जानें इस स्कीम में निवेश से क्या है फायदा, पीएम मोदी ने भी इसमें लगाए हैं पैसे

आज निवेश के कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में आम तौर पर लोग निवेश करते हैं। लेकिन अब इनमें ज्यादा रिटर्न नहीं मिल पा रहा है। नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) भी भारत सरकार की एक स्कीम है, जो छोटी बचत का निवेश करने के बेहतर विकल्प है। इसके अलावा, टैक्स सेविंग बॉन्ड (Tax Saving Bond) को भी निवेश के लिए एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यह उन लोगों के लिए बढ़िया है, जो एफडी या आरडी से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। इसमें जमा राशि जहां लंबी अवधि में बढ़ती रहती है, वहीं टैक्स पर भी लाभ मिलता है। इस स्कीम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी निवेश कर रखा है। जानें इस योजना के बारे में।

टैक्स फ्री बॉन्ड से है अलग
शेयर बाजार में सीधे पैसा लगाने की जगह इस बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। बॉन्ड की 2 पॉपुलर कैटेगरी में टैक्स फ्री बॉन्ड और टैक्स सेविंग बॉन्ड आते हैं। बहुत से लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इन दोनों में फर्क है।
(फाइल फोटो)

<p><strong>कितने निवेश पर टैक्स में लाभ</strong><br />
टैक्स सेविंग बॉन्ड के मामले में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCF के तहत टैक्स बेनिफिट मूल राशि पर मिलता है, जो इन बॉन्ड्स में निवेश की जाती है। इसमें निवेशक को 20,000 रुपए तक के निवेश पर टैक्स में छूट का लाभ मिलता है।&nbsp;<br />
(फाइल फोटो)<br />
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कितने निवेश पर टैक्स में लाभ
टैक्स सेविंग बॉन्ड के मामले में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCF के तहत टैक्स बेनिफिट मूल राशि पर मिलता है, जो इन बॉन्ड्स में निवेश की जाती है। इसमें निवेशक को 20,000 रुपए तक के निवेश पर टैक्स में छूट का लाभ मिलता है।
(फाइल फोटो)

<p><strong>क्या है टैक्स फ्री बॉन्ड</strong><br />
टैक्स फ्री बान्ड में ब्याज के रूप में होने वाली आय पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। इस बॉन्ड में निवेश पर होने वाली आय पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होता, जबकि टैक्स सेविंग बॉन्ड के ब्याज पर टैक्स लगता है।<br />
(फाइल फोटो)</p>

क्या है टैक्स फ्री बॉन्ड
टैक्स फ्री बान्ड में ब्याज के रूप में होने वाली आय पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। इस बॉन्ड में निवेश पर होने वाली आय पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होता, जबकि टैक्स सेविंग बॉन्ड के ब्याज पर टैक्स लगता है।
(फाइल फोटो)

<p><strong>लॉक इन पीरियड</strong><br />
टैक्स सेविंग बॉन्ड पर लॉक इन पीरियड आम तौर पर कम से कम 5 साल का होता है। वहीं, कुछ पर इससे ज्यादा लॉक इन पीरियड होता है। जाहिर है कि यह मिड टर्म से लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर बढ़िया होता है।<br />
(फाइल फोटो)<br />
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लॉक इन पीरियड
टैक्स सेविंग बॉन्ड पर लॉक इन पीरियड आम तौर पर कम से कम 5 साल का होता है। वहीं, कुछ पर इससे ज्यादा लॉक इन पीरियड होता है। जाहिर है कि यह मिड टर्म से लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर बढ़िया होता है।
(फाइल फोटो)

<p><strong>किसके लिए बेहतर</strong><br />
टैक्स फ्री बॉन्ड उन लोगों के लिए बेहतर है, जो ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। इसमें कम रिस्क पर सुरक्षित रिटर्न मिलता है। हालांकि, इसमें टैक्स फ्री बॉन्ड की तुलना में रिटर्न कुछ कम होता है। वहीं, इसका फायदा यह है कि इसकी रेटिंग दूसरे बॉन्ड की तुलना में बेहतर होती है। इस पर स्थिर और सुरक्षित रिटर्न मिलता है।<br />
(फाइल फोटो)</p>

किसके लिए बेहतर
टैक्स फ्री बॉन्ड उन लोगों के लिए बेहतर है, जो ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। इसमें कम रिस्क पर सुरक्षित रिटर्न मिलता है। हालांकि, इसमें टैक्स फ्री बॉन्ड की तुलना में रिटर्न कुछ कम होता है। वहीं, इसका फायदा यह है कि इसकी रेटिंग दूसरे बॉन्ड की तुलना में बेहतर होती है। इस पर स्थिर और सुरक्षित रिटर्न मिलता है।
(फाइल फोटो)

<p><strong>बेहतर लिक्विडिटी</strong><br />
टैक्स सेविंग बॉन्ड ज्यादा लिक्विडिटी मिलती है। कीमत बढ़ने पर इन्हें बेचा जा सकता है। ये एक्सचेंज पर ट्रेड करते हैं। टैक्स सेविंग बॉन्ड पर ब्याज दर सरकारी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज की दरों पर आधारित होती है। मौजूदा समय में यह दर बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा है।<br />
(फाइल फोटो)</p>

बेहतर लिक्विडिटी
टैक्स सेविंग बॉन्ड ज्यादा लिक्विडिटी मिलती है। कीमत बढ़ने पर इन्हें बेचा जा सकता है। ये एक्सचेंज पर ट्रेड करते हैं। टैक्स सेविंग बॉन्ड पर ब्याज दर सरकारी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज की दरों पर आधारित होती है। मौजूदा समय में यह दर बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा है।
(फाइल फोटो)

<p><strong>दूसरी खासियतें</strong><br />
इसमें निवेश में रिस्क नहीं के बराबर होता है। यह उनके लिए बेहतर है, जिन्होंने तुरंत निवेश करना शुरू किया है। इसमें निवेशक कम्युलेटिव और नॉन कम्युलेटिव ऑप्शन चुन सकते हैं। इसमें ब्याज दरें स्माल सेविंग्स स्कीम्स के मुकाबले ज्यादा होती हैं। इसमें निवेश के लिए अधिकतम कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। साथ ही, बॉन्ड की मेच्योरिटी पीरियड को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके जरिए एक वित्त वर्ष में 20 हजार रुपए तक टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है।<br />
(फाइल फोटो)<br />
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दूसरी खासियतें
इसमें निवेश में रिस्क नहीं के बराबर होता है। यह उनके लिए बेहतर है, जिन्होंने तुरंत निवेश करना शुरू किया है। इसमें निवेशक कम्युलेटिव और नॉन कम्युलेटिव ऑप्शन चुन सकते हैं। इसमें ब्याज दरें स्माल सेविंग्स स्कीम्स के मुकाबले ज्यादा होती हैं। इसमें निवेश के लिए अधिकतम कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। साथ ही, बॉन्ड की मेच्योरिटी पीरियड को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके जरिए एक वित्त वर्ष में 20 हजार रुपए तक टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है।

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