चर्चा में लव जिहाद

आजकल हर जगह लव जिहाद की चर्चा हो रही है। देश में अक्सर समय -समय पर विभिन्न राजनैतिक दलों एवं हिंदूवादी संगठनों द्वारा इसकी चर्चा होना अब आम बात हो गई है।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि लव जिहाद होता है और मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन करवाकर लव जेहाद करते हैं। इसकी शुरुआत तब हुई जब केरल हाईकोर्ट ने एक हिंदू महिला अखिला अशोकन की शादी को रद्द कर दिया था।अखिला अशोकन ने दिसंबर 2016 में मुस्लिम शख्स शफीन से निकाह किया था।आरोप है कि निकाह से पहले अखिला ने धर्म परिवर्तन करके अपना नाम हादिया रख लिया। जिसके खिलाफ अखिला उर्फ हादिया के माता-पिता केरल हाईकोर्ट पहुंचे।जिन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में फिदायीन बनाने के लिए लव जेहाद का सहारा लिया गया। जिसके बाद केरल हाईकोर्ट ने अखिला उर्फ हादिया और शफीन के निकाह को रद्द कर दिया। लेकिन अखिला उर्फ हादिया के पति शफीन ने केरल हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की एनआईए जांच के आदेश दिए। आतंकवादी घटनाओं की जांच करने वाली एजेंसी को अखिला उर्फ हादिया और शफीन के प्रेम विवाह में लव जेहाद और टेरर कनेक्शन का जिम्मा सौंपते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की, वो भी गौर करने लायक है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जिस तरह इंटरनेट गेम ब्लू व्हेल में किसी लड़के या लड़की को टास्क दिए जाते हैं और जिसमें उसे आखिर में सुसाइड करना होता है, उसी तरह आजकल किसी को भी खास मकसद के लिए राजी करना आसान हो गया है’।लेकिन वर्तमान समयांतराल में जो परिद्श्य चल रहा है उसको देखते हुए यह कहना मुश्किल हो गया है अगर कोई लड़की किसी गैर धर्म के युवक से प्यार करती है और वह उसको विस्वास दिलाता है की वह उससे सिर्फ प्यार करता है इसमें धर्म आड़े नही आएगा तो इस बात पर विस्वास करना अब कठिन हो गया है। वही अगर टास्क की बात करे तो यह टास्क एक धर्म मे भी हो सकता है अगर इसको नाम दिया जाए तो क्या नाम दिया जाए ये भी एक प्रश्न उठता है क्योंकि वर्तमान समयांतराल में जो युवतियों के प्रति हमारे नौजवानो की मनोदशा है उससे साफ प्रतीत होता है कि आज की युवा पीढ़ी भटक सी गई है वह नवयुवतियों के शारीरिक आकर्षण के प्रति इतना उतावला हो गया है कि वह गलत कदम उठाते समय जरा भी नही सोचता कि इसके कितने गम्भीर परिणाम उसको भुगतने पड़ सकते है।देखा जाये तो लव जिहाद अपने आप में सही शब्द नहीं है क्योंकि जहाँ जिहाद होता है वहाँ लव के लिये कोई जगह नहीं होती और जहाँ लव होता है वहां जिहाद की कोई जरूरत ही नहीं है। इस्लामिक धारणा के अनुसार जिहाद पवित्र शब्द हो सकता है लेकिन वर्तमान में जिहाद का मतलब मासूम और निर्दोष महिलाओं, पुरूषों और बच्चों का शोषण-उत्पीडऩ तथा बर्बर हत्याएँ करना ही है।अगर मुस्लिम युवकों को धर्म ज्यादा प्यारा है तो उन्हें हिंदू लड़कियों से दूर रहना चाहिये। हिंदू संगठन भी इसलिये इन प्रेम विवाहों के खिलाफ है कि इस तरह से हिंदुओं की आबादी कम करने का प्रयास चल रहा है। केरल में ऐसे कई संगठन है जो सुनियोजित तरीके से धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं और लव-जिहाद भी इसमें से एक तरीका है जिससे इस्लाम धर्म में लोगों को परिवर्तित किया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को लालच देकर या धमकाकर धर्म परिवर्तन कराना कानूनी रूप से भी गलत है और धार्मिक रूप से भी। मुस्लिम विद्वान भी यह कहते हैं कि किसी भी गलत तरीके से धर्मपरिवर्तन उचित नहीं है।आतंकवादी और कट्टरवादी मुस्लिमों के कारण आज पूरे विश्व में मुसलमानों को शक की नजर से देखा जा रहा है। यही समय है जब मुस्लिम समाज को गलत को गलत कहना सीखना होगा। दूसरे धर्म के व्यक्ति से प्रेम और विवाह हिम्मत का काम है लेकिन कुछ लोगों के कारण ऐसे व्यक्ति शक के घेरे में रहते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि प्रेम में सारा त्याग महिलाओं से नहीं माँगा जाना चाहिये। यदि किसी हिंदू या मुस्लिम युवक को दूसरे धर्म की युवती से प्रेम होता है तो उसे अपना धर्म बदलकर युवती का धर्म स्वीकार करना चाहिये। तभी ये साबित हो पायेगा कि उसका प्रेम सच्चा है। सच्चा प्रेम त्याग नहीं माँगता बल्कि त्याग करता है। ये मुद्दा साल 2014 में उत्तर प्रदेश में भी जमकर गर्माया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कई ऐसे मामले सामने आने लगे कि जहां जबरन हिंदू लड़की को शादी के बाद इस्लाम को कबूल करवाने के लिए मजबूर किया गया। ये भी आरोप कई संगठनों की तरफ से लगाए गए कि हाथ में कलावा और सिर पर तिलक लगाकर लव जिहादी दूसरे धर्म का होने का छलावा करते हैं। इन्हें बाइक और पैसा दिया जाता है ताकि ये लड़कियों को अपने जाल में फंसा सके। इसलिए ‘लव जिहाद’ को ‘रोमियो जिहाद’ भी नाम दिया गया है।जब युवक अपना धर्म प्रेम के लिये छोडऩे की हिम्मत दिखायेंगे, तब पता चलेगा कि उनका समाज उनके साथ कैसा व्यवहार करता है ?

रिपोर्ट-योगेंद्र गौतम

 

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