 8वीं क्लास की हिंदी बुक में 'वासुकी का प्रश्न' शीर्षक वाला एक अध्याय है। इसमें संत-कवि तिरुवल्लुवर को गेरुवा वस्त्र, चोटी, जनेऊ, रुद्राक्ष और टीका लगाए दिखाया गया है। - Dainik Bhaskar

राज्य के CBSE की 8वीं क्लास की हिंदी बुक में ‘वासुकी का प्रश्न’ शीर्षक वाला एक अध्याय है। इसमें संत-कवि तिरुवल्लुवर को गेरुवा वस्त्र, चोटी, जनेऊ, रुद्राक्ष और टीका लगाए दिखाया गया है।

तमिलनाडु में CBSE की एक किताब में छपी तमिल के प्रसिद्ध संत-कवि तिरुवल्लुवर के फोटो (portrayal) को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राज्य के विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और पटाली मक्कल काची (PMK) ने इसे तिरुवल्लुवर का अपमान बताते हुए केंद्र की भाजपा सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा कवि-संत को एक विशेष धर्म का दिखाकर राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती है, जिसे राज्य कभी स्वीकार नहीं करेगा। तमिलनाडु में इस साल अप्रैल-मई में चुनाव होना है।

आखिर किताब में ऐसा क्या है?
दरअसल, राज्य में CBSE की 8वीं क्लास की हिंदी बुक में ‘वासुकी का प्रश्न’ शीर्षक वाला एक अध्याय है। इसमें संत-कवि तिरुवल्लुवर को गेरुवा वस्त्र धारण किए हुए दिखाया गया है। साथ ही सिर पर चोटी, गले में जनेऊ, रुद्राक्ष और टीका लगाए चित्रित किया गया है। उनकी वेशभूषा पूरी तरह से पंडितों की तरह दिखाई गई है।

विपक्ष को आपत्ति इसलिए…
DMK नेता एमके स्टालिन ने कहा कि तिरुवल्लुवर को आर्यों के पहनावे में चित्रित किया गया है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसा कर राजनीति कर रही है। तमिलनाडु, तमिल संस्कृति में इस तरह के दांव-पेचों की अनुमति नहीं देगा। भाजपा के इस कारनामे पर सत्ताधारी दल AIADMK मूकदर्शक बनी हुई है। वहीं, PMK नेता रामदास ने कहा तिरुवल्लुवर सभी के लिए समान हैं। उनका अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

PM हमेशा नाम लेते हैं, वित्त मंत्री ने बजट सत्र में की चर्चा
हर खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संत-कवि तिरुवल्लुवर की चर्चा करते रहते हैं। वे उनकी कविताओं का भी विशेष मौके पर उल्लेख करते हैं। नवंबर 2019 में थाइलैंड में प्रधानमंत्री मोदी ने तिरुवल्लुवर का लिखा तिरुक्कुरल का थाई संस्करण भी लॉन्च किया था।
हाल ही में बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनकी एक कविता का भाग पढ़कर उसे देश के राजा से जोड़ा था। पिछले बजट में सीतारमण ने आयुष्मान भारत योजना की चर्चा करते हुए तिरुवल्लुवर के विचारों से PM के काम की तारीफ की थी।

कौन हैं संत-कवि तिरुवल्लुवर?
तिरुवल्लुवर को तमिल का कबीर भी कहा जाता है। वे ऐसे कवि हैं, जिनके नाम, जन्म तिथि, स्थान, परिवार और धर्म के बारे में कुछ भी पक्का नहीं है। माना जाता है कि तिरुवल्लुवर 2 हजार साल पहले चेन्नई के मायलापुर में रहते थे। उनके विचार तमिलनाडु में इस कदर लोकप्रिय हैं कि युवा भी उनके विचारों से खुद को आसानी से जोड़ लेते हैं। यही कारण है कि राज्य के सभी राजनीतिक दल और धार्मिक गुरु उनकी विरासत पर अपना अधिकार जताते हैं। तमिल जानकारों के मुताबिक, तिरुक्कुरल तमिल समाज की समृद्धि का प्रतीक है। तिरुवल्लुवर का संदेश प्रकृति से प्रेरित था, न कि धर्म या भगवान से। उनके लिए प्रकृति ही सर्वोच्च और महत्वपूर्ण थी।

नवंबर 2019 में भाजपा के ट्वीट पर हो चुका है विवाद
तिरुवल्लुवर को लेकर नवंबर 2019 में उस समय विवाद उठ खड़ा हुआ, जब तमिलनाडु की BJP इकाई ने अपने ट्विटर हैंडल पर उनकी केसरिया वस्त्रों में एक फोटो ट्वीट की। जिसमें तिरुवल्लुवर के माथे पर उसी तरह चंदन या भष्म दिखाई गई, जैसे अन्य महात्माओं के चित्रों में दिखाई देती है।

तिरुवल्लुवर का नाम सबको भाया
19वीं शताब्दी में ब्रिटिश मिशनरी ने तिरुक्कुरल का ट्रांसलेशन इंग्लिश में कराया। द्रविड़ राजनीति के समय भी तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल को बढ़ावा मिला। द्रविड़ राजनीति के पुरोधा पेरियार ने भी इसे मान्यता दी और कई बार अपने भाषणों में इसकी तारीफ की। डीएमके ने तिरुक्कुरल के संदेशों को पब्लिक बसों पर लिखकर इनका प्रचार किया।

 

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