गहलोत का पीएम को पत्र:केंद्र और राज्य सरकार की राजनीति में फंस गया 37.2 हजार करोड़ का ‘ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट’

2.8 लाख हैक्टेयर जमीन में इस प्रोजेक्ट से सिंचाई भी की जा सकेगी। - Dainik Bhaskar

2.8 लाख हैक्टेयर जमीन में इस प्रोजेक्ट से सिंचाई भी की जा सकेगी।

  • मुख्यमंत्री और जलदाय मंत्री ने पीएम-जल शक्ति मंत्री को लिखे पत्र, गहलाेत ने नीति आयाेग की मीटिंग में भी उठाया था मामला

राजस्थान की करीब तीन करोड़ जनता से जुड़ा ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट राज्य व केंद्र सरकार के ‘अहम’ व ‘राजनीति’ में फंसा है। प्रोजेक्ट में 37 हजार 247 करोड़ रुपए खर्च होने है, ऐसे में मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत इसे नेशनल प्रोजेक्ट घोषित कर केंद्र से फंड चाहते है, लेकिन केंद्र हर बार कोई न कोई ऑब्जेक्शन लगा कर फाइल लौटा देता है।

मुख्यमंत्री पिछले दो साल में आधा दर्जन पत्र प्रधानमंत्री व जल शक्ति मंत्री को लिख चुके है। 20 फरवरी काे नीति आयोग की बैठक में भी सीएम ने इसका मुद्दा उठ चुका है। पीएम नरेंद्र माेदी काे उनका वादा याद दिलाया। प्रोजेक्ट की डीपीआर बने पांच साल से भी ज्यादा समय हो चुका है।

इस प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग (नई दिल्ली) ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, लेकिन केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिलने के बाद ही काम हो सकेगा। प्रदेश में नेशनल प्रोजेक्ट के तौर पर इंदिरा गांधी केनाल प्रोजेक्ट का काम हो चुका है। ऐसे में राज्य सरकार ईआरसीपी को लेकर भी केंद्र से पूरा खर्चा चाहता है।

ऐसे होगा पानी का बंटवारा

50 फीसदी पानी पेयजल
14 फीसदी पानी इंडस्ट्रीज
06 फीसदी पानी सिंचाई
अटकने की वजह: केंद्र में भाजपा व राज्य में है कांग्रेस की सरकार

  • केंद्र में भाजपा व राज्य में कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि प्रोजेक्ट की घोषणा का प्रदेश की कांग्रेस सरकार को फायदा मिले।
  • कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध नदी के पानी के डायवर्जन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार की आपत्ति
  • नेशनल प्रोजेक्ट घोषित करने पर पूरा खर्चा केंद्र सरकार को ही देना होगा। केंद्रीय जल आयोग की ओर से भी स्थिति स्पष्ट नहीं।
  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दोनों ही मारवाड़ से होने पर वर्चस्व की लड़ाई है।

इन जिलों को नहीं मिल रहा लाभ
ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट (अब कालीसिंध-पार्वती-चंबल इंटरलिंक रिवर्स प्रोजेक्ट) में 13 जिले अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, जयपुर, अजमेर, टोंक, बूंदी, कोटा, बारां व झालावाड़ शामिल है। इस प्रोजेक्ट में मानसून के दौरान कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध, मेज नदी बेसिनों के अधिशेष पानी को बनास, मोरेल, बाणगंगा, पार्बती, कालीसिंध व गंभीर नदी बेसिनों में पहुंचाया जाना है।

केंद्र सरकार कोई जवाब नहीं दे रही: जलदाय मंत्री
जलदाय मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईआरसीपी को नेशनल प्रोजेक्ट बनाने की घोषणा कर चुके है। हम कोई बार व्यक्ति तौर व पत्रों के जरिए इस इस बात को रख चुके है, लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आता है। इससे आम जनता परेशान हो रही है।

 

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