टोहाना में किसानों और प्रशासन में बनी सहमति:2 किसानों को मिली जमानत, तीसरे की रिहाई व केस वापस लेने के आश्वासन पर धरना खत्म

 

टोहाना में धरने के मंच पर उपस्थित राकेश टिकैत, गुरनाम चढ़ूनी, जोगिंदर उगराहा और रघुवीर सिंह। - Dainik Bhaskar

टोहाना में धरने के मंच पर उपस्थित राकेश टिकैत, गुरनाम चढ़ूनी, जोगिंदर उगराहा और रघुवीर सिंह।

  • काले झंडे दिखाने तक ही सीमित होगा विरोध प्रदर्शन, हिंसा करने वालों का साथ नहीं देगा मोर्चा

टोहाना में 3 दिन से चल रहा किसानों का धरना सोमवार शाम को प्रशासन और किसानों में सहमति होने के बाद समाप्त हो गया। विधायक देवेंद्र बबली की कोठी का घेराव करने के दो आरोपियों विकास सिसर व रवि आजाद के रविवार देर रात जमानत पर रिहा हो गए। हत्या प्रयास के आरोपी मक्खन सिंह को जमानत पर रिहा करने के अलावा सभी केस वापस लेने के आश्वासन के बाद सोमवार शाम को किसान नेताओं ने धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया।

संयुक्त किसान मोर्चा की प्रशासन के साथ हुई करीब साढ़े तीन घंटे की बैठक में प्रशासन ने दर्ज मामले वापस लेने व तीनों किसानों को रिहा करने पर सहमति जताई तो संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव ने धरने के मंच से धरना खत्म करने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि टोहाना का आंदोलन दिल्ली आंदोलन को ऊर्जा देगा। यादव ने कहा कि यह छोटी सी जीत अवश्य है, परंतु सभी को मिलकर तब तक आंदोलन करना है, जब तक कि केंद्र सरकार तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती। इसके बाद किसान वापस जाना शुरू हाे गए।

इस दौरान मक्खन की जमानत की कार्रवाई शुरू कर दी गई, लेकिन अदालत में कार्रवाई पेंडिंग होने का पता चलने पर किसानों को दोबारा से बुलाकर धरने की तैयारी शुरू करने की भी चर्चा रही। टिकरी बॉर्डर पर सोमवार को भी धरना प्रदर्शन जारी रहा। दिनभर मुद्दा फतेहाबाद का टोहाना ही केंद्र रहा। किसान नेताओं ने सोमवार को किसानों में जोश भरते हुए कहा कि आंदोलन को मजबूत रखो सरकार अब झुकने वाली है।

संयुक्त मोर्चा ने टोहाना मामले को बताया किसानों की जीत, अब भाजपा-जजपा नेताओं के विरोध के तरीके में बदलाव का ऐलान

राजनीतिक कार्यक्रमों का ही किया जाएगा विरोध

संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार को भाजपा-जजपा के नेताओं के विरोध का तरीका बदलने का ऐलान किया है। अब केवल भाजपा व जजपा नेताओं के राजनीतिक कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा। भाजपा व जजपा के नेता यदि शादी, मौत, 13वीं या पारिवारिक समारोह में भाग लेने के लिए गांवों में जाते हैं तो उनका कोई विरोध नहीं होगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने इस फैसले को सभी संगठनों व हरियाणा की खाप पंचायतों को अवगत करा दिया है। विरोध प्रदर्शन भी केवल काले झंडे दिखाने तक ही सीमित होगा। यदि हिंसा व तोड़फोड़ की जाती है, तो फिर संयुक्त किसान मोर्चा कोई साथ नहीं देगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने जो नई गाइड लाइन घोषित की है। उससे हटकर विरोध करने वालों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा की कोई हमदर्दी नहीं होगी।

यह है नई गाइडलाइन

  • भाजपा व जजपा नेताओं के विरोध के ये कार्यक्रम केवल सरकारी या राजनैतिक आयोजन तक सीमित रहेंगे। किसी भी प्राइवेट आयोजन (जैसे शादी, तेहरवीं, पारिवारिक फंक्शन इत्यादि) में इन नेताओं और जनप्रतिनिधियों का विरोध नहीं किया जाएगा।
  • यह विरोध प्रदर्शन शांति पूर्वक तरीके से काले झंडे दिखाने, नारे लगाने आदि तक सीमित रहेगा। विरोध प्रदर्शन में हिंसा या तोड़-फोड़ के लिए कोई जगह नहीं है। हिंसा करने वालों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा नहीं रहेगा।
  • यदि संयुक्त किसान मोर्चा की गाइडलाइन की पालना नहीं की जाती तो विरोध करने वालों का इस किसान आंदोलन से कोई वास्ता नहीं रहेगा।

9 को मनाएंगे शहादत दिवस

संयुक्त किसान मोर्चा की जनरल बॉडी ने अपनी सभा में 9 जून को सिख योद्धा और खालसा सेना के कमांडर शहीद बंदा सिंह बहादुर की शहादत को आंदोलन स्थलों पर मनाने का फैसला किया है। शहीद बंदा सिंह बहादुर ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी।

पंजाब में खालसा शासन स्थापित करने के बाद बंदा सिंह बहादुर ने जमींदारी व्यवस्था को समाप्त कर दिया और किसानों को उनकी पर भूमि अधिकार दिया था। इधर, टिकरी बॉर्डर पर जगजीत सिंह दल्लेवाल प्रधान भाकियू सिद्धूपुर और संयुक्त किसान मोर्चा केंद्रीय कमेटी सदस्य ने किसानों को कहा कि जब हमें कोई किसान फोन करके पूछता है कि आंदोलन का कैसे चल रहा है और हम उसे यही बताते हैं कि हमारा आंदोलन चढ़दी कला में है।

ये रहा घटनाक्रम : संयुक्त किसान मोर्चे की मांग पर गिरफ्तार किसान रवि आजाद व विकास सीसर को रविवार देर रात साढ़े 12 बजे हिसार जेल से रिहा कर दिया गया था। इसके बाद किसान आरोपी मक्नख सिंह की रिहाई व तीनों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग पर अड़े हुए थे।

इसके लिए दोपहर डेढ़ बजे डीएसपी के कैंप ऑफिस में डीसी व एसपी के साथ किसान नेताओं गुरनाम सिंह चढ़ूनी, जोगेंद्र सिंह नैन, जोगेंद्र सिंह उगराहा, योगेंद्र यादव, युद्धवीर सिंह आदि की करीब 5 बजे तक बैठक चली। जिसमें प्रशासन ने किसानों की सभी बातों को मान लिया।

इस बारे में योगेंद्र यादव ने बताया कि किसान मोर्चे ने उन दोनों की जमानत नहीं करवाई, लेकिन सरकार व प्रशासन ने स्वयं ही उनकी जमानत करवाकर आधी रात को जेल के दरवाजे खोल कर उन्हें रिहा कर दिया।

 

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