चीन पर नजर रखने की तैयारी:ITBP के DG बोले- LAC से पीछे हटने का समझौता सेनाओं के बीच, हम पेट्रोलिंग जारी रखेंगे

भारत-चीन के बीच बॉर्डर इलाकों की साफतौर पर पहचान नहीं है। ऐसा ही एक इलाका है पूर्वी लद्दाख का पैंगॉन्ग लेक एरिया। दोनों देशों की सेना यहां नावों से पेट्रोलिंग करती है। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

भारत-चीन के बीच बॉर्डर इलाकों की साफतौर पर पहचान नहीं है। ऐसा ही एक इलाका है पूर्वी लद्दाख का पैंगॉन्ग लेक एरिया। दोनों देशों की सेना यहां नावों से पेट्रोलिंग करती है। (फाइल फोटो)

इंडो-तिब्बत पुलिस फोर्स (ITBP) भारत-चीन बॉर्डर पर पेट्रोलिंग को और मजबूत करने की तैयारी में है। फोर्स के डायरेक्टर जनरल सुरजीत सिंह देसवाल ने बताया कि शॉर्ट और लॉन्ग-रेंज पेट्रोलिंग बढ़ाने की योजना बन रही है। फिलहाल भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों से डिसएंगेजमेंट के लिए सहमत हो गई हैं। पिछले साल जैसी यथास्थिति बनाने के लिए दोनों देशों ने अपने सैनिकों को पीछे हटाना शुरू भी कर दिया है।

बॉर्डर पर पेट्रोलिंग जारी रखेंगे : ITBP
देसवाल ने कहा कि हम बॉर्डर पर पेट्रोलिंग करना जारी रखेंगे। इसमें शॉर्ट और लॉन्ग-रेंज पेट्रोलिंग भी शामिल है। हमारे सभी बॉर्डर आउट पोस्ट्स (BOPs) पर पिछले साल से ही पूरी तरह तैनाती की गई है। पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाएगा।

सेना का हमें पूरा समर्थन : देसवाल
उन्होंने कहा कि बॉर्डर मैनेजमेंट का काम ITBP को सौंपा गया है और भारतीय सेना भी द्विपक्षीय समझौते के मुताबिक फोर्स का पूरा सपोर्ट कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बॉर्डर मैनेजमेंट के बारे में मैंडेट ITBP को दिया है और सेना हमारे साथ काम कर रही है। बॉर्डर पर जारी डिसएंगेजमेंट दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुआ है। हम अपना काम जारी रखेंगे।

मई से ही दोनों देशों के बीच तनाव था
भारत-चीन के बीच पिछले साल मई से तनाव था। 15 जून को यह तब चरम पर जा पहुंचा, जब भारतीय इलाके में घुसी चीनी सेना को रोकने की कोशिश में गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष हो गया। यही नहीं, अगस्त-सितंबर में 45 साल बाद भारत-चीन सीमा पर गोलियां चलीं।

लद्दाख में सबसे विवादित इलाका है पैंगॉन्ग लेक
भारत-चीन के बीच बॉर्डर इलाकों की साफतौर पर पहचान नहीं है। इसी वजह से सीमा पर तनाव रहता है। ऐसा ही एक इलाका है पूर्वी लद्दाख का पैंगॉन्ग लेक एरिया। यह कोई छोटी झील नहीं है। 14 हजार 270 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस झील का इलाका लद्दाख से लेकर तिब्बत तक फैला हुआ है। झील 134 किलोमीटर लंबी है। कहीं-कहीं 5 किलोमीटर तक चौड़ी भी है। दोनों देशों की सेना यहां नावों से पेट्रोलिंग करती है।

झील के बीच से गुजरती है LAC
इस झील के बीच से भारत-चीन की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC गुजरती है। झील के दो-तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। बाकी भारत के हिस्से आता है। इसी वजह से यहां अक्सर तनाव पैदा होते रहते हैं। झील किनारे की दुर्गम पहाड़ियां आगे की ओर निकली हुई हैं, जिन्हें फिंगर एरिया कहा जाता है। ऐसे 8 फिंगर एरिया हैं, जहां भारत-चीन सेना की तैनाती है। गलवान की झड़प के बाद चीन ने बड़ी तादाद में इन इलाकों में जवानों की तैनाती कर ली थी। भारत ने भी यहां सेना की तैनाती की।

चीन का भारत की 43 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा
रक्षा मंत्री ने संसद में बताया था कि चीन ने 1962 से लद्दाख के अंदर 38 हजार वर्ग किमी इलाके पर कब्जा कर रखा है। इसके अलावा पाकिस्तान ने PoK में 5,180 वर्ग किमी जमीन अवैध रूप से चीन को दे दी है। इस तरह चीन का भारत की करीब 43 हजार वर्ग किमी जमीन पर कब्जा है। उधर, चीन अरुणाचल प्रदेश की भी 9 हजार वर्ग किमी जमीन को अपना बताता है। भारत इन दावों को नहीं मानता।

 

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