गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में बिहार के मंत्री विनोद सिंह की कोरोना के बाद ब्रेन हैमरेज से मौत, पत्नी लड़ेंगी प्राणपुर से चुनाव

 

विनोद सिंह को 16 अगस्त को पटना से एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाया गया था।

  • विनोद सिंह की पत्नी निशा सिंह को उनकी जगह पहले ही प्राणपुर से विधानसभा चुनाव का टिकट दे रखा है
  • मंत्री विनोद सिंह को 16 अगस्त को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया था

भाजपा नेता और बिहार सरकार में मंत्री विनोद सिंह का सोमवार को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। कोरोना पॉजिटिव होने के कारण विनोद सिंह लंबे समय से बीमार थे। विनोद सिंह की मौत ब्रेन हेमरेज से हुई। विनोद सिंह की पत्नी निशा सिंह को उनकी जगह पहले ही प्राणपुर से विधानसभा चुनाव का टिकट दे रखा है।

बिहार के पिछड़ा-अति पिछड़ा कल्याण मंत्री विनोद सिंह को 16 अगस्त को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया था। उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था। विनोद को पहले पटना के रूबन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें दिल्ली के मेदांता अस्पताल ले जाया गया था। एमआरआई रिपोर्ट के अनुसार उनके ब्रेन में दो जगह ब्लड क्लॉट था।

इससे पहले 28 जून को हुई कोरोना जांच में विनोद सिंह और उनकी पत्नी निशा सिंह की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। दोनों को कटिहार मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। दोनों कोरोना से स्वस्थ्य हो गए थे। विनोद सिंह कोरोना संक्रमित होने वाले नीतीश मंत्रिमंडल के पहले मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद बिहार में किसी मंत्री की यह पहली मौत है।

तेज-तर्रार नेता थे विनोद सिंह
कटिहार के प्राणपुर के मनसाही थाना क्षेत्र के बचनाहा गांव के रहने वाले विनोद सिंह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से ही एक्टिव थे। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कटिहार जिला अध्यक्ष बनने के बाद इन्हें किसान मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था।

तीन बार विधायक रह चुके विनोद सिंह को नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में पिछली बार मंत्री बनाया गया था। इन्होंने अति पिछड़ा कल्याण विभाग और खनन एवं भू तत्त्व विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। 2000, 2010, 2015 में विधायक बने विनोद सिंह भाजपा के अति पिछड़ा नेताओं में सबसे तेज तर्रार माने जाते थे।

विनोद सिंह ने कहा था, बिहार में एनआरसी जरूरी
मंत्री विनोद सिंह कई बार अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे थे। नीतीश सरकार के वह पहले ऐसे मंत्री थे, जिन्होंने बिहार में एनआरसी लागू करने की मांग की थी। विनोद सिंह ने दावा किया था कि बिहार के सीमांचल इलाकों में करीब 40 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, जिसको लेकर बिहार में एनआरसी जरूरी है।

यही नहीं, उन्होंने भाजपा के एक समारोह में ये कहकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि ‘भारत माता की जय’ का नारा न लगाने वाले मीडियाकर्मी, पाकिस्तान के समर्थक हैं। विनोद के इस बयान पर बिहार के सियासी गलियारों में खूब हंगामा हुआ था और विपक्ष ने जमकर उन पर बयानी हमले किए थे।

विनोद तब भी चर्चा में आए थे जब 3 जून 2019 को उन्हें खनन विभाग से हटाकर पिछड़ा-अतिपिछड़ा विभाग का मंत्री बना दिया गया था। तब विनोद ने अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं की नीयत पर सवाल खड़े कर भाजपा को परेशानी में डाल दिया था। हालांकि बाद में मान-मनौव्वल के बाद वह चुप हो गए थे।

 

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