जाने विश्व के सबसे बडे़ मन्दिर अंकोरवाट के बारे में

 

 

 

अंकोरवाट मंदिर मेरु पर्वत का भी प्रतीक है इसकी दीवारों पर भारतीय धर्म  ग्रंथ के प्रसंगों का चित्रण है।विश्व के सबसेलोकप्रिय पर्यटन स्थानों में शामिल होने के

 

साथ-साथ यह यूनेस्को की  विश्व धरोहरों की सूची में भी शामिल है।वर्तमान में अंगकोरथोम एक विशाल नगर का खंडहर है।उसके चारों और 330 मीटर चौड़ी एक खाई जो हमेशा जल्द से भरी रहती थी।नगर और खाई के बीच एक विशाल वर्गाकार प्राचीर जो नगर की रक्षा करती है।प्राचीर में अनेकों भव्य द्वारा बने हैं। महात्मा रो के ऊंचे शिखरों को त्रिशीर्ष दिग्गज अपने मस्तक पर उठाए खड़े हैं। विभिन्न द्वारो से विभिन्न राजपत नगर के मध्य में

 

 

पहुंचते हैं। विभिन्न आकृतियों वाले धरोहरों के खंडहर आज भी अपनी जी जीवितअवस्था में निर्माणकर्ता की प्रशस्ति गीत गाते हैं।नगर के ठीक बीचो बीच शिव का एक विशाल मंदिर है।इसके तीन भाग हैं प्रत्येक भाग में एक ऊंचा शिखर है।मध्य शिखर की ऊंचाई लगभग 150 फीट है।ऐसे शिखरों के चारों और करीब 50 छोटे छोटे शिखर बने हैं।इन शिखर के चारो और समाधिअस्त शिव की मूर्तियां भी स्थित है।मंदिर की विशालता और निर्माण कला आश्चर्यजनक है।

 

उसकी दीवारों को पशु ,पक्षी , पुस्प और नृत्यांगना  की विभिन्न आकृतियों से निर्मित किया गया है।इस मंदिर का निर्माण काल सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारंभ किया था। परंतु वे इसे पूर्ण नहीं कर सके।मंदिर का बाकी कार्य उनके भांजे और उनके उत्तराधिकारी धरनींद्र बर्मन के काल में पूरा किया गया।मिस्र एवम् मेक्सिको के स्टेप पिरामिडों की तरह सीढ़ी पर उठता गया है।इसका मूल शिखर लगभग 64 मीटर मीटर ऊंचा है।इसके अतिरिक्त अन्य सभी शिखर लगभग 54 मीटर मीटर ऊंची है।मंदिर 3.50 किलोमीटर पत्थर की दीवार से घिरा हुआ था।उसके बाहर 30 मीटर खुली भूमि है।दक्षिण पश्चिम में स्थित ग्रंथआलय के साथ इस मंदिर में तीन वीथीयां हैं।अंदर वाली अधिक ऊंचाई पर है।मंदिर की दीवारों पर समस्त रामायण मूर्तियों के रूप में निर्मित है।इस तरह पूरा नगर राम और उनके नीचे छवियों से चित्रित है।

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