ग्राहकों को अलावा छूट देने से डीलरों को रोकती थी Maruti Suzuki, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जाँच में हुआ खुलासा!

मारुति सुजुकी ने डीलरों के बीच प्रतियोगिता समाप्त करने की प्रयास की है. साथ ही यह जांचने के लिए कि छूट दी जा रही है या नहीं, इसके लिए मारुति डीलरों पर कड़ी नजर रखने के लिए फर्जी ग्राहक भी भेजती थी

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के विरूद्ध चल रही जाँच पूरी हो गई है. सीसीआई की जाँच टीम ने मुद्दे की रिपोर्ट आयोग को सौंप दी है. मारुति सुजुकी पर कार बेचते समय बीमा योजनाएं सुझाने का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्राहकों को मार्केट में मौजूद विकल्पों की तुलना में अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है.

इसके अतिरिक्त डीलरों की तरफ से मारुति सुजुकी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने उन्हें ग्राहकों को अलावा छूट देने की अनुमति नहीं दी है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार जाँच टीम ने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में बोला गया है कि मारुति सुजुकी ने डीलरों के बीच प्रतियोगिता समाप्त करने की प्रयास की है. साथ ही यह जांचने के लिए कि छूट दी जा रही है या नहीं, इसके लिए मारुति डीलरों पर कड़ी नजर रखने के लिए फर्जी ग्राहक भी भेजती थी. जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी को जैसे ही पता चलता था कि डिस्काउंट ऑफर किए जा रहे हैं, तो मारुति उन डीलर्स पर दंड भी लगाती थी.
मामले की जाँच 2019 में प्रारम्भ की गई थी, जब एक डीलर ने कम्पलेन की कि कंपनी ने डीलरों से ग्राहकों को अलावा डिस्काउंट देने से मना किया है. हालांकि अभी ये रिपोर्ट आयोग को सौंपी गई है, आयोग के पास ये अधिकार है कि वह चाहे तो इस पर संज्ञान ले सकता है या इसे अस्वीकार भी कर सकता है. यदि आयोग इस रिपोर्ट को स्वीकार करता है तो फाइनल ऑर्डर देने से पहले वह सुनवाई कर सकता है. इसके लिए माकुति सुजुकी को समन भेजा जा सकता है.
सीसीआई को जून 2019 में मिली कम्पलेन में देश की सबसे बड़ी कार कंपनी पर कार बेचते समय बीमा योजनाएं सुझाने का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्राहकों को मार्केट में मौजूद विकल्पों की तुलना में अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है. कम्पलेन के आधार पर सीसीआई इस बात की जाँच कर रहा है कि क्या मारुति ऐसी ‘व्यवस्था’ में लिप्त है, जिसमें कार कंपनी ल्युब्रिकेंट या बीमा जैसी वस्तुओं के लिए अपने पसंदीदा आपूर्तिकर्ता को बढ़ावा देती है. भारतीय कानून कहता है कि ऐसी प्रक्रियाएं प्रतिस्पर्धा रोधी हैं, जो प्रतिस्पर्धा को समाप्त करती हैं और कंज़्यूमर के लिए विकल्पों को सीमित करती हैं.

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