चाणक्य के अनुसार संसार में इन 6 से रिश्ता बनाने पर मनुष्य का मन तृप्त हो जाता है

दोस्तों हमारे जीवन में रिश्तो का बहुत ही महत्व होता है और रिश्तो पर ही हमारा जीवन चलता है आज हम आपके लिए एक ऐसी खबर ले कर आये है जो की किसी इंसान के जीवन में बनने वाले कई रिश्तो के बारे में आज अआप को बताने जा रहे है जो की चाणक्य जी के द्वारा बताया गया है| आज हम आपको चाणक्य की एक ऐसी निति के बारे में बताने जा रहे है जो आपको सफलता के मार्ग में आगे बढने के लिए मदद करेगी| आपको बता दे की आचार्य चाणक्य एक महान ज्ञानी के साथ साथ एक अच्छे नीतिकार भी थे , उन्होंने अपनी नीतियों में मनुष्य जीवन को सुखी कर बनाने के लिए बहुत से महत्वपूर्ण बाते बताई है आज हम आपको आचार्य चाणक्य जी के बताये हुए मनुष्य के उन छह गुणों के बारे में बताने जा रहे है|

1.सत्य

किसी में कहा है सत्य का मार्ग सबसे अच्छा मार्ग है और सत्य को हमेशा अपनी माता के समान स्वीकार करना चाहए , इस विश्व का सबसे सुंदर और सबसे निर्मल नाता है माता है और पुत्र का माँ अपने सन्तान से सदा से प्रेम करती है| जब भी हमे ठोकर या चोट लगती है हमारी जुबा पर सबसे पहले माँ का नाम आता है | उसी तरह जीवन में हमेशा मुख पर सत्य ही आना चाहिए सत्य के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को कभी डर नही लगता जैसे अपनी माँ की गोद में बैठे बालक को अपनी माँ पर पूर्ण विशवास होता है उसी तरह हमेशा सत्य पर विश्वाश के उसका साथ देना चाहिए झूठ के मार्ग पर चलने वाले लोगो को जीवन में कभी ना कभी तो ठोकर का सामना करना पड़ता है|

2.ज्ञान

आचार्य चाणक्य के अनुसार पिता को ज्ञान का दर्जा दिया गया है , इसका अर्थ है ज्ञान का पिता के समान आदर करो जब भी आप किसी मुश्किल में फस जाते हो तो आपके पिता आपकी मदद के लिए सबसेपहले नंबर पर होते है, वैसे ही ज्ञान आपकी सहायता करता है कहा जाता है की अज्ञानी मनुष्य इस संसार में किसी पशु की तरह होता है जो की हमेशा बोझ उठता है लेकिन एक ज्ञानी मनुष्य अपने ज्ञान के सहारे से हर मुश्किल को पार कर लेता है|

3.धर्म

चाणक्य कहते है धर्म को अपना साथी समझना चाहिए , इसका अर्थ है आने धर्म को अपना बन्धु समझकर उस्की रक्षा करनी चाहए जैसे आपका भाई आपकी रक्षा करने में हमेशा तत्पर रहता है उसी प्रकार आपको अपने धर्म का पालन करना चाहए , मनुष्य का धर्म है मानवता |सदा धर्म के पथ पर चलने वाले व्यक्ति का हमेशा लोग सम्मान करते है , जैसे पांच पांडव में धर्मराज युधिष्ठर का उनके पांचो भाई आदर करते थे , उनके सभी कथन को सत्य मानकर उनका साथ देते थे उसी प्रकार मनुष्य को अपने धर्म का अपने भाई की आज्ञा के समान पालन करना चाहए |

4.दया

दया सबसे बड़ी काला है और इसको हमेशा सबसे आगे रखना चाहिए चाणक्य कहते है दया सखा , इसका अर्थ है दया ही आपका सबसे अच्छा मित्र है, दया मनुष्य का एक ऐसा गुण है , जो शत्रुओं को भी मित्र बना देता है, हमेशा क्रोध में रहना उचित नही होता| दुसरो पर दया करने वाला मनुष्य संसार में हमेशा से पूजनीय होता है|

5.शांति

चाणक्य के निति के अनुसार शान्तो को पत्नी का दर्जा दिया है  इसका अर्थ है मनुष्य को शान्ति को ही अपनी पत्नी समझना चाहिए क्योकि शांत वातावरण में मनुष्य का मन तृप्त हो जाता है जैसे की उसकी पत्नी का प्रेम मिलने पर उसका मन तृप्त हो जाता है इसलिए हमेशा खुश रहने के लिए मनुष्य को शांति बनाये रखना चाहिए क्रोध के आगोश में रहने वाले मनुष्य को भी सुख नही मिलता, जो मनुष्य अपने स्वभाव को हमेशा शांत रखता है , क्रोध को स्वयम पर कभी हावी नही होने  देते ऐसे व्यक्ति से सभी लोग प्रेम करते है |

6.क्षमा

अब आखरी में बरी अति है क्षमा की चाणक्य कहते है क्षमा को अपने पुत्र समझना चाहिए  जिस प्रकार मनुष्य अपने पुत्र की हर भूल को क्षमा कर देता है उसी प्रकार उसे सभी लोगो को भी क्षमा कर देना चाहिए| क्षमा से बड़ा कोई उपाय नही है इसको सबसे ऊँचा दर्जा दिया गया है|

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