चर्चा में:एमपी का मशहूर कड़कनाथ मुर्गा अब गया के बाजारों में छाया, कीमत है हजार रुपए किलो

 

कड़कनाथ मुर्गों के साथ इंजीनियर प्रभात। - Dainik Bhaskar

कड़कनाथ मुर्गों के साथ इंजीनियर प्रभात।

  • चिकेन बाजार में काली मुर्गी के नाम से प्रसिद्ध कड़कनाथ मुर्गे की कीमत है हजार रुपए किलो

अपने औषधीय गुणों, कम फैट, चटखदार काले रंग और लजीज स्वाद के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध कड़कनाथ मुर्गा अब गया के बाजारों में भी छाने लगा है। पहले सिर्फ देश के मध्य प्रदेश राज्य में उपलब्ध कड़कनाथ मुर्गा को गया में उपलब्ध कराने का श्रेय जाता है गया के इंजीनियर प्रभात को।

इंजीनियर प्रभात ने कड़कनाथ मुर्गे के पालन के लिए कोंच प्रखंड के बड़गांव में फार्म की स्थापना की है। जहां वे इसे पाल रहे हैं। अपने औषधीय गुण, सबसे कम फैट, चटखदार काले रंग, हमेशा याद रहने वाले लजीज स्वाद आदि के लिए पहचाने जाने वाले कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गा-मुर्गियों की डिमांड इन दिनों काफी बढ़ गई है।

आदिवासी बहुल क्षेत्र मध्य प्रदेश के झाबुआ में पाए जाने वाले कड़कनाथ की मांग सर्दियों के दिनों में देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होती है। अब कड़कनाथ मुर्गे गया जिले में भी मिलने लगे हैं। कड़कनाथ मुर्गा मांसाहारियों के लिए खाद्य पदार्थ के रूप में अपनी खास पहचान बना चुका है। कड़कनाथ को चिकेन बाजार में काली मुर्गी के नाम से जाना जाता है। इसको बेहद पौष्टिक और ताकत प्रदान करने वाला भी माना जाता है। इसका मांस, चोंच, कलगी, जुबान, टांगे, नाखून, चमड़ी यहां तक कि खून भी काला होता है।

कोरोना काल में चरम पर थी कड़कनाथ की मांग

एक तरफ जब लोग कोरोना काल में आम देसी मुर्गा तक खाना छोड़ रहे हैं। तो दूसरी तरफ कड़कनाथ मुर्गा की मांग में लगातार इजाफा होता दिख रहा है। कोविड-19 के जारी प्रकोप के बीच मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले की पारंपरिक मुर्गा प्रजाति कड़कनाथ की मांग इसके पोषक तत्वों के कारण देश भर में बढ़ रही है। कड़कनाथ चिकन की नस्ल मूलत: मध्य प्रदेश राज्य के झाबुआ डिस्ट्रिक्ट में पाई जाती है। इस नस्ल के चिकन देखने में काले होते हैं और इनके द्वारा दिए जानेवाले अंडों का बाहरी रंग भूरा होता है, जबकि इसके मांस का रंग भी काला होता है।

इंजीनियर प्रभात ने शुरू की कड़कनाथ की फार्मिंग

कड़कनाथ मुर्गे की बढ़ती मांग को देखते हुए गया के इंजीनियर प्रभात ने इसकी फार्मिंग शुरू की है। वे बताते हैं कि। पहले सिर्फ मध्य प्रदेश में फार्मिंग होने के कारण यहां यह काफी मुश्किल से उपलब्ध हो पाता था, लेकिन अब यह यहां के बाजार में आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

पूरे विश्व में केवल तीन चिकन की नस्लें ही हैं काली

दुनिया में केवल तीन ही ऐसी चिकन की नस्लें हैं जिनका रंग काला होता हैं और इन नस्लों में से एक नस्ल कड़कनाथ चिकन की है। इस नस्ल का ये चिकन केवल भारत में ही पाया जाता है। जबकि दो अन्य काले चिकन की नस्लों के नाम सिल्की और अय्याम समानी है। सिल्की नस्ल के चिकन चीन में पाए जाते हैं जबकि अय्याम समानी नस्ल के चिकन इंडोनेशिया देश में पाए जाते हैं।

 

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