छात्रवृत्ति घोटाला: झारखंड सरकार ने उठाया बड़ा कदम, स्कूलों-आवेदकों की ऐसे होगी पहचान

झारखंड में केंद्रीय छात्रवृत्ति योजना में बड़ा घोटाला (Scholarship scam) सामने आने के बाद इसकी जांच चल रही है और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इस बीच प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) ने अपने अधिकारियों को स्कूलों और आवेदकों का “भौतिक रूप से सत्यापन” करने का आदेश दिया है, जो 2020-21 की छात्रवृत्ति लेने के इच्छुक हैं. इस संबंध में 19 नवंबर को एक पत्र सभी उपायुक्तों को भेजा गया. साथ ही साथ यह भी निर्देश दिया है कि “पिछले वर्षों” में फर्जी लाभार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति की वसूली के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं.

द इंडियन एक्सप्रेस ने छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश करते हुए रिपोर्ट छापा थी, जिसके बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई थी. छात्रवृत्ति के पैसे निकालने के लिए बिचौलियों, बैंक कर्मचारियों, स्कूल अधिकारियों और राज्य सरकार के कर्मचारियों की सांठगांठ सामने आई थी. रिपोर्ट में दावाा किया गया था कि स्कूलों ने आंकड़ों को लेकर हेराफेरी की है और तो और छात्रों को अल्पसंख्यक दिखाने के लिए धर्म को भी बदला गया. यही वजह है कि राज्य सरकार ने “अनियमितताओं और गबन की पुनरावृत्ति” को रोकने के लिए भौतिक सत्यापन की आवश्यकता को जरूरी बताया है.

 

केंद्र सरकार ने दिए थे 61 करोड़ रुपये

झारखंड सरकार का ताजा फैसला इस वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि छात्रवृत्ति योजना का संचालन करने वाले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने भौतिक सत्यापन अनिवार्य नहीं किया है. केंद्र ने 2019-20 के दौरान प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए झारखंड को 61 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, छात्रवृत्ति कि लिए 2 लाख से अधिक छात्रों ने आवेदन किया था और 84,000 से अधिक को छात्रवृत्ति मिली थी.

राज्य सरकार के नाक के नीचे होता रहा घोटाला

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले महीने 6 जिलों में 15 स्कूलों के रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें पाया गया था कि उपयोगकर्ता के आईडी और पासवर्ड चुराने के लिए बैंक कोरेस्पोंडेंट, एजेंटों और स्कूल स्टाफ ने धोखाधड़ी की. एक छात्रवृत्ति मिलने से पहले आवेदक की जांचें की जाती हैं, जिसमें स्कूल, छात्र और अभिभावक का आधार आईडी, फिंगरप्रिंट, बैंक खाता शामिल होता है. इसके बावजूद भी यह सब जिला, राज्य और केंद्र के अधिकारियों की नाक के नीचे होता रहा.

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