जादू वादु कुछ नहीं होता है।

“यह मछुआरा मुझे कहां लिए जा रहा है? जाल में फंसी हुई छोटी मछली सोच रही थी। पानी के बिना उसकी हालत बिगड़ गई थी  और उसका दम घुटा जा रहा था। और छोटी मछली का नाम सिल्की था। वह अभी अभी रहमू मछुआरे के जाल में फंसी थी। रहमू समुद्री तट पर मछली पकड़ता था। आज भी उसने मछली पकड़ने के लिए जाल बिछाया था। परंतु बहुत देर इंतजार करने के बाद भी सिर्फ एक छोटी सी मछली ही उसके जाल में फंसी थी। सिल्की यह सोच रही थी। रहमू ने उस मछली को पानी से भरी बाल्टी में छोड़ दिया। रहमू सोच रहा था यह मछली बहुत छोटी सी है और बहुत सुंदर है। मैं इसे लेकर जाकर मेरे घर के पास वाले पोखर में छोड़ दूंगा। इस तरह सिल्की समुद्र से निकलकर पोखर में पहुंच गई। सिल्की ने सोचा,”कहाँ एक विशाल समुद्र और उसके अंदर भांति भांति के जीव और कहाँ यह छोटा से कीचड़ से भरा पोखर। यहाँ मैं कैसे रहूँगी,यह तो भगवान का लाख-लाख शुक्र है उसने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं दोनों तरह के पानी में रह सकती हूँ। सिल्की ने धीरे धीरे से छोटे से मीठे पानी के तालाब के अनुकूल ढाल लिया।परंतु फिर भी अभी तक का उसका यहां मन नहीं लग रहा था। क्योंकि उसका यहाँ कोई दोस्त नहीं बना था। एक दिन सिल्की रोज की तरह कुछ अनमनी सी तालाब के किनारे तैर रही थी।उसे तालाब के पास एक बड़े पत्थर पर विचित्र सा जीव बैठा दिखाई दिया। सिल्की उसके पास गई और बोली,”तुम कौन हो,मैंने तुम्हारे जैसा जीव पहले कभी नहीं देखा।  वह जीव कोई और नहीं,फुदकू मेंढक था। वह मेंढक बोला,”तुमने नहीं देखा,मैं क्या करूं। मैं तो सदियों से इस दुनिया में हूँ। फुदकू मेंढक नाम है मेरा। तुम समुद्र से आई हो। उसमें खारा पानी होता है,मुझे खारा पानी पसंद नहीं। इसलिए मैं वहां नहीं रहता। मैं तो मीठे पानी के आस पास ही रहता हूँ।” ‘फुदकू भैया! तुमसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। मैं यहां काफी अकेलापन महसूस कर रही थी। पहले मैं समुद्र में रहती थी वहां तो मेरे कई दोस्त थे। “क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे। सिल्की ने कहा”।फुदकू मेंढक बहुत घमंडी था। सिल्की की बात सुनकर  फुदकू मेंढक बोला,”मैं इतनी जल्दी किसी से मित्रता नहीं करता। पहले मैं तुम्हें जानूँगा,परखुंगा फिर मैं तुम्हें अपना मित्र बनाउंगा।” “ठीक है, सिल्की ने कहा”। फिर सिल्की ने हैरानी से कहा, “तुम इतनी देर से इस पत्थर पर बैठे हो, क्या तुम पानी से बाहर ही रहते हो,मैं तो पानी के बिना ज्यादा देर जिंदा नहीं रह सकती।” फुदकू मेंढक गर्दन टेढ़ी करके बोला,”ये तो मेरे जादू का कमाल है अपने जादू से मैं पानी के अंदर भी रह सकता हूं और बाहर भी।” यह कहकर वह खुद तो तुरंत पत्थर से कूद कर पानी में चला गया। सिल्की हैरान थी। वह फुदकू से बहुत प्रभावित हुई और फुदकू के पानी से बाहर निकलने पर बोली,” फुदकू भैया यह तो कमाल है,क्या तुम मुझे भी यह जादू सिखा दोगे ताकि मैं भी कभी-कभी बाहर की हवा खाने उस पत्थर पर जाकर बैठ जाया करूँ।” सिल्की की यह बात सुनकर फुदकू अकड़ कर बोला,”नहीं तुम्हारे बस की नहीं है यह जादू सीखना।इसलिए मैं तुम्हें यह जादू नहीं सीखा पाऊंगा।” यह कहकर फुदकू वहां से चला गया।  फुदकू की बातें सुनकर सिल्की पहले से भी ज्यादा उदास हो गई। अनमनी से होकर वह घूमने लगी कि उसने देखा वहां एक और जीव आया है, उसकी आकृति भी कुछ-कुछ फुदकू मेंढक जैसी थी। बस आकर में कुछ छोटा था और वह भी तो पानी से बाहर एक पत्थर पर बैठा था।”लगता है यह एक छोटा मेंढक भी यह भी जादू जानता है, सिल्की ने सोचा”। उसके पास जाकर वह बोली, “छोटे मेंढक भैया! क्या तुम भी फुदकू की तरह जादू जानते हो।  सिल्की की आवाज सुनकर छुटकू मेंढक ने पूछा,कौन जादू।”सिल्की ने पूरी बात बतायी। छुटकू मेंढक हँसने लगा और बोला तुम भी किसकी बातों की.में आ गई,फुदकू मेंढक को एक नम्बर का झूठा और अकड़ू है। अरे! यह तो भगवान ने हमें ऐसा बनाया है कि हम जल और थल दोनों में ही रह सकते हैं।” सिल्की  ज्यादा हैरान हो गई। छुटकू मेंढक ने कहा, देखो तुम जानती हो कि हमें जीने के लिए सांस ऑक्सीजन से मिलती है। सिल्की ने कहा,”हां पता है, मैं भी सांस लेती हूं मेरी मां ने बताया कि हम मछलियाँ गलफड़ों से सांस लेती हैं जो पानी में घुलीऑक्सीजन का उपयोग कर सकते हैं। छुटकू मेंढक ने कहा,”बिल्कुल ठीक,पर तुम्हारे फेफड़े नहीं होते। जिस वजह से तुम धरती पर साँस नहीं ले सकतीं। पर हम मेढकों के फेफड़े होते हैं,जिस वजह से हम धरती पर साँस ले सकते हैं।” “अरे वाह,लेकिन तुम्हारे भी गलफड़े होते होंगे। जिस वजह से तुम धरती पानी में भी साँस ले सकते हो।”सिल्की ने उत्सुकता से पूछा। छुटुकू मेंढक बोला, “जब हम बहुत छोटे बच्चे होते हैं यानि टैडपोल होते हैं तो हमारे शरीर के अंदरूनी भाग में गलपड़े होते हैं, परंतु बड़े होने पर यह लुप्त हो जाते हैं। और हम जब पानी में रहते हैं तो हम हमारी त्वचा पर छोटे-छोटे छिद्रों द्वारा सांस लेते हैं वही हमारी पानी में रहने मदद करते हैं। इस तरह हम मेंढक किसी जादू-वादू द्वारा नहीं बल्कि प्रकृति के वरदान से जल थल दोनों जगह सकते हैं। “काश! मैं भी दोनों जगह रह सकती सिल्की ने ठंडी सांस भरकर कहा।” उदास मत हो सिल्की तुम पानी में तैरती हुई बहुत सुंदर लगती हो,तुम्हें प्रकृति ने अलग तरह का बनाया है,तुम्हें उसी में खुश रहना चाहिय। आगे से कभी भी अपने रंग रूप आदि को लेकर उदास मत रहना।” “ठीक है मैं सदा खुश रहूँगी,क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?सिल्की ने कहा””हां,क्यों नहीं चलो हम मिलकर कोई खेल खेलते हैं छुटुकू ने कहा।” यह सुनकर  सिल्की बहुत खुश हो गई और बहुत देर तक छुटकू के साथ खेलती रही।

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