ठगों का नया अड्डा:लापता बच्चों को खोजने के लिए बनाया पोर्टल, ठग यहां से जानकारी लेकर परिजन से ऐंठ रहे पैसे, पुलिस भी शिकार हुई

फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

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  • गुमशुदगी की जानकारी जुटाकर पुलिस व परिजन से मांग रहे पैसे, बच्चे मिलने का दे रहे झांसा

लापता बच्चों की जानकारी देशभर की पुलिस को देने के लिए बनाया गया पोर्टल सीसीटीएनएस (अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली ) अब ठगी का अड्डा बनता जा रहा है। ठग यहां से गायब नाबालिगों की जानकारी जुटाकर परिजन से संपर्क करते हैं और घर पहुंचाने का झांसा देकर पैसे ऐंठ रहे हैं। जिले के एक थानेदार को भी ठगों ने बच्चे को सकुशल घर पहुंचाने के नाम पर ठग लिए। हालांकि अब पुलिस अमला सतर्क हो गया है।

ठगों ने मां को फोन कर 15 हजार रुपए मांगे
जिले के खुर्सीपार थाने में 14 फरवरी को जोन 2 निवासी महिला ने अपनी 14 वर्ष की बेटी के गुमने की शिकायत की। केस दर्ज होने के तीन दिन बाद ठग ने महिला को फोन लगायाा। महिला से कहा कि उसकी बेटी मिल गई है। बच्ची को सकुशल घर पहुंचाने के लिए 15 हजार रुपए की मांग की। परिजन ऑनलाइन पैसा देने के लिए तैयार हो गए। ठग ने महिला से पुलिस अधिकारी का भी नंबर लिया और उनसे भी पैसे मांगे।

पैसों की बात सुनकर पुलिस हो गई सतर्क
ठग ने पुलिस अधिकारी से पैसों की मांग तो वह सतर्क हो गए। अधिकारी ने ठग से कहा कि पहले बच्ची के बात कराओ फिर पैसे मिलेंगें। कुछ देर बाद ठग ने पुलिस अधिकारी से बच्ची से बात कराई। जांच में पता चला कि ठग हरियाणा से फोन लगा रहा है। लेकिन उसने बच्ची के मिलने की जानकारी पूना की दी थी। ठग ने बच्ची से पुलिस अधिकारी की बात भी कराई। लेकिन वह अपने परिवार के बारे में जानकारी नहीं दे पाई।

थानेदार हो चुके हैं ठगी के शिकार, 3000 वसूल लिए
जिले का एक थानेदार भी जालसाजों की झांसे में आकर ठगी का शिकार हो चुके हैं। लापता नाबालिग के मिलने की जानकारी देकर ठग ने थानेदार से संपर्क किया और ऑनलाइन पैसे जमा करने के लिए कहा। नाबालिग की दस्तयाबी के चक्कर में थानेदार ने ठग के खाते में 3 हजार रुपए जमा भी कर दिए। उनसे और भी पैसे की मांग की जा रही थी। इसके बाद अहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो गई है।

महिला संबंधी अपराध को केस सेंसेटिव का नियम
महिला संबंधी गंभीर अपराध को सीसीटीएनएस पर केस सेंसेटिव करने का नियम है। पुलिस छेड़छाड़, दुष्कर्म या नाबालिग बच्चियों के मामले में एफआईआर केस सैंसटिव कर देती है। इससे ऑनलाइन सिर्फ आईपीसी की धाराएं दिखती हैं। बाकी जानकारी नहीं मिल पाती। जिले में 21 फरवरी तक 31 केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें 21 मामले केस सैंसटिव हैं। बाकी 10 मामलों की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

 

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