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घरों की देखभाल करते हैं नागदेवता बरेली के इस गांव में रात में , घर के लोगों की गंध से करते हें पहचान..!

कालसर्प योग की बात आती है तो प्रत्येक व्यक्ति भयभीत हो जाता है किन्तु शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर गांव अधकटा ब्रह्मनान में लोगों के घरों की रखवाली नागदेवता ही करते हैं। यहां बने 250 घरों में दरवाजे तक नहीं है। ग्रामीण कहते हैं कि वे सांपों को सांप नहीं जबकि अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी सांपों के साथ खेलते हैं। गांव के अंदर एक मंदिर है। मंदिर के गुम्मद पर भी सांप बने हैं। नाग पंचमी पर दूर-दूर से लोग इस गांव में सांपों को दूध पिलाने आते हैं। यदि सांप, बिच्छू या कोई विषैला जीव किसी को काट ले तो ये लोग उसे ठीक कर देते हैं। गठिया, पथरी, कंठमाला जैसी बीमारियों का भी उपचार करते हैं। गर्मी में सांप को नहलाते हैं। यदि सांप रोग होता है तो ये लोग देखते ही पहचान जाते हैं।

स्वस्थ होने पर उसकी पूजा करके कहीं दूर जंगल में जाकर छोड़ देते हैं। यदि नाग-नागिन को जोड़ा है तो दोनों को एक साथ ही छोड़ते हैं जिससे दोनों एक-दूसरे से बिछुड़े न।

रात को खुले में घूमते हैं नाग

जहां पर नाथ परिवार रहते हैं वह घनी आबादी है। एक-दूसरे से जुड़े मकान हैं। किसी भी घर में दरवाजा नहीं था। पूछने पर बताया कि सांप मांसाहारी होता है। मेढ़क, चूहा, खरगोश, कीड़े-मकोड़े खाता है। पानी और दूध भी पीता है। रात को नागों को पिटारे के बाहर निकाल देते हैं। पूरे घर में रात को नाग घूमते हैं। यदि बिल्ली भी अंदर आती है तो उसे देखते ही नाग फुफकारते हैं क्योंकि घर के लोगों की गंध नाग पहचानते हैं। बाहरी कोई भी अंदर आएगा तो नाग देव उसे फुंकार मारकर अलर्ट करते हैं।

अपनों की कदमों की आहट पहचानते हैं नाग

भोजीपुरा थाना क्षेत्र का गांव है अधकटा ब्रहमनान में मिश्रित आबादी रहती है, किन्तु नाथ जाति के लोगों की संख्या अधिक बताई जाती है। इन परिवारों के लोगों का काम किसी घर में सांप की सूचना मिलने पर उसे पकड़ना होता है। सांप को एक से दो महीने तक अपने घर में रखकर उसकी पूजा करना। पता नहीं ऐसा क्या है उनके पास जो खूंखार नाग भी उनके इशारे को समझते हैं। परिवार में जितने भी लोग हैं, सांपों उनके कदमों की आहट को पहचानते हैं।

सांप भी समझते हैं मालिक की भाषा

राजू और सूरज ने बताया, हमारे पुरखों ने हमें सांप से दोस्ती करना विरासत में दिया है। सांप भी इंसानों की भाषा को समझते हैं। 368 प्रजाति के सांप होते हैं। इनमें से 68 ही विषैले होते हैं। जिनमें जहर पाया जाता है। कोबरा ही सबसे ज्यादा जहरीला होता है। जब नाग अपना फन फैलाता है तो हम उसे अंगुलियों के इशारे से काबू में करते हैं।

सांपों से दोस्ती करना बाएं हाथ का खेल

तेजवीर और वीरेंद्र ने बताया, दादा-परदादा का काम भी यही था। जैसे लोग अपने घरों में कुत्ते-बिल्ली पालते हैं। उसी प्रकार से हम अपने घरों में सांपों को पालते हैं। भगवान भोले का स्वरूप हैं नाग देवता। यहां तो नाथ परिवारों में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा। जिसके यहां दो-चार नाग न हों। हम सांपों को परिवार का सदस्य मानते हैं।

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